-इज्जतनगर से शाहदाना तक पड़ी है रेलवे की ब्रिटिश कालीन जमीन

-वेडनसडे को शुरू हुआ अतिक्रमण हटाना तो पहुंचने लगे सत्ताधारी नेता

3-मकान में बने पक्के निर्माण तोड़े

20-मकान कच्चे तोड़े गए

4-जेसीबी लेकर पहुंचे थे अफसर

बरेली:

इज्जतनगर से शाहदाना तक बंद पड़ी रेलवे लाइन के आसपास रेलवे की जमीन पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए दूसरे दिन वेडनसडे को जैसे ही रेलवे की टीम पहुंची तो लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। बीजेपी महानगर अध्यक्ष डॉ। केएम अरोरा भी अतिक्रमण रुकवाने के लिए पहुंच गए। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण तोड़ा गया तो वह जेसीबी के आगे लेट जाएंगे। हालांकि बाद में अफसरों ने कोर्ट का आदेश बताया तो फिर अतिक्रमणकारियोंको अतिक्रमण तोड़ने के लिए समय देने की बात कहते हुए चले गए।

नहीं मिल पाई फोर्स

ईट पजाया के पास से अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ अभियान 5 जनवरी को शुरू हुआ था। पहले दिन रेलवे के अफसरों ने पहले एक फिर दूसरी जेसीबी बुलाकर अतिक्रमण तोड़वाना शुरू किया हालांकि विरोध पहले दिन भी हुआ लेकिन लोग पुलिस फोर्स देखकर विरोध नहीं कर सके। वेडनसडे को सुबह रेलवे के अफसर आरपीएफ के साथ चार जेसीबी लेकर पहुंच तो गए लेकिन मजिस्ट्रेट और फोर्स नहीं मिलने के कारण अतिक्रमण के खिलाफ अभियान सुचारू रूप से चल नहीं सका। आरपीएफ और रेलवे अफसरों ने अभियान शुरू कराया लेकिन कुछ ही समय में अतिक्रमणकारियों ने एकजुट होकर विरोध कर दिया, जिसके चलते रेलवे के अफसर कुछ ढीले पड़ गए तो लोगों ने खुद ही अतिक्रमण तोड़ने की बात भी कही।

8 जनवरी तक चलेगा अभियान

रेलवे के अफसरों की मानें तो 5-8 जनवरी तक रेलवे अपनी खाली पड़ी जमीन को अतिक्रमण मुक्त करा रहा है। इसके लिए कोर्ट ने रेलवे डीआरएम को आदेश दिया है। इसी के चलते रेलवे ने जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान शुरू किया है। लेकिन वेडनसडे को जहां रेलवे के अफसर चार जेसीबी लेकर तेजी से अभियान को गति देने के लिए पहुंचे तो वह सब पूरी तैयारी विरोध और राजनीति को देखते हुए ढीली पड़ गई। वहीं फोर्स नहीं मिलने का भी बहाना रेलवे अफसरों को मिल गया।

रुपए लेने का भी लगा आरोप

लवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान मॉडल टाउन के जिन लोगों के घर आ रहे थे उन्होंने आरएलडी के अफसरों से भी फोन पर बात की। अतिक्रमण कर घर बनाने वालों का कहना था कि रेलवे लैंड का कॉमर्शियल यूज करने वालों से तो मंथली इनकम वसूल रहा है इसीलिए उनका अतिक्रमण नहीं हटाया गया है और जो लोग घर बनाकर रेलवे की जमीन पर रहने लगे उनका अतिक्रमण बीच से हटाया जा रहा है। जबकि अतिक्रमण एक तरफ से हटाया जाना चाहिए। इसको लेकर मौके पर मौजूद लोगों ने रेलवे के अफसरों पर कॉमर्शियल यूज करने वालों से मंथली वसूली का भी आरोपी लगाया, हालांकि रेलवे अफसरों ने इसे नकार दिया।

10 परसेंट ज्यादा कीमत देने को तैयार

जैसे ही अतिक्रमण तोड़ते हुए जेसीबी मॉडल टाउन कॉलोनी के रेंज में पहुंची तो कॉलोनी के लोग विरोध में आ गए। लोगों का कहना था कि रेलवे हमसे जमीन खाली कराने के बाद किसी निजी बिल्डर को बेचने का प्लान कर रहा है लेकिन हम अपने घर के आगे की जगह निजी बिल्डर से 10 परसेंट अधिक रेट देकर खरीदने को तैयार हैं। रेलवे ने अगर किसी निजी बिल्डर को हमारे घर के आगे की जमीन दी तो हम लोग बर्दास्त नहीं करेंगे बल्कि खुलकर विरोध करेंगे।

अब मांग रहे समय

रेलवे की जमीन पर पहले दिन पहुंची दो जेसीबी ने 13 पक्के मकान तोड़े और 11 कच्चे मकान तोड़ दिए। जबकि वेडनसडे को दूसरे दिन पहुंची चार जेसीबी मात्र 3 पक्के और 20 कच्चे मकान ही तोड़ सकी। रेलवे अफसरों का कहना था कि इन सभी अतिक्रमणकारियों को अक्टूबर माह में नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने के लिए अवगत कराया गया था लेकिन इसके बाद भी अतिक्रमण खुद नहीं हटाया और जब रेलवे कार्रवाई करने के लिए पहुंचा तो बोल रहे हैं कि अतिक्रमण हटाने के लिए समय दिया जाए वह खुद ही अतिक्रमण हटा लेंगे।

खत्म हो जाएंगे पूरे-पूरे मकान

रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण का नाप कर जब अफसरों ने मकान पर मार्क लगाए तो किसी के मकान में 10 फिट तो किसी के मकान में 20 फिट रेलवे के जमीन निकल रही थी। यानि इस तरह तो मॉडल टाउन कालोनी में कई मकान तो पूरी तरह से रेलवे की जमीन पर बने हुए निकले। ऐसे मकान मालिक रेलवे अफसरों से मकान न तोड़ने के लिए जुगत लगाते रहे हालांकि रेलवे अफसरों ने अतिक्रमण तोड़ने की ही बात कही।

रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण तोड़ने के लिए वेडनसडे को चार जेसीबी गई थी। रेलवे के अफसर और आरपीएफ भी मौजूद थी, लेकिन पुलिस और मजिस्ट्रेट के न मिल पाने के चलते अतिक्रमण अभियान सुचारू रूप से नहीं चल सका। अतिक्रमण अभियान 8 जनवरी तक चलेगा।

राजेन्द्र सिंह, एनईआर पीआरओ इज्जतनगर