बरेली (ब्यूरो)। कुछ डिकेड्स पहले तक टेलीफोन पर बात करना हम सबके लिए कितना आनंददायक होता था, इसे गुजरे जमाने के फिल्मी गीत को सुनकर जाना जा सकता है। 1949 में रिलीज हुई पतंगा फिल्म का गीत &मेरे पिया गए रंगून, वहां से किया है टेलीफून, तुम्हारी याद सताती है&य आज भी सुनाई देता है तो मन झंकृत हो उठता है। उस समय किसी का फोन अगर आता था तो पूरे घर के लिए जाने कौन सी खुशी मिल जाया करती थी। लैंडलाइन पर बात एक व्यक्ति कर रहा होता था, परिवार के बाकी लोग उसे घेर कर बैठ जाया करते थे। उस दौरान बीच-बीच में वे अपनी बात भी कॉल करने वाले तक जोर-जोर से बोल कर पहुंचाते रहते थे।

गंवा रहा अस्तित्व
लगभग 30 बरस पहले तक घर में लैंडलाइन फोन का होना स्टेटस सिंबल हुआ करता था। उस समय यह सबके घर में नहीं हुआ करता था। स्पेशली मध्यमवर्गीय बस्तियों में जिसके घर में टेलीफोन होता था, उसका रुतबा भी अलग ही होता था। लोग उस पड़ोसी का फोन नंबर पीपी के रूप में अपने विजिटिंग कार्ड तक पर छपवाया करते थे। आज दूरसंचार व्यवस्था में बहुत परिवर्तन आ गया है। आज फोन हर आदमी की बड़ी जरूरत बन गया है, लेकिन मॉडर्नाइजेशन के इस दौर में वह लैंडलाइन फोन अपना अस्तित्व लगभग गंवा ही बैठा है।

घट रहे कंज्यूमर्स
टेली कम्यूनिकेशन में एक छत्र राज करने वाली सरकारी कंपनी बीएसएनएल का दायरा अब कितना सिमट गया है, यह जिले में इसके उपभोक्ताओं की संख्या से साफ हो जाता है। सबसे बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्क स्ट्रेंथ होने के बाद भी बीएसएनएल के लैंड लाइन उपभोक्ताओं की संख्या लाखों से घटकर आज सैकड़ों में आ गई है। इसी तरह जिले में इस कंपनी के मोबाइल यूजर्स की संख्या भी ढाई लाख से कम है। इसके बाद भी बीएसएनएल ऑप्टीकल फाइबर केबल बिछाकर हर गांव को इंटरनेट से जोडऩे की कवायद में जुटा है। कंपनी ने अब अपने नेटवर्क को फोर जी में अपग्रेड कर दिया है।

अपग्रेड हुआ नेटवर्क
जिले में बीएसएनल के 305 टॉवर्स हैं। इनमें से 77 को बीएसएनल ने फोर जी का बीटीएस लगाकर अपडेट कर दिया है। इससे मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए बेहतर नेटवर्क मिल सकेगा। अफसरों का कहना है कि बीएसएनल सिस्टम लगातार अपडेट हो रहा है। जितने टॉवर अभी बचे हैं उन पर भी फोरजी बीटीएस लगाने का काम चल रहा है। जल्द ही इसके पूरा कर लिया जाएगा। बीएसएनएल ने अब इंटरटनेट में क्रांति लाने के लिए जिले के 15 ब्लॉक में से नौ ब्लॉक में ऑप्टीकल फाइबर केबल को बिछा दिया है। इससे इंटरनेट की स्पीड बेहतर होगी। इसके साथ ही गांव में भी डिजिटल क्रांति आएगी।

लगा करती थी लाइन
जिले भर में बीएसएनएल के 2,37805 मोबाइल प्रीपेड उपभोक्ता है, जबकि पोस्टपेड के मात्र 2145 हैं। इसी तरह लैंड लाइन के 2041, ब्रॉडबैंड के 422, फाइबर ऑप्टीकल केबल से 549 और लीज सर्किट के 549 कनेक्शनधारक हैं। बीएसएनएल के रिटायर्ड कर्मचारी आरपी सिंह का कहना है कि दो दशक पहले ही देखा जाए तो लोगों को रुझान बीएसएनएल की तरफ अधिक था। कनेक्शन धारक इतने हुआ करते थे कि दिन भर में सैकड़ों कनेक्शनधारक अपना बिल जमा करने के लिए काउंटर पर लाइन लगाते थे, लेकिन अब तो कनेक्शनधारक लगातार कम होते गए। पेमेंट जमा करने का अप्शन भी ऑनलाइन हो गया इससे बिल काउंटर भी सूना सा होता चला गया। पहले बीएसएनएल कनेक्शन लेने के लिए भी लोगों को इंतजार करना पड़ता था। सिम खरीदने के लिए या मोबाइल सिम लेकर ओपन होने का भी इंतजार किया जाता था, लेकिन आज प्राइवेट नेटवर्क इस सेक्टर में जैसे ही आए बीएसएनल का क्रेज लोगों में कम होता गया। कनेक्शन धारकों की संख्या भी अधिक थी लेकिन अब कंज्यूमर्स की संख्या घटती चली गई।


कंज्यूमर्स को बेहतर सुविधाएं मिलें, इसके लिए बीएसएनएल सिस्टम को लगातार अपग्रेड कर रहा है। जिले के नौ ब्लॉक्स में ऑप्टीकल फाइबर केबल बिछाने का काम पूरा हो गया है। छह ब्लॉक्स जो बचे हैं, वहां भी फाइबर केबल को बिछाया जाना है।
-पंकज पोरवाल, महा प्रबंधक, बीएसएनएल पश्चिमी उत्तर प्रदेश बरेली