- जिले में बदमाशों के पास से ज्यादा बरामद हो रहा तमंचा

- अवैध फैक्ट्री पकड़े जाने पर भी सामने आ चुका है मामला

जिले के जरायम पेशे में पिस्टल की महंगाई बदमाशों पर भारी पड़ने लगी है। क्राइम की पाठशाला के नौसीखियों से लेकर पुराने शातिर तक तमंचे का इस्तेमाल कर रहे हैं। बदमाशों को पिस्टल के बाद सबसे ज्यादा भरोसा 315 बोर के तमंचे पर है। यह दावा हम नहीं कर रहे, बल्कि पुलिस कार्रवाई में बरामद असलहों का रिकार्ड खंगालने पर सामने आया है। ज्यादातर पुलिस कार्रवाई में पकड़े गए शातिरों के पास से 315 बोर के तमंचों की बरामदगी सामने आई है। जुलाई में एक हफ्ते के पुलिस ने 10 से अधिक अपराधियों के पास से तमंचों की बरामदगी की। इनमें छह मामलों में पुलिस ने सात 315 बोर के तमंचे, दो अन्य केसेज में 312 बोर के असलहों की बरामदगी की। पुलिस से जुड़े लोगों का कहना है कि बदमाश अपनी सुविधा के अनुसार तमंचे का इस्तेमाल करते हैं। उनको पिस्टल से ज्यादा से ऐतबार तमंचों पर होता है।

जुलाई तक बरामद हुए 133 अवैध असलहे

जिले की पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। जनवरी से लेकर 15 जुलाई के बीच पुलिस ने गिरफ्तार बदमाशों के पास से 133 अवैध असलहे बरामद किए। इनमें सर्वाधिक बरामदगी 315 बोर के तमंचों की है। पुलिस से जुड़े लोगों का कहना है कि इनमें करीब 90 असलहे 315 बोर के हैं। जबकि, अन्य में पिस्टल और 312 बोर के तमंचे शामिल हैं। हालांकि अवैध असलहों को पुलिस तमंचे की कैटेगरी में शामिल करती है। इसलिए बरामद असलहे पुलिस के लिए ज्यादा सिरदर्द नहीं होते।

हर फैक्ट्री में 315 बोर के स्पेशल आर्डर

22 जून को गोला एरिया के मठिया में अवैध तमंचा फैक्ट्री पकड़ी गई। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 315 बोर का तीन तमंचा, तमंचा बनाने का सामान सहित और एक कारतूस बरामद किया। पकड़े पतिराम ने पुलिस को बताया था कि उसने एक हजार रुपए मेकिंग चार्ज मिलता था। जबकि, तीन से चार हजार रुपए में तमंचा आसानी से बिक जाता था। लॉकडाउन में होम डिलीवरी देने के लिए तमंचा फैक्ट्री चलाई जा रही थी। इसके पहले 15 मार्च को गगहा एरिया के चेड़वा तमंचा फैक्ट्री पकड़ी गई थी। इस फैक्ट्री में पुलिस ने 315 बोर का चार तमंचा बरामद किया। 70 साल का वैद्यनाथ तमंचा बनाने के कारोबार में अरेस्ट किया गया। तब पुलिस की पूछताछ में कारोबारियों ने बताया था कि हर बार 315 बोर के तमंचे का आर्डर ज्यादा मिलता है। पुलिस रिकार्ड में हरदम 312 बोर, 315 बोर, नाइन एमएम, 32 बोर जैसे शब्दों का इस्तेमाल होता है। जानकारों का कहना है कि इसे बोर का मतलब बंदूक की नली के भीतर व्यास होता है। उस नली में उतने ही व्यास की गोली का इस्तेमाल होता है।

इसलिए रास आता 315 बोर का तमंचा

फैक्ट्री में इसे बनाने में आसानी होती है।

आडज्र देने पर आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

आवश्यकतानुसार नाल की साइज होने से रखने में आसानी

तीन से पांच हजार रुपए की कीमत में अवैध असलहा मिलता है

कमर में खोसकर चलने में असुविधा नहीं होती। पिस्टल महंगा पड़ता है

312 बोर के तमंचे की नाल मोटी होती है। वह दिखने में सुंदर नहीं लगता

315 बोर का तमंचा दिखने में सुंदर लगता है। इसे रखने में आसानी होती है

नौसीखिए बदमाशों को यह तमंचा आसानी से मिल जाता है।

315 बोर के तमंचों के कारतूस काफी आसानी से मिल जाते हैं।

अवैध असलहा बरामदगी

वर्ष असलहा

2020 133

2019 111

2018 154

2017 113

2016 85

हाल में बरामद हुए 315 बोर के तमंचे

26 जुलाई 2020: बांसगांव एरिया में इनामी बदमाश अभय मौर्या से पुलिस की मुठभेड़ हुई। पुलिस ने उसके पास से 315 बोर का तमंचा और कारतूस बरामद किया।

23 जुलाई 2020: बांसगांव एरिया में पुलिस ने दो बदमाशों को पकड़ा। उनके पास से 315 बोर का एक तमंचा बरामद हुआ।

22 जुलाई 2020: गुलरिहा पुलिस ने शराब की दुकान में लूट करने वाले चार बदमाशों को अरेस्ट किया। उनके पास से 315 बोर का तमंचा बरामद हुआ।

22 जुलाई 2020: कैंट पुलिस ने थाना के टॉप 10 बदमाश को अरेस्ट किया। उसके पास से 315 बोर का तमंचा बरामद हुआ।

19 जुलाई 2020: बांसगांव पुलिस ने शातिर मोबाइल चोर को अरेस्ट किया। उसके पास से चोरी के तीन मोबाइल फोन और 315 बोर का तमंचा बरामद किया।

18 जुलाई 2020: गुलरिहा पुलिस ने? शिवपुर साहबाजगंज में 15 हजार के इनामी योगेश चौधरी को अरेस्ट किया। उसके पास से 315 बोर का तमंचा बरामद हुआ।

जिले में अपराधियों के खिलाफ पुलिस का अभियान जारी है। गिरफ्तार बदमाशों के पास से बरामद असलहों की लिखा-पढ़ी की जाती है। तमंचा बनाने की फैक्ट्रियां भी पकड़ी जा चुकी है। इसके कारोबार से जुड़े लोगों की तलाश में पुलिस लगी है। पकड़े गए बदमाशों से पूछताछ के आधार पर कार्रवाई होती है।

डॉ। सुनील गुप्ता, एसएसपी