कानपुर (ब्यूरो)। लंग्स की टीबी दिल को भी बीमार कर है। जरा सा चलने पर ऐसे पेशेंट की सांस फूलने लगती है। चलने में थकान महसूस होती है। कार्डियोलॉजी के डॉक्टर की रिचर्स में सामने आया है कि लंग्स में टीबी की वजह से ही ये सारी परेशानियां हो रही है। उन्होंने दो साल तक करीब 35 पेशेंट पर रिचर्स किया। इसके बाद उनका ट्रीटमेंट किया तो 26 पेशेंट पूरी तरह से स्वस्थ हो गए। बाकी में में भी सुधार देखने को मिला है। डॉक्टर का कहना है कि वो अपनी रिसर्च को अंतर्राष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशन के लिए भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
ये हो रही थी प्रॉब्लम
कार्डियोलॉजी में कई पेशेंट सांस फूलने और चलने में थकान की समस्या लेकर आ रहे थे। डॉक्टर्स ने जब उनकी ईसीजी, ईको, टीएमटी आदि जांच की तो हार्ट पंपिंग 35 परसेंट ही मिली। ऐसे में पेसमेकर या इंप्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफब्रीलिएटर लगाकर हार्ट की पंपिंग बढ़ा दिया गया। जिससे वो उस टाइम ठीक होकर घर चले गए, लेकिन कुछ समय बाद पेशेंट को फिर से वही सारी प्रॉब्लम्स होने लगीं।
कार्डियक एमआरआई जांच कराई
ऐसे में एंजियोग्राफी, एक्सरे व अल्ट्रासाउंड जांच की तो भी उन्हें समस्या का पता नहीं चला। इसके बाद कार्डियोलॉजी के एसोसिएट प्रो। डॉ। संतोष कुमार सिन्हा ने रिसर्च का निर्णय लिया। दो वर्ष पहले स्क्रीनिंग में 30 से 40 उम्र के 35 पेशेंट चिन्हित किए। फिर लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट में कार्डियक एमआरआई जांच कराई।
दिल की मांसपेशियां हो जाती कमजोर
रिपोर्ट में दिल की तीनों दीवारों की मांसपेशियों पर नसों के गुच्छे जैसा उभार नजर आया। जिससे दिल की मांसपेशियां कमजोर होने से पंपिंग प्रभावित होने का पता चला। डॉ। सिन्हा के मुताबिक पेशेंट में सारकाइडोसिस का पता चलने पर उन्होंने मेडिसिन चलाई तो नसों के गुच्छे गलने से 26 पेशेंट पूरी तरह स्वस्थ हो गए। जबकि 11 पेशेंट में भी काफी सुधार देखने को मिला।