- नमाजों के साथ कुरआन-ए-पाक की तिलावत का सिलसिला जारी

- रोजेदार के लिए मछलियां भी करती हैं दुआएं

GORAKHPUR: मुकद्दस रमजान का 23वां रोजा अल्लाह के बंदों ने सब्र व शुक्र के साथ गुजारा। बड़े तो बड़े बच्चे भी रोजा रखकर इबादत में मसरूफ हैं। इबादत का दौर जारी है। नमाजों के साथ कुरआन-ए-पाक की तिलावत हो रही है। दरुदो-सलाम पढ़ा जा रहा है। शाम को दस्तरख्वान पर तमाम तरह की खाने रोजेदारों का इस्तकबाल करते नजर आ रहे हैं। हदीस शरीफ के मुताबिक रोजेदार के लिए दरिया की मछलियां भी दुआ करती हैं। सहरी व इफ्तारी के वक्त नूरानी समां चारों तरफ नजर आ रहा है। रोजेदारों के चेहरे पर तकवा व परेहजगारी का नूर चमक रहा है। कोरोना महामारी से हिफाजत की दुआ मांगी जा रही है। मोहम्मद हम्जा, मोहम्मद अमान अत्तारी, मोहम्मद नेहाल, शमशीर आलम, अमीनुद्दीन आजाद, सैयद हुसैन अहमद, शादाब अहमद, हाफिज आरिफ, मोहम्मद जलालुद्दीन, शम्से आलम एतिकाफ में मशगूल हैं। तरावीह की नमाज जारी है।

इंसानी दर्द पहचानने की सीख

हाफिज आमिर हुसैन निजामी ने बताया कि जिस तरह अंग्रेजी महीने जनवरी, फरवरी आदि होते हैं, उसी तरह मुर्हरम, सफर, रबीउल अव्वल, रबीउल आखिर, जमादिल अव्वल, जमादिल आखिर, रजब, शाबान, रमजान, शव्वाल, जिलकादा, जिलहिज्जा के रूप में बारह इस्लामी महीने होते हैं। मुकद्दस रमजान के रोजे में अल्लाह का खौफ, उसकी वफादारी, मोहब्बत तथा सब्र का जज्बा हमें इंसानियत और इंसानी दर्द को पहचानने की सीख देता है। अल्लाह के पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया, जो शख्स झूठ और गुनाह के काम न छोड़े, अल्लाह तआला को कोई जरूरत नहीं कि वह अपना खाना-पीना छोड़े।

रमजान में नाजिल हुआ कुरआन

रोजे का सामाजिक महत्व भी है। यह समाज के खुशहाल तबके के लोगों को गरीबों की परेशानी का अनुभव कराता है। रमजान के महीने में कसरत से नफ्ल नमाज पढ़ना, कुरआन-ए-पाक की तिलावत करना, अल्लाह की हम्दो सना बयान करना, दरूदो-सलाम पढ़ने में मशगूल रहना, फिर दिनभर रोजा रखने के बाद रोजा इफ्तार करना, रोजेदार की नफ्स परस्ती वाली शख्सियत को मिटाकर उसमें इंसानियत को भर देती है। हाफिज मो। आरिफ रजा ने कहा कि कुरआन-ए-पाक जिस महीने में नाजिल हुआ, वह रमजान का महीना था। यही वह पाक किताब है, जिसे कयामत तक अल्लाह की हिफाजत हासिल है, जो इंसानों को अपनी मंजिल जन्नत तक पहुंचने का रास्ता दिखाती है।

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ऑनलाइन नातिया मुशायरा हुआ

पहली जंगे आजादी के अजीम मर्दे मुजाहिद हजरत मौलाना सैयद किफायत अली काफी मुरादाबादी अलैहिर्रहमां के उर्स-ए-पाक पर गुरुवार को तंजीम कारवाने अहले सुन्नत के नूरी नेटवर्क की ओर से ऑनलाइन नातिया मुशायरा हुआ। जिसमें हाफिज अजीम अहमद नूरी, युवा शायर वसीम मजहर, मो। अशरफ कादरी, मो। आतिफ रजा, अजमल रजा ने नातो मनकबत का नजराना पेश किया।