बरेली (ब्यूरो)। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, सम विश्वविद्यालय को वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए तेजी से कार्य कर रहा है। संस्थान में बुधवार को शैक्षणिक परिषद की 69वीं बैठक हुई, जिसमें कई फैसले हुए। इसमें मुख्य रूप से हैदराबाद और बेंगलुरू के बाद हिसार को भी एजूकेशन हब बनाने का निर्णय लिया गया। केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान और राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान का हिसार में सहयोग लिया जाएगा। छात्र पढ़ाई वहां करेंगे और डिग्री आईवीआरआई सम विश्वविद्यालय की ओर से मिलेगी।

बढ़ाई गईं सीट्स
बैठक में संस्थान निदेशक डॉ। त्रिवेणी दत्त ने कहा कि शैक्षणिक परिषद की बैठक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है, जहां हम अपनी भविष्य की योजनाएं बनाते हैं और पूर्व में चल रही योजनाओं की समीक्षा करते हैं। संस्थान के सम-विश्वविद्यालय ने नई शिक्षा नीति लागू की है। भारत सरकार की अपेक्षाओं के अनुरूप अमृतकाल का यह समय बहुत महत्वपूर्ण है। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में विश्वविद्यालयों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। सम-विश्वविद्यालय में वर्ष 2023-24 में 368 स्टूडेंट्स ने प्रवेश लिया।

14 स्टूडेंट्स ने लिया प्रवेश
बीवीएससी एंड एएच की सीटों को बढ़ाया है, इसके अतिरिक्त मानव संसाधन विकास, कौशल निर्माण के तहत 1061 प्रशिक्षणार्थियों को विभिन्न वोकेशनल कोर्स व सार्टिफिकेट तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षित किया है। संस्थान में छात्रों के लिए स्मार्ट क्लास रूम बनाए हैं। डीम्ड यूनिवर्सिटी को मेगा या वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विश्वविद्यालय में बदलने के लिए योजना पर काम हो रहा है। औद्योगिक घरानों के साथ अनुबंध किए जा रहे हैं ताकि छात्रों को उद्योगों के साथ काम करने का अवसर प्राप्त हो सके।

यह है प्राथमिकता
संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डॉ। एसके मेंदीरत्ता ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 तथा यूजीसी के दिशा निर्देशों को लागू करना संस्थान की प्राथमिकता है। दो एकेडमिक हब संस्थान के बंगलूरू तथा हैदराबाद में एमवीएससी के 31 तथा पीएचडी के 14 छात्रों ने प्रवेश लिया है इसके अतिरिक्त एमबीए इन एग्रीकल्चर बिजनेस मैनेजमेंट, एमएससी इन एग्रीकल्चर इकोनोमिक्स तथा एग्रीकल्चर स्टेटिक्स के कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।

ये रहे प्रजेंट
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व सहायक महानिदेशक डॉ। ओपी ढांडा तथा गोङ्क्षवद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ। अमरीश कुमार, कामधेनु विश्वविद्यालय दुर्ग (छत्तीसगढ़) के वीसी डॉ। आरआरवी ङ्क्षसह, दुवाशु मथुरा के पूर्व डीन डॉ। पीके शुक्ला, केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ। अशोक कुमार तिवारी ने अपने विचार रखे। संचालन परीक्षा नियंत्रक डॉ। ज्ञानेंद्र ङ्क्षसह ने किया। सम-विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पीके जैन ने धन्यवाद दिया। संयुक्त निदेशक शोध, डॉ। एसके ङ्क्षसह, संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ। रूपसी तिवारी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी सुबोध नीरज और अन्य विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।