-इस फाइनेंशियल ईयर से डेवलपमेंट पर खर्च होगा पूरा जल मूल्य और वाटर टैक्स

-अभी तक जलकल कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर खर्च होता था पूरा इनकम

-जलकल विभाग के बजट बैठक में कार्यकारिणी ने लिया निर्णय

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PRAYAGRAJ: शहर में कहीं पाइपलाइन खराब हो जाए, टयूबवेल फेल हो जाए या अन्य कोई बड़ा खर्च आ जाए तो नगर निगम का जलकल विभाग बजट न होने का रोना रोता है। 14वें और 15वें वित्त से मिलने वाले धनराशि का इंतजार किया जाता है। वजह, जल मूल्य, वाटर टैक्स और सीवर टैक्स से जो भारी-भरकम इनकम मिलता है, उसे अधिकारियों, कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर खर्च कर दिया जाता है। लेकिन इस फाइनेंशियल ईयर से किसी भी काम में बजट की कमी आड़े नहीं आएगी। इस फाइनेंशियल ईयर से अधिकारियों-कर्मचारियों का वेतन टैक्स से आने वाले बजट से नहीं बल्कि राज्य वित्त आयोग से मिलने वाले धनराशि से किया जाएगा।

मीटिंग में हुआ डिसीजन

मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी की अध्यक्षता में कार्यकारिणी सदस्यों एवं नगर निगम के अधिकारियों की मौजूदगी में सोमवार को जलकल विभाग मूल आय-व्ययक बजट चर्चा में यह निर्णय लिया गया। बैठक में नगर आयुक्त रवि रंजन, अपर नगर आयुक्त अमरेनन्द्र वर्मा, रत्न प्रिया, मुशीर अहमद, जीएम जलकल हरिश्चंद्र बाल्मिकी, कार्यकारिणी सदस्य शिव कुमार, आशोक कुमार सिंह, कमलेश तिवारी, अल्पना निशाद, नीलम यादव, जगमोहन गुप्ता, अमरजीत सिंह, नंदलाल, मिथलेश कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।

गंदे पानी की सप्लाई पर एक्शन

अब शहर में कहीं भी गंदे पानी के आपूर्ति की शिकायत आएगी तो अधिकारियों पर सीधे कार्रवाई होगी। क्योंकि अब धन की कमी पूरी तरह दूर कर दी गई है।

लिए गए यह निर्णय

टैंकर से सेप्टिक टैंक की सफाई का शुल्क 2,000 से 4,000

-त्यौहारी दी जाती थी, वह अब समाप्त किया गया

-सभी वाहनों का रजिस्ट्रेशन और बीमा कराने का आदेश

-एक लाख रुपये से उपर के जितने भी वर्क हैं, उसका ई-टेंडर कराना होगा

-जितने नलकूपों पर स्केडा सिस्टम लगा है, उन नलकूपों पर अब आदमी नहीं लगेंगे।

-जिन नलकूपों पर स्केडा नहीं लगा है, उसे लिए छह करोड़ से सिस्टम लगेगा।

-राज्य वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि को जलकल विभाग के बजट में शामिल कराया गया।

-मेन होल की फोटो देख कर ही ढक्कन दिया जाएगा

-जलकल की जमीन पर अवैध रूप से रह रहे लोगों की दो दिन के अंदर लिस्ट मांगी गई।

-वसूली में तेजी लाने का निर्देश दिया गया।

-जलकर का बजट 24 करोड़ से 35 करोड़ और सीवर कर 4.66 करोड़ से पांच करोड़ किया गया।

मोरी गेट और बक्शी बांध अब जलकल की जिम्मेदारी नहीं

मोरी गेट और बक्शी बांध एसटीपी गंगा प्रदूषण और अडानी ग्रुप को हैंडओवर किए गए हैं। 12 महीने के आठ महीने ये एसटीपी संचालित करते हैं। बरसात के समय चार महीने के लिए जलकल विभाग को हैंडओवर कर देते हैं। आठ महीने में जो भी खराबी आती है, उसे चार महीने में नगर निगम ठीक कराता है, फिर बरसात का मौसम झेला जाता है। जबकि एग्रीमेंट पूरे साल का है। चार महीने जलकल और नगर निगम एडमिनिस्ट्रेशन क्यों जिम्मेदारी संभाले?

जलकर पर कोई टैक्स नहीं बढ़ाया गया है। वाटर टैक्स और जल मूल्य पर ब्याज पूरी तरह से माफ कर दिया गया है। वहीं अब पैसे के अभाव में रुके हुए काम भी तेजी से होंगे, जिससे पेयजल आपूर्ति और सीवर की प्रॉब्लम दूर होगी।

-अभिलाषा गुप्ता नंदी

मेयर, प्रयागराज