शनिवार को गुरु पूर्णिमा पर शिष्यों के पूजन अर्चन व आरती से गुंजायमान रहे मठ और मंदिर

सेवा व पूजा से प्रसन्न गुरुजनों ने शिष्यों को दिए भवबाधा से मुक्त रहने व कल्याण होने का आशीर्वाद

PRAYAGRAJ: 'गुरुर्ब्रम्हा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर:, गुरुरेव परंब्रम्हा तस्मै श्रीगुरवे नम:' इसी भाव और आस्था व विश्वास के साथ शनिवार को शिष्यों ने गुरु देव की पूजा आराधना की। गुरु पूर्णिमा पर्व पर गुरु के प्रति शिष्यों के मन में आस्था, विश्वास व समर्पण की लहर हिलोर मारती रही। मठ- मंदिरों में गुरु दर्शन-पूजन के लिए शिष्यों का तांता लगा रहा। आरती व पूजन करके शिष्य जन गुरु चरणाें में शीश झुकाकर ताउम्र आशीर्वाद बनाए रखने की कामना की। शिष्यों के पूजन व सेवा भाव से प्रसन्न गुरु ने भी उन्हें भवबाधा से मुक्त रहने व उनके कल्याण का आशीर्वाद दिया।

गुरु के पास खिचे चले आए शिष्य

गुरु पूर्णिमा पर भक्तजन भोर से संगम में पुण्य की डुबकी लगाने के लिए पहुंचने लगे। स्नान व ध्यान बाद तीर्थपुरोहितों के दरबार में शिष्य जन दान-पुण्य करके गुरु की पूजा आराधना में जुट गए। शंकराचार्य आश्रम अलोपीबाग में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य जगद्गुरु स्वामी वासुदेवानंद का उनके शिष्यों ने पूजन किया। सनातन धर्म व विधि से मंत्रोच्चार के साथ गुरू की आरती उतारी। उधर, वासुदेवानंद ने ज्योतिष्पीठ के सभी ब्रह्मालीन पीठाधीश्वरों का पूजन अर्चन किया। पूजन में डॉ। शिर्वाचन उपाध्याय, ब्रह्मचारी आत्मानंद, आचार्य छोटे लाल, आचार्य विपिन मिश्र आदि शामिल रहे।

ध्वज पूजा व रुद्राभिषेक से शुभारंभ

इसी तरह श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने सुबह ध्वज पूजन व जनकल्याण के लिए रुद्राभिषेक किया। श्रीमहंत अमर गिरि के नेतृत्व में शिष्यों ने महंत नरेंद्र गिरि की पूजन करके आरती उतारी। गुरु दर्शन व पूजन के लिए शिष्यों का यहां तांता लगा रहा। बांध स्थित श्रीदेवरहा बाबा आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव डॉ। रामेश्वर प्रपन्नाचार्य शास्त्री की अध्यक्षता में हुआ। ब्रह्मालीन देवरहा बाबा की मूर्ति का अभिषेक व पूजन किया गया। मनकामेश्वर मंदिर में ब्रह्माचारी श्रीधरानंद की अगुवाई में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद की प्रतिमा का पूजन अर्चन किया गया। इसके बाद श्रीधरानंद के शिष्यों ने भी उनका पूजन अर्चन किया। लक्ष्मीनारायण मंदिर अलोपीबाग में जगद्गुरु घनश्यामाचार्य की अध्यक्षता में गुरु की पूजन हुई। देश के विभिन्न शहरों से आए घनश्यामाचार्य के शिष्यों ने भी उनका आशीर्वाद लिया। परमहंस प्रभाकर जी महाराज के शिष्यों ने मंत्रोच्चार के बीच गुरु पूजा करके आशीर्वाद लिया।

गुरु चरणों में नहीं दिखे आनंद गिरि

गुरु पूर्णिमा पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के दर्शन व पूजन के लिए शिष्यों की लंबी कतार रही।

मगर, गुरु व शिष्य परंपरा के इस पावन पर्व पर उनके शिष्य योगगुरु स्वामी आनंद गिरि का नजर न आना चर्चा में रहा।

गुरु पूर्णिमा पर श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी आकर उन्हें गुरु की पूजा कर आशीर्वाद लेना था पर वह नहीं आए।

हरिद्वार में रहकर श्रीनिरंजनी अखाड़ा के आराध्य भगवान कार्तिकेय का पूजन करके गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया।

कहा कि गुरु ने उनसे जो वादा किया था उसके अनुरूप कोई काम नहीं किया। ऐसी स्थिति में वह प्रयागराज कैसे आते? इसी कारण वो प्रयागराज नहीं आए।

हर बार आनंद गिरि ही गुरु पूर्णिमा पर मठ की व्यवस्था का कार्यभार संभालते थे।

बताते चलें कि परिवार से सम्बंध रखने और गुरु के खिलाफ साजिश करने के आरोप में आनंद गिरि को निरंजनी अखाड़ा ने 14 मई 2021 को निष्कासित कर दिया था।

गुरु महंत नरेंद्र गिरि ने उन्हें मठ व मंदिर से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद आनंद गिरि ने गुरु पर जमीन बेंचने व कुछ विद्यार्थियों का करोड़ों का मकान बनवाने के साथ उनसे खुद की जान का खतरा होने का आरोप लगाया।

इस आरोप-प्रत्यारोप के कुछ दिन बाद 26 मई को नरेंद्र गिरि व आनंद गिरि का मिलन हुआ।

बताते हैं कि लखनऊ के एक शिष्य के घर पर आनंद गिरि ने गुरु के ऊपर लगाए आरोपों को वापस लेते हुए उनके पांव पर सिर रखकर बिना शर्त माफी मांगी थी।

गुरु के विशाल दिल का परिचय देते हुए नरेंद्र गिरि ने उन्हें क्षमा करते हुए गुरु पूर्णिमा पर श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी आकर गुरु पूजन में शामिल होने की अनुमति दी थी।

इस क्षमा याचना के बाद सभी को उम्मीद थी कि गुरु पूर्णिमा पर आनंद गिरि श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी आकर गुरु का आशीर्वाद लेंगे

मगर, एन वक्त पर गुरु दर्शन व पूजन अर्चन में उनका नजर न आना सिर्फ मौजूद शिष्यों में नहीं लोगों में भी चर्चा का विषय रहा।