- चौराहों को जाम मुक्त बनाने को डेढ़ साल पहले बनी थी येलो लाइन

- येलो लाइन मिटने के बाद चौराहों में बढ़ता चला गया इंक्रोचमेंट

<- चौराहों को जाम मुक्त बनाने को डेढ़ साल पहले बनी थी येलो लाइन

- येलो लाइन मिटने के बाद चौराहों में बढ़ता चला गया इंक्रोचमेंट

KANPURkanpur@inext.co.in

KANPUR। सिटी के अधिकतर चौराहों पर लगने वाले जाम व इंक्रोचमेंट को खत्म करने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने कई प्रयास किए। जो स्थानीय पुलिस की वजह से फेल हो गए। ट्रैफिक सुधार में खर्च हुए करोड़ों रुपए के बाद हालात जस के तस है। लगभग डेढ़ साल पहले तत्कालीन डीआईजी प्रेम प्रकाश ने कानपुर के ट्रैफिक सिस्टम को सुधारने के लिए सिटी के सभी व्यस्ततम चौराहों के म्0 मीटर दूर पेंट से यलो लाइन बनवाई थी। जिसके अंदर ही व्हीकल को खड़ा करना बना था। कुछ दिन यह नियम फॉलो हुआ। डीआईजी के यहां से जाते फिर से चौराहों पर इंक्रोचमेंट हो गया।

थानेदारों की जवाबदेही थी

चौराहों व सड़कों की फुटपाथ में लगने वाले अतिक्रमण स्थानीय थाने के सपोर्ट से ही होते हैं। यह बात उस समय ही साफ हो गई थी। जब तत्कालीन डीआईजी प्रेम प्रकाश ने सभी चौराहों के म्0 मीटर की दूरी में यलो लाइन खिंचवाई थी। साथ ही उन्होंने यलो लाइन के अंदर एंक्रोचमेंट होने व व्हीकल खड़ा कर पैसेंजर बैठाने पर स्थानीय थानेदार को दोषी मान कार्रवाई के लिए कहा था। जिसके बाद सभी चौराहे कुछ दिनों के लिए पूरी तरह से साफ हो गए थे।