- लैंडयूज चेंज (धारा-80) की फाइलों में 2 करोड़ रुपए से अधिक के स्टैंप में किया गया बड़ा घोटाला

-एक ही स्टैंप कई फाइलों में लगाकर धारा-80 की फाइलों को कराया पास, 150 फाइलों में हुई स्टैंप चोरी

-सितंबर-2018 से मार्च-2019 के बीच लैंडयूज की फाइलों में हुआ खेल, ठेके पर होते हैं लैंडयूज के काम

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केस-1

प्रणीत त्रिपाठी ने 2019 में बैकुंठपुर गांव में जमीन के लैंडयूज के लिए अप्लाई किया। इन्होंने 2,17,200 रुपए का चालान और इतने के ही स्टैंप जमा किए। लेकिन फाइल में सिर्फ 1 लाख 5 हजार रुपए के स्टैंप हैं।

केस-2

वीरेंद्र कुमार गुप्त ने लैंडयूज चेंज कराने के लिए 58,000 रुपए के चालान और स्टैंप लगाए। लेकिन सोर्सेज के मुताबिक फाइल में सिर्फ 30 हजार रुपए के ही स्टैंप लगे हैं। 28 हजार रुपए के स्टैंप नहीं हैं।

केस-3

रामलक्ष्मी ने धारा-80 के लिए 24,000 रुपए के स्टैंप और चालान जमा किए। लेकिन फाइल में एक भी स्टैंप नहीं लगाए गए हैं। जबकि फाइल में 24 हजार रुपए के स्टैंप लगे होने चाहिए थे।

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ravi.pal@inext.co.in

KANPUR : फर्जी शस्त्र लाइसेंस के बाद अब करोड़ों का स्टैंप घोटाला सामने आया है। ये घोटाला लैंडयूज कनवर्जन में लगने वाले स्टैम्प चोरी करके अंजाम दिया गया है। अभी तक लगभग 150 फाइलों में लैंडयूज चेंज (धारा-80) कराने के मामलों में लगभग 2 करोड़ रुपए से ज्यादा की स्टैंप चोरी की गई। एक लैंडयूज कनवर्जन की फाइल से स्टैम्प निकालकर कई जमीनों के भूप्रयोगों में इस्तेमाल किए गए हैं। बाद में चुपचाप फाइलों को रिकॉर्ड रूम में जमा कर दिया गया। कई फाइलों से स्टैंप गायब हैं कई में आधी कीमत के स्टैंप ही बचे हैं। ये फाइलें इस बड़े घोटाले की गवाही दे रही हैं।

ऐसे हुआ पूरा 'खेल'

दरअसल, इस पूरे खेल में कलेक्ट्रेट के कई कर्मचारी शामिल हैं। सितंबर-2018 से मार्च-2019 के बीच धारा-80 की फाइलों में ये खेल किया गया। पूरी जांच के बाद जब एसडीएम के सामने ये फाइलें पहुंचती हैं तो अंतिम आदेश के मुताबिक डीएम सर्किल रेट के 1 परसेंट चालान के साथ 1 परसेंट कीमत के ही स्टैंप लगाने होते हैं। फाइल पास कराने के दौरान आदेश के मुताबिक स्टैंप लगाए गए और फाइल पास होने के बाद स्टैंप निकालकर धारा-80 की दूसरी फाइलों में लगा दिए गए। एक ही स्टैंप कई फाइलों में लगाकर एसडीएम ऑफिस में तैनात कर्मचारियों ने करोड़ों रुपए बनाए और सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाया।

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रिकॉर्ड रूम तक नहीं पहुंची फाइलें

सोर्सेज के मुताबिक 2019 में तैनात तत्कालीन लिपिक के पास धारा-80 की कई फाइलें अब भी मौजूद हैं। वो ये फाइलें रिकॉर्ड रूम में जमा नहीं कर सका और अब भी उसके पास फाइलें हैं। वो इन फाइलों को रिकॉर्ड रूम में जमा कर पाता, इससे पहले ही उसका उस सीट से ट्रांसफर हो गया। इन फाइलों में भी स्टैंप चोरी के करोड़ों के राज छिपे हुए हैं। जबकि रूल्स के मुताबिक 1 से डेढ़ महीने में फाइल रिकॉर्ड रूम में जमा हो जानी चाहिए।

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'ठेके' पर होता है काम

धारा-80 की फाइलों को पास कराने का ठेका आज भी कई कर्मचारियों द्वारा लिया जाता है। सोर्सेज के मुताबिक लैंडयूज चेंज कराने वाले लोगों से स्टैंप और चालान का पूरा पैसा लिया जाता रहा। लेकिन बतौर एसडीएम सदर एक अधिकारी ने इस मामले को पकड़ा और उस कर्मचारी को पद से हटा दिया। तब से फाइल में लगने वाले हर एक स्टैंप को चेक करने के साथ ही लिखापढ़ी की जाने लगी।

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क्या है धारा-80

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता भू प्रयोग परिवर्तन एक्ट धारा-80 के तहत कृषि से आवासीय जमीन घोषित किया जाता है। इसके लिए संबंधित क्षेत्र के एसडीएम ऑफिस में अप्लाई करना पड़ता है। संबंधित तहसीलदार इसमें रिपोर्ट देते हैं। किसी की आपत्ति न होने पर डीएम सर्किल रेट का 1 परसेंट चालान और 1 परसेंट स्टैंप कोर्ट फीस के रूप में उतनी कीमत के स्टैंप फाइल में लगाकर जमा करने होते हैं, जिसके बाद एसडीएम द्वारा लैंडयूज चेंज करने के आदेश दे दिए जाते हैं।

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