बरेली (ब्यूरो)। गर्मी में अगर आप स्वीमिंग पूल जाने का प्लान बना रहे हैं तो सावधानी बरतें। क्योंकि शहर के आसपास एरिया में अवैध स्वीमिंग पूल्स की भरमार सी हो गई है। खेतों, हाइवे किनारे और प्लॉटस में बनाए गए इन स्वीमिंग पूल्स में लाइफ सेवर की भी कोई सुरक्षा नहीं है। न ही इनके कोई मानक रखे हैं। मनमाने ढंग से बनाए गए इन स्वीमिंग पूल में नहाने जाने से हर वर्ष कई दुर्घटनाएं भी हो जाती हंै। इसके बाद प्रशासन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति कर अपना पल्ला झाड़ लेता है। यह ही कारण है कि शहर के आउटर एरिया से तहसील तक इस तरह के स्वीमिंग पूल का कारोबार खूब फल-फूल रहा है। ये जोखिम के पूल आम लोगों की जान पर भारी पड़ रहे हैं। अवैध स्वीमिंग पूल मामले में डीएम से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन नहीं उठ सका।

ये हैं स्वीमिंग पूल के नियम
स्वीमिंग पूल पर कोच व लाइफ गार्ड होना आवश्यक
ऑक्सीजन सिलिंडर का होना आवश्यक
इन-आउट रजिस्टर में पूरा रिकॉर्ड हो
जीवन रक्षक उपकरण हों
आग बुझाने वाले उपकरण हों
स्वीमिंग के दौरान वर्जित क्षेत्र में न जाएं
अप्रशिक्षित तैराक पूल में डाइव न लगाएं
30 एमएम की रस्सी होनी चाहिए्र

30 से 50 रुपए प्रति घंटा
जिले में अवैध रूप से चल रहे स्वीमिंग पूल नियम ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं। शहर के आउटर एरिया में 40 से अधिक स्वीमिंग पूल हैं, जिनका सरकारी विभाग के पास कोई लेखा-जोखा नहीं है। ये स्वीमिंग पूल एक व्यक्ति से 30-50 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से चार्ज लेते हैं। लोगों की जान से खिलवाड़ करते हैं। इन अवैध पूल में विशेष प्रशिक्षक होता है न ही लाइफ सेवर है। इसके बाद भी लोग अंजाने में जोखिम में जान डालने के लिए भी वहां पहुंच जाते हैं।

इन एरिया में हैं संचालित
-इज्जतनगर एरिया
-भोजीपुरा
-रामपुर रोड
-मिनी बाईपास
-बदायूं रोड
-बुखारा रोड
-बीसलपुर रोड
-नरियावल
-ठिरिया
-बड़ा बाईपास
-रिठौरा
-नवाबगंज
-हाफिजगंज
-फरीदपुर
-आंवला

मोटी कमाई का खेल
जिले में ऐसे कई अवैध स्वीमिंग पूल हैं, जो सुरक्षा मानकों को ताक पर रख कर लोगों की जान से खिलवाड़ कर मोटी कमाई कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि स्वीमिंगपूल के लिए आवश्यक प्रशिक्षक तथा फिलट्रेशन प्लांट तक नहीं लगाया है। जिन लोगों ने स्वीमिंग पूल को कमाई का जरिया बनाया है उन्होंने किसी तरह के सुरक्षा तक के इंतजाम नहीं किए हैं। इनमें से पूल संचालकों ने जिला प्रशासन से अनुमति नहीं ली है। जबकि स्वीमिंग पूल में रोजाना लाखों क्यूसेक लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। जिला प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

मानक के अनुरूप नहीं
एक्सपर्ट की माने तो स्वीमिंग पूल निर्माण करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों समेत अन्य विभागों की अनुमति लेनी आवश्यक होती है। गाइडलाइन के अनुसार ओलंपिक स्वीमिंग पूल की चौड़ाई 25 तो लंबाई 50 फीट होती है, जबकि सब स्टैंर्ड स्वीमिंग पूल की 12.5 फीट चौड़ाई और 25 फीट लंबाई होनी चाहिए। नियमों को दरकिनार कर कुछ लोगों ने सिर्फ कमाई के लिए लोगों को गर्मी से निजात दिलाने के नाम पर नहाने के लिए स्वीमिंग पूल का निर्माण कराया है। इनकी गहराई और लंबाई भी मानकों के अनुरूप नहंी है।

लास्ट ईयर हुई थीं पांच मौतें
अवैध रूप से जिले भर के अलग-अलग एरिया में संचालित स्वीमिंग पूल में डूबने से छह बच्चों की मौत हो गई थी। इनमें से दो बच्चों की हाफिजगंज और तीन बच्चों की आंवला साइड के स्वीमिंग पूल में डूबने से मौत हुई। हालांकि उस टाइम तो प्रशासन ने एक्शन लेते हुए अवैध स्वीमिंग पूल के खिलाफ कार्रवाई की लेकिन अब फिर से अवैध स्वीमिंग पूल संचालित होने लगे हैं। इन पर प्रशासन का कोई एक्शन नहीं होना इनको बढ़ावा मिल रहा है।