कानपुर(ब्यूरो)। झारखंड के जिला गिरिडीह के गांव नीमाडीह निवासी पवन कुमार के बेटे कृष्ण कार्तिकेय को 25 अगस्त को बुखार आया था। हालत बिगडऩे पर ट्यूजडे को पवन दरभंगा से बेटे का लीवर ट्रांसप्लांट कराने तेजस एक्सप्रेस से दिल्ली ले जा रहे थे। वह वेंटीलेटर सपोर्ट पर था। प्रयागराज से ट्रेन आगे बढऩे के बाद ऑक्सीजन की समस्या होने लगी। इसके बाद सेंट्रल स्टेशन से पहले ही सिलेंडर पूरी तरह खत्म हो गया। ट्रेन में साथ चल रहे डॉक्टर्स ने पर्सनल एफर्ट से ऑक्सीजन सिलेंडर कानपुर सेंट्रल पर मंगवाया था। हालांकि, मासूम की जान नहीं बचाई जा सकी। एसीएम संतोष कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सिलेंडर ट्रेन में ले जाते समय जांच की गई थी। परिजनों ने स्वयं ही सिलेंडर की व्यवस्था अपने डॉक्टर की मदद से कराई थी। रेलवे कंट्रोल रूम को सूचना होने पर कॉमर्शियल डिपार्टमेंट की टीम ने आक्सीजन सिलेंडर की जांच भी की थी। ट्यूजडे देर रात 2:15 बजे स्टेशन पर ट्रेन पहुंचने के बाद पांच मिनट के ठहराव में ही ये प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी।