-सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बाद भी नहीं शुरू हो सकी बची सीटों पर शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया

-एमएलसी चुनाव ने बची सीटों की काउंसलिंग की तैयारी पर लगाया ब्रेक

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PRAYAGRAJ: सूबे के परिषदीय स्कूलों में 69000 भर्ती में बचे 36206 पदों पर भर्ती के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भले ही हरी झंडी दे दी। लेकिन इन पदों पर काउंसलिंग के लिए अभी अभ्यर्थियों को इंतजार करना पड़ेगा। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि सूबे में हो रहा एमएलसी चुनाव। इसकी वोटिंग एक दिसंबर को होनी है। ऐसे में प्रदेश में आचार संहिता लागू है। इसके चलते अभी इन पदों पर काउंसलिंग व नियुक्ति पत्र वितरण के लिए चयनित अभ्यर्थियों को इंतजार करना पड़ेगा। बेसिक शिक्षा परिषद भी आचार संहिता खत्म होने के इंतजार में है।

दो साल से अटका था मामला

सूबे में सहायक अध्यापक के 69000 पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन सचिव परीक्षा नियामक कार्यालय की ओर से कराया गया था। उसके बाद कट ऑफ समेत कई अन्य मुद्दों को लेकर विवाद शुरू हो गया। पूरा मामला कोर्ट में चला गया। करीब दो साल तक कानूनी पचड़े में फंसे रहने के बाद सहायक शिक्षक भर्ती को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिल गई है। सरकार शिक्षकों के 31,661 पद पहले ही भरी चुकी है। एसटी कैटेगरी के 1,333 पदों के लिए अभ्यर्थी नहीं मिले थे। ऐसे में 36,206 बचे हुए पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं। हालांकि अब पूरी प्रक्रिया चुनाव और आचार संहिता खत्म होने के बाद ही शुरू हो सकेगी।

त्रुटियों में सुधार का मौका देने का भी अटका है मामला

शिक्षक भर्ती के दौरान बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थियों द्वारा ऑनलाइन आवेदन में गड़बड़ी हो गई थी। इसका सीधा असर लिखित परीक्षा में चयनित अभ्यथिर्यों की मेरिट पर पड़ रहा है। इसे देखते हुए अभ्यर्थी लगातार सचिव बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय पर कई बार प्रदर्शन करते रहे है। ऐसे में काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरु करने के पहले बेसिक शिक्षा परिषद को इस विवाद को भी खत्म करना होगा।

एमएलसी चुनाव के कारण आचार संहिता लागू है। ऐसे में आचार संहिता खत्म होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।

-अनिल कुमार

उप सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद