भविष्य में मिलने वाले लाभ के लिए हस्तक्षेप से कोर्ट का इन्कार

लोक निर्माण विभाग में कार्यरत कर्मचारियों ने दाखिल की थी याचिका

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भविष्य में मिलने वाले लाभ के लिए जिसका इन्कार ही न किया गया हो, कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकती। कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग में विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को वर्कचार्ज कर्मचारी के रूप में की गयी सेवा अवधि को सभी परिलाभ देने में जोड़ने का समादेश जारी करने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सभी याची सेवारत हैं, कोई सेवानिवृत्त होने वाला नहीं है। विभाग ने वर्कचार्ज सेवा अवधि को परिलाभों के भुगतान के लिए जोड़ने से इन्कार भी नहीं किया है। ऐसे में याचिका दायर करने का कोई औचित्य नहीं है। भविष्य में यदि विभाग वर्कचार्ज सेवा अवधि परिलाभों के भुगतान के लिए जोड़ने से इन्कार करे, तब उसे उचित फोरम में उठा सकते हैं।

सेवा परिलाभों के लिए वर्कचार्ज सेवा अवधि भी जोड़ी जाय

यह आदेश जस्टिस आरएन तिलहरी ने सतीशचंद्र श्रीवास्तव व अन्य कर्मचारियों की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचियों का कहना था कि वे लोक निर्माण विभाग में वर्कचार्ज कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। उन्हें विभाग में ही स्थायी नियुक्ति मिल गयी है। सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते याचिका दाखिल की गई कि सेवा परिलाभों के लिए वर्कचार्ज सेवा अवधि भी जोड़ी जाय। कोर्ट ने कहा कि फैसलों में पेंशन आदि के भुगतान के लिए वर्कचार्ज सेवा अवधि जोड़ने का समादेश जारी किया गया है। याची सेवानिवृत्त नहीं हुए हैं, इसलिए उन्हें इस फैसले का अभी लाभ नहीं दिया जा सकता। फैसला विभाग पर बाध्यकारी है। समय आने पर इसका लाभ याचियों को अवश्य मिलेगा। यदि नहीं मिलता तो वे उचित फोरम में मुद्दा उठा सकते हैं।

Posted By: Inextlive