आगरा(ब्यूरो)। इसकी जिम्मेदारी बीट कांस्टेबल को दी थी, जो बुजुर्गों के घर दस्तक देकर उनका हाल चाल पूछते, लेकिन पुलिस की ये प्लानिंग फाइलों मेें धूल फांक रही है।

केस1
कमरे में मिला था बुजुर्ग का शव
17 मार्च 2024 को शाहगंज में 75 वर्षीय राजीव माथुर का शव कमरे में मिला था। कई दिन से वह नजर नहीं आ रहे थे। घर से दुर्गंध आने पर पड़ोसी ने सूचना दी थी। बेटा अमेरिका में रहता था। पत्नी से तलाक हो गया था। भांजे ने शव को मुखाग्नि दी थी। आसपास के लोगों ने बताया कि वे किसी से बात नहीं करते थे।

केस2
विजय नगर से बरामद किया कंकाल
थाना हरीपर्वत क्षेत्र के अंतर्गत फरवरी 2023 में नोर्थ विजय नगर कॉलोनी में एक महिला का कंकाल कोठी में मिला था। कोठी नंबर 67 में 65 वर्षीय निर्मल रहती थीं। उनकी मौत करीब दो माह पहले हुई थी। 500 गज में बनी कोठी में
निर्मल अकेले रहती थीं। अपने जमाने की पीएचडी थीं। वे आसपास के रहने वाले लोगों से बात नहीं करतीं थीं। दूर के रिश्तेदार के घर आने पर पता चला कि उनकी मौत पहले ही हो चुकी है।

केस3
मां और बेटी की मिली थी सड़ी हुई लाश
अर्जुन नगर में मिला था मां का कंकाल, बेटी का शव तीन का फरवरी 2018 में अर्जुन नगर स्थित चाहर मार्केट में मां का कंकाल और बेटी की सड़ी हुई लाश मिली थी। मां की मौत के बाद बेटी शव को घर में ही रखे हुए थी। शव से दुर्गंध नहीं आए इसलिए उसके पास अगरबत्ती जलाया करती थी। संक्रमण की वजह से बेटी गंभीर बीमार हो गई थी। उसने भी दम तोड़ दिया था। 70 वर्षीय विमला अग्रवाल अपनी 55 वर्षीय बेटी वीना के साथ रहती थीं।

केस4
दोनों बहनों की मौत के बीच 5 घंटे का फर्क
दोनों में से एक बहन नवोदय विद्यालय से नर्स से रिटायर थीं। जबकि दूसरी बहन दिल्ली से आने के बाद नर्स के साथ रहने लगी थी। शुक्रवार को दूर के रिश्तेदार एसएन मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। उन्होंने दोनों बहनों के बारे में कुछ भी बताने का इंकार कर दिया। दोनों बहनों की मौत के बीच पांच घंटे का फर्क बताया जा रहा है, वहीं मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है, बिसरा सुरक्षित रखा जाएगा। थाना प्रभारी शाहगंज अमित मान ने बताया कि शवों का पीएम हो चुका है लेकिन रिपोर्ट अभी नहीं मिली है।

योजना तो बनी पर नहीं हुआ अमल
योजनाएं बनीं पर अमल नहीं हुआ पुलिस ने ऑपरेशन सवेरा योजना बनाई थी। तय हुआ था कि अकेले बुजुर्गों के घर दस्तक दी जाएगी। पुलिस उनका हाल-चाल पूछेगी। बीट पुलिस ऑफिसर के पास रिकॉर्ड रहेगा कि उसके क्षेत्र में कितने बुजुर्ग हैं। नगर निगम से नंबर लिए गए। कुछ के पास फोन भी पहुंचे, लेकिन योजना का कोई अता-पता नहीं।


बुजुर्गों की देखभाल के लिए हर थाने में हेल्प डेस्क का गठन किया गया है। बीपीओ को उसकी जिम्मेदारी दी गई है। फिलहाल बीपीओ इलेक्शन में बिजी हैं। उनके डयूटी पर लौटते ही फिर से योजना पर अमल किया जाएगा। मेरी बुजुर्गों से अपील है कि अगर वह घर में अकेले हैं तो संबंधित थाने में सूचना अवश्य दें ताकि उनकी देखभाल की जा सके।
- जे रविंदर गौड, पुलिस कमिश्नर, आगरा