प्रयागराज ब्यूरो । पापड़ और गुझिया के बगैर होली की मिठास फीकी रह जाती है। शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां पर्व पर खाने के यह सामान मौजूद नहीं हों। डिमांड को देखते हुए मार्केट में आलू, साबूदाना और केला से बने पापड़ व चिप्स की भरमार है। होली की खुशियों में मिठास घोलने वाली गुझिया के मार्केट में दो रंग दिखाई दिए। दोनों के भाव अलग-अलग बताई गई। इन खाद्य सामग्रियों की खरीदारी को लेकर मार्केट में जबरदस्त भीड़ रही। लोग अपनी-अपनी जरूरतों के हिसाब से सामानों की खरीदारी करने में मशगूल रहे। इस बार होली पर खाद्य सामग्रियों के मार्केट में चाइनीज आइटम का रंगा काफी फीका रहा।

मार्केट में है तीन तरह की गुझिया
रिश्तों की मिठास और खुशियों का रंग लेकर आई होली सोमवार को खेली जाएगी। सभी पर्व को मनाने की तैयारी में शनिवार से ही जुटे रहे। सामानों की खरीदारी के लिए बाजारों में काफी भीड़ी रही। शहर के कटरा से लेकर चौक तक खाने पीने में ड्राई फूड के साथ गुझिया और पापड़ की डिमांड काफी रही। मार्केट में देशी घी में तली गई मेवा गुझिया का रेट 700 से लेकर 800 रुपये किलो है। जबकि यही देशी-घी में बनी मेवा गुझिया का भाव 1000 से 1200 रुपये किलो बताया गया। वहीं खोआ व सूची और मेवा मिश्रण से तैयार तेल में तली हुई गुझिया दुकानों पर 300 से 350 रुपये किलो में बिक रही है। गुझिया की दुकानों पर लोगों की जबरदस्त भीड़ रही। हर कोई अपनी-अपनी जरूरत के अनुरूप गुझिया की खरीदारी करने में व्यस्त रहा। दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ देखते हुए व्यापारी भी काफी व्यस्त रहे।

पसीने छुड़ा रहा पापड़ का रेट
होली पर्व पर गुझिया के साथ पापड़ और मठरी जैसे आइटम खाने में न हों यह कैसे संभव हो सकता है। पर्व पर इसकी खपत को देखते हुए व्यापारी भी शनिवार को मुस्कुराते रहे। लोकल दुकानदारों द्वारा तैयार किया गया सूखा मसाला समोसे का भाव 90 रुपये पाव है। जबकि पपड़ी को दुकानदार रेट 80 से 90 पाव बेच रहे हैं। जबकि हैंड-मेड आलू के पापड़ 400 से 420 किलो है। वहीं मशीन से निर्मित इसी पापड़ का रेट 350 से 340 रुपये किलो है। मशीन से बनी आलू की चिप्स 200 से 220 रुपये किलो का रेट दुकानदार ले रहे हैं।

व्यापारियों ने दिखाई गजब की समझदारी
इस बार होली पर्व पर खाद्य सामग्री मार्केट में चाइनीज आइटम का रंग काफी फीका रहा।
पापड़, चिप्स आदि बेचने वाले दुकानदार खुद भी चाइनीज आइटम की गुणवत्ता पर बहुत भरोसा नहीं जता रहे।
कटरा के दुकानदार रमेश केसरवानी व शिवशंकर गुप्ता और राकेश कुमार आदि कहते हैं कि हम दो रुपये बचत के चक्कर में अपने ग्राहकों व लोगों की सेहत खिलवाड़ नहीं कर सके।
चाइनीज आइटम की गुणवत्ता पर भरोसा नहीं किया जा सकता। जब वह प्लास्टिक का चावल बनाकर बेच सकता है,
तो क्या भरोसा कि पापड़ चिप्स जैसी चीजें वे शुद्ध ही भेजेगा। इस बार हम व्यापारी लोग खाने पीने के सामानों में चाइनीज आइटम से दूरी बनाकर रखे हुए हैं।
ताकि हमारे किसी भी ग्राहक व भाई की सेहत इस होली पर खराब नहीं हो। लोकल के सामान दो रुपये महंगा जरूर बेचेंगे मगर शुद्ध बेचेंगे।