60 फीसदी कोरोना करने का ही हो पा रहा है निस्तारण

05 रुपए कीमत है मार्केट में मिलने वाले सिंगल यूज मास्क की

450 साल लग जाते हैं थ्री लेयर मास्क को गलने में

-सिंगल यूज मास्क बने हैं पर्यावरण यूज के लिए खतरा

-सड़कों पर फेंके जाने से यह लंबे समय तक पहुंचाएंगे नुकसान

PRAYAGRAJ: कोरोना काल में सिंगल यूज मास्क, ग्लब्ज और पीपीई किट खूब यूज हो रहे हैं। वर्तमान में तो यह लोगों के लिए वरदान बने हुए हैं। लेकिन डर इस बात का है कि कहीं फ्यूचर में यह पर्यावरण के लिए खतरा न बन जाए। असल में लोग इनका एक बार यूज करने के बाद सड़कों पर फेंक दे रहे हैं। इनमें सबसे घातक थ्री लेयर मास्क है। पॉलीप्रोपिलीन से बने इस मास्क की उम्र 450 साल होती है। यह लंबे समय तक गलते नहीं हैं, ऐसे में यह फ्यूचर में मुसीबत बन सकते हैं।

तेजी से बढ़ रहा प्लास्टिक कचरा

कोरोना काल की शुरुआत के बाद तेजी से प्लास्टिक कचरा बढ़ रहा है। हालांकि इनके निस्तारण की जिम्मेदारी नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के पास है। लेकिन सोर्सेज के मुताबिक अभी भी 60 फीसदी से अधिक कचरे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इस कचरे का एक बड़ा हिस्सा सड़कों पर बिखरा मिल जाएगा। खासकर मास्क और ग्लब्ज की संख्या सबसे ज्यादा होती है। हेयर कैप भी अब बड़ी मात्रा में यूज किया जा रहा है।

पब्लिक कर रही रफ यूज

अधिकारियों का कहना है कि पब्लिक को समझा पाना मुश्किल साबित हो रहा है। मेडिकल स्टाफ द्वारा यूज किया जाने वाला प्लास्टिक कचरा डस्टबिन और बैग के जरिए सीधे बायो मेडिकल वेस्ट प्लांट पर जा रहा है। लेकिन सड़कों पर पड़ा कचरा लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है। लोग मास्क और ग्लब्ज वगैरह को डस्टबिन में डंप करने के बजाए इधर-उधर फेंक रहे हैं। यह इंफेक्शन का कारण बन सकता है।

कूड़ा बीनने वालों के लिए खतरा

इधर उधर फेंके जाने वाला यह प्लास्टिक कचरा कूड़ा बीनने वालों के लिए भी खतरनाक होता जा रहा है। इससे इंफेक्शन का खतरा बना हुआ है। जो लोग कचरा इकट्ठा करते हैं वह फेंके गए मास्क और ग्लब्ज को बार बार छूते हैं। इससे वायरस आसानी से उन तक पहुंच सकता है। लोगों की लापरवाही कूड़ा बीनने वालों के लिए भी खतरनाक बनी हुई है।

करोड़ों का है कारोबार

जिले में दवाओं का कारोबार प्रतिदिन ढाई से तीन करोड़ रुपए का है। कोरोना काल में सेनेटाइजर, ग्लब्ज, मास्क और पीपीई किट का यूज अधिक हो जाने के बार यह व्यापार कई गुना बढ़ गया है। लोग नियमित रूप से मास्क का यूज कर रहे हैं। मार्केट में सबसे ज्यादा पांच रुपए के थ्री लेयर मास्क की डिमांड है। यह पाली प्रोपलीन का बना है। हालांकि प्रॉपर निस्तारण होने पर इस मास्क के यूज करने में कोई बुराई नहीं है।

ऐसे यूज करें मास्क

-हो सके तो सिंगल यूज मास्क की जगह सूती कपड़ से बने मास्क का यूज करें।

-सिंगल यूज मास्क और ग्लब्ज को इधर-उधर फेंकने के बजाय डस्टबिन में डालें।

-इनको नगर निगम की कचरा गाड़ी को उपलब्ध करा दें।

-मास्क और ग्लब्ज के कचरे को बच्चों से दूर रखें।

-जहां आम कचरा फेंका जाता है वहां यह कचरा कतई न फेंकें।

हॉस्पिटल से निकलना मेडिकल वेस्ट तो सीएमओ के अंडर में आता है। वह इस कचरे को सीधे प्लांट पर भिजवा देते हैं। पब्लिक को जागरुक किया जा रहा है। अगर लोग नहीं माने तो टनों प्लास्टिक कचरा लोगों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा देगा। हमारे कर्मचारी सड़कों पर पड़े मास्क और ग्लब्ज आदि को मेडिकल वेस्ट प्लांट तक पहुंचा देते हैं।

-डॉ। विमलकांत, नगर स्वास्थ्य अधिकारी