-हेड इंजरी के नार्मल केसेस को किया जा सकेगा मैनेज, पीपीपी मोड पर नई सीटी स्कैन मशीन लगाने को शासन ने दी मंजूरी

KANPUR: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के अलावा अब उर्सला अस्पताल में भी पेशेंट्स को हेड इंजरी का इलाज मिल सकेगा। हेड इंजरी के खतरे को पहचानने के लिए जरूरी सीटी स्कैन जांच की सुविधा दोबारा उर्सला अस्पताल में मिलेगी। शासन ने पीपीपी मोड पर उर्सला में नई सीटी स्कैन मशीन लगाने के लिए मंजूरी दे दी है। मालूम हो कि उर्सला अस्पताल में पुरानी सीटी स्कैन मशीन कंडम हो चुकी है। जिसके बाद महीनों से अस्पताल में सीटी स्कैन नहीं हो रहे हैं। सुविधा नहीं मिलने से प्राइवेट इमेजिंनिंग लैबों में लोगों को महंगी दरों पर जांच करानी पड़ रही है।

गवर्नमेंट सेक्टर की तीसरी मशीन

कानपुर में सरकारी हेल्थ सिस्टम में सीटी स्कैन मशीन से जांच की सुविधा सिर्फ कांशीराम अस्पताल में है। जबकि एलएलआर हॉस्पिटल में वेटलीज पर चल रहे एक प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर में शासन से अनुमोदित दरों पर जांच होती है। हालाकि एलएलआर में भी अब सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन की स्थापना हो रही है। वहीं उर्सला अस्पताल में नई सीटी स्कैन मशीन लगने के सरकारी सेक्टर में तीन सीटी स्कैन मशीनें लग जाएगी। जिससे लोगों को प्राइवेट से सस्ती दरों पर जांच की सुविधा मिलेगी। खास तौर से ब्रेन स्ट्रोक और हेड इंजरी वाले पेशेंट्स को फायदा मिलेगा।

16 से 64 स्लाइस की सीटी

कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी स्कैन जितनी ज्यादा स्लाइस की मशीन से हो जांच रिपोर्ट उतनी ज्यादा स्पष्ट होती है। उर्सला अस्पताल में अभी तक 16 स्लाइस की सीटी स्कैन मशीन लगी थी जोकि बीएसपी सरकार के दौरान यहां लगाई गई थी.इस मशीन से जांच में वक्त भी ज्यादा लगता था और मौजूदा दौर की सीटी स्कैन मशीनों के मुकाबले रिपोर्ट भी उतनी ज्यादा डिटेल्ड नहीं मिलती थी। मौजूदा दौर में 128 स्लाइस की सीटी स्कैन मशीनें आ गई हैं। जबकि ज्यादातर सेंटरों में 64 स्लाइस की सीटी स्कैन मशीनों से स्कैन किए जाते हैं। उर्सला में 64 स्लाइस की ही मशीन लगाई जाएगी। उर्सला अस्पताल के सीएमएस डॉ.अनिल निगम ने जानकारी दी कि काफी समय से अस्पताल में नई सीटी स्कैन मशीन लगाने के लिए शासन से मांग की जा रही थी। जिसे अब शासन ने मंजूरी दे दी है।

उर्सला में ही हो जाएगा इलाज

अभी उर्सला अस्पताल में सिर में चोट लगने वाले घायल, ब्रेन स्ट्रोक के पेशेंट्स को हैलट अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। इसकी एक बड़ी वजह सीटी स्कैन मशीन की उपलब्धता न होना भी है। हालाकि सामान्य हेड इंजरी वाले पेशेंट्स को सीटी स्कैन जांच के आधार पर उर्सला में ही बिना न्यूरोसर्जन की मदद से भी मैनेज किया जा सकता है,लेकिन जांच की सुविधा नहीं होने से रेफर करना मजबूरी बन जाता है।