- ड्रग माफिया और हिस्ट्रीशीटर सुशील शर्मा उर्फ बच्चा के गुर्गो से पुलिस को मिलीं कई अहम जानकारियां

- तनाव दूर करने का जरिया बताकर स्टूडेंट्स को बेचते थे ड्रग्स, को¨चग मंडी के आसपास एक्टिव रहते थे गुर्गे

- 50 से 100 रुपए में छोटी पुडि़या देकर स्टूडेंट्स को नशे का लती बना रहे थे, कोडवर्ड से दिए जाते थे ऑर्डर

KANPUR (22 Aug): काकादेव कोचिंग मंडी समेत सिटी के कई इलाकों में नशे का कारोबार फल फूल रहा है। ड्रग माफिया और हिस्ट्रीशीटर सुशील शर्मा उर्फ बच्चा के गुर्गो से पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि को¨चग मंडी की दुकानों पर कोडवर्ड में मादक पदार्थों की बिक्री होने की जानकारी लिखी जाती थी। उसके नीचे दो-तीन वाट्सएप नंबर और वेबसाइट का नाम लिखा होता था। बाहरी जिलों से आकर रहने वाले छात्रों को गांजे व चरस से तनाव दूर करने का जरिया बताकर ग्राहक बनाया जाता था। शुरुआत में 50 से 100 रुपये की छोटी पुडि़या देकर उन्हें नशे का लती बनाया जा रहा था।

नंबर्स की हो रही पड़ताल

सीओ त्रिपुरारी पांडेय ने बताया कि सुशील उफच् बच्चा के गिरफ्तार साथियों के मोबाइल फोन से कई वाट्सएप नंबरों की जानकारी मिली है। गिरफ्तार ऋषभ और गोलू काकादेव में ऑनलाइन व्यापार का ¨सडिकेट चलवा रहे थे। माल की डिलीवरी के लिए किशोर और महिलाओं का सहारा लेते थे। ताकि किसी को शक न हो।

बीजेपी के नेताओं से करीबी रिश्ते

विकास दुबे की तरह ही सुशील के भी कुछ नेताओं से करीबी रिश्तों का पता लगा है। वह खुद अपनी गाडि़यों पर बीजेपी का झंडा लगाकर चलता था। तीन दिन पूर्व जब पुलिस ने उसके ठिकाने पर छापा मारा तो उससे चंद घंटे पहले ही रात करीब 10 बजे सुशील अपनी बोलेरो गाड़ी से भाई के साथ निकल गया था। उस गाड़ी में भी बीजेपी का झंडा लगा था। कानपुर से वह सीधे प्रतापगढ़ स्थित अपने गांव गया था। पुलिस के पहुंचने से पहले वह फरार हो गया था।

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खाकी की गोद में खेलता था बच्चा

पुलिस का मुखबिर बनकर सुशील उर्फ बच्चा दूसरे अपराधियों को पकड़वाता था। कानपुर के साथ आसपास के जिलों की पुलिस भी उससे मदद लेती थी। इसी वजह से तमाम थानेदारों और एसओजी प्रभारियों से उसकी नजदीकी थी। जांच में सामने आया है कि ये थानेदार आरोपी के पकड़े जाने पर पैरवी करते थे। मार्च में सीसामऊ में रेप पीडि़ता ने सुशील के खिलाफ धमकी देने व बलवे की धाराओं में मुकदमा लिखाया, तब एक इंस्पेक्टर ने उसे अपना सबसे बढि़या मुखबिर बताकर मुकदमा न लिखने के लिए दबाव बनाया था। सीओ ने बतया कि बच्चा पुलिस का गुडवर्क कराने में भी मदद करता था।

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हिस्ट्रीशीटर सुशील उर्फ बच्चा को संरक्षण देने वाले सभी लोगों के बारे में जांच की जा रही है। सुशील व उसके भाई की तलाश में तीन टीमें लगी हैं। अरेस्ट होने के बाद उससे पूरे नेटवर्क का पता लगने की उम्मीद है। मिलीभगत के आरोप में कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच चल रही है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी।

- डॉ। प्री¨तदर सिंह, एसएसपी