- दायरे अदब की ओर से अलीनगर में ऑर्गनाइज हुई नातिया महफिल

<- दायरे अदब की ओर से अलीनगर में ऑर्गनाइज हुई नातिया महफिल

GORAKHPUR: GORAKHPUR: 'मुसीबत की घड़ी मे जब कोई हमदम न था मेरा, मोहम्मद मुस्तफा का नाम लब पर बार-बार आया। कमालुद्दीन कमाल ने जब यह नातिया शेर पढ़ा, तो लोगों को खूब दाद दी। मौका था, जश्ने विलादत पैगंबर-ए-आजम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के सिलसिले में दायर-ए-अदब संस्था की ओर से नातिया महफिल का। जिसमें शोअरा इकराम ने मोहम्मद साहब की तरीफ में नातिया कलाम पेश किए। अलीनगर उत्तरी में हुई इस महफिल का आगाज कुरआन-ए-पाक की तिलावत से अहमद मुनीब मारूफी ने किया।

मुस्तफा के आने से जिंदगी महकती है

कौसर गोरखपुरी ने नातिया शेर 'काश इक बार मदीने का सफर हो जाए, मेरे सरकार इनायत की नजर हो जाए' पढ़कर दाद पायी। महमूदुल हक ने पढ़ा 'वो जन्नती बनके ही उठेगा कुरआनों सुन्नत पे जो चलेगा, खुदा की रहमत भी उस पे होगी हलाल लुक्मे से जो पलेगा। अब्दुल्लाह जामी ने 'हर चमन महकता है, हर गली महकती है, मुस्तफा के आने से जिंदगी महकती है। वसीम मजहर ने पढ़ा 'जो ईमां की महक रखता है अपने दिल की धड़कन मे, नवाजेंगे रसूलल्लाह उसको जामे कौसर से। जलाल सामानी ने पढ़ा 'आज यौमे विलादत है सरकार का, जो तुम्हें चाहे बाखुदा मांग लो। मो। अनवर ज़्या, शाकिर अली शाकिर, आसिम गोंडवी आदि ने भी नातिया शेर पेश किए। अध्यक्षता जालिब नोमानी व संचालन हाफिज नासिरुद्दीन ने किया। महफिल में ईशा रूहउल्लाह, इस्माईल जबीउल्लाह, यूसुफ मतीउल्लाह, फैजुल्लाह, मो। अजीजुल्लाह आदि मौजूद रहे।