बरेली (ब्यूरो)। व्हीकल लाइसेंस बनवाने में यूथ फस्र्ट टाइम में ही फेल हो रहे हैं। ऑनलाइन टेस्ट में एक से दो बार फेल होने के बाद किसी तरह लर्निंग लाइसेंस बन पा रहे हैं। दिक्कत यहां पर ही खत्म नहीं हो रही है। बहुत से लाइसेंस बनवाने वाले, ट्रैक पर भी फेल हो रहे हैं। स्थिति यह है कि एक, दो नहीं बल्कि तीन से चार और पांच बार तक फेल होने के बाद वे किसी तरह पास हो पा रहे हैं। बीते 4 महीने में करीब 3 हजार आवेदन करने वाले यूथ ट्रैक पर ही फेल हो गए। इनमें लाइट मोटर व्हीकल और टू व्हीलर के लाइसेंस लेने वाले शामिल हैं।

दलालों से छुटकारा
पहले ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए लोग दलालों के चक्कर में पड़ जाते थे और उन्हें आरटीओ ऑफिस के कई चक्कर काटना पड़ते थे। इसके अलावा निर्धारित सरकारी फीस से ज्यादा पैसे भी लोगों को खर्च करना पड़ते थे। समय और पैसे की बर्बादी को रोकने और पारदर्शिता को लेकर ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन की गई थी। इसमें सबसे पहले आवेदन करने वाले व्यक्ति को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके साथ ही लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन टेस्ट ही हो जाता है। इनमें पास होने के बाद संबंधित व्यक्ति का टेस्ट परसाखेड़ा में ट्रैक पर कराया जाता है।

पहले टेस्ट में फेल
डीवीए आदित्य शर्मा ने बताया कि 80 से 90 लोग ऑनलाइन टेस्ट में फेल हो रहे हैं। इसके साथ ही आवेदनकर्ता ट्रैक पर भी गाड़ी चलाने में फेल हो रहे हैं। फेल होने वाले लोगों का दोबारा फीस जमा करने के बाद टेस्ट कराया जाता है। यह ही वजह है कि 2022 में एक साथ करीब 19 हजार आवेदन करने वाले एक साथ फेल हुए थे।

पकड़े जा रहे दलाल
आरआई मानवीर सिंह ने बताया ने कि कई बार उनके पास भी कंप्लेंट आ चुकी है कि लोग लाइसेंस बनवाने के नाम पर आवेदन करने वालों को ठग रहे हैं। उन्होंने खुद कई लोगों को पकड़ा और पुलिस के हवाले किया। उसके बाद आवेदन करने वाले ने एफआईआर करने से मना कर दिया। इस वजह से पुलिस भी कोई कार्यवाही नहीं कर पाई।

कैफे वालों की मौज
बता दें कि लाइसेंस प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद भी लोग खुद से लाइसेंस के लिए अप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। लाइसेंस अप्लाई करने के लिए वे कैफे पर जा रहे हैं। फस्र्ट टाइम अप्लाई करने पर सरकारी फीस 350 रुपए है, जबकि इस टेस्ट के लिए ही कैफे के जरिए अप्लाई करने पर 800 से 1000 रुपए तक फीस ली जा रही है। फेल होने के बाद री टेस्टिंग की फीस के तौर पर मात्र 50 रुपए सरकारी फीस जमा होती है। इसके बावजूद कैफे वाले इसका चार्ज 400 रुपए तक लेते हैं।


फस्र्ट टाइम लाइसेंस अप्लाई करने वाले ज्यादातर लोग फेल हो रहे हैं। निराशा के चलते लोग दलाल और जालसाजी करने वालों के शिकार भी हो रहे हैं। किसी भी तरह की धांधलेबाजी नहीं की जा सकती है। दलाल सिर्फ ठगी कर रहे हैं। लोगों को कैफे पर भी जाने से बचना चाहिए। वह खुद ही अप्लाई कर टेस्ट दे सकते हैं।
-मनवीर सिंह, आरआई, आरटीओ