- नगर निगम इंजीनियरिंग विभाग टेंडर प्रक्रिया में करने जा रहा हैं बड़ा बदलाव, प्रस्ताव तैयार

- बैंक से एक ही एफडी बना कर फर्जी तरीके से कई टेंडर में जमानत के रूप में करते थे यूज

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KANPUR : नगर निगम में अब कॉन्ट्रैक्टर्स के फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने की तैयारी है। इसको लेकर एक प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्ताव पर मुहर लगी तो कॉन्ट्रैक्टर्स के फर्जीवाड़े पर पूरी तरह से लगाम लग जाएगी। नगर निगम में 2 लाख रुपए से ऊपर के टेंडर ऑनलाइन किए जाते हैं, लेकिन ऑनलाइन टेंडर अप्लाई करने के बाद टेंडर कॉस्ट की 10 परसेंट जमानती धनराशि की एफडी मैनुअल लगाई जाती है। अर्नेस्ट मनी (जमानती धनराशि) इसलिए जमा कराई जाती है, जिससे कॉन्ट्रैक्टर विकास कार्य मानक के अनुरूप न करे तो ये राशि नगर निगम जब्त कर लेता है।

इस प्रकार होता है पूरा खेल

नगर निगम में पहले इस प्रक्रिया को अपनाया गया था, लेकिन सेटिंग-गेटिंग के खेल में इस प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑफलाइन कर दिया गया। अब इसे फिर से ऑनलाइन करने से कॉन्ट्रैक्टर्स में हड़कंप मच गया है। अब एक एफडी बनाकर वे कई टेंडर में इसका यूज नहीं कर पाएंगे। दरअसल, बैंक में ओरिजनिली एक एफडी बनवाई जाती है। कलर्ड फोटोकॉपी और एडिटिंग के जरिए अमाउंट बदलकर उसे दूसरे टेंडर में भी डाल दिया जाता है। एफडी नंबर भी एक होने से नगर निगम के क्रॉस चेक में भी ये चीज पकड़ में नहीं आती है और कॉन्ट्रैक्टर्स फर्जीवाड़ा कर बच जाते हैं।

अर्नेस्ट मनी भी अॉनलाइन

नगर निगम में 350 कॉन्ट्रैक्टर्स रजिस्टर्ड हैं और यही सभी 6 जोन में ठेकेदारी करते हैं। इसमें कई बड़े कॉन्ट्रैक्टर्स हैं जो विभागों में सेटिंग-गेटिंग करते हैं। चीफ इंजीनियर कैलाश सिंह ने इस प्रस्ताव को लेकर काफी गंभीरता दिखाई है। इसमें एक बड़े बैंक ने भी प्रपोजल दिया है। ऑनलाइन टेंडर भरने के दौरान बैंक के गेटवे द्वारा अर्नेस्ट मनी भी ऑनलाइन जमा करनी होगी।

डेवलपमेंट व‌र्क्स प्रभावित होते

ये प्रक्रिया इसलिए भी बेहद जरूरी है कि कॉन्ट्रैक्टर्स एफडी में फर्जीवाड़ा कर एक साथ कई टेंडर में पार्टिसिपेट करते हैं। कई बार होता है कि रेट बिलो होने पर एक कॉन्ट्रैक्टर को कई टेंडर मिल जाते हैं। ऐसे में उसके पास पैसा न होने से वो सिर्फ एक ही विकास कार्य करता है। इससे नगर निगम को टेंडर कैंसिल कर फिर टेंडर करना पड़ता है। इसमें 6 महीने से 1 साल तक का टाइम लग जाता है। ऐसे कॉन्ट्रैक्टर्स की वजह से हर साल लगभग 2 करोड़ रुपए के डेवलपमेंट व‌र्क्स प्रभावित होते हैं। डेवलपमेंट व‌र्क्स न होने से लोगों को भारी मुश्किल होती है और नगर निगम की छवि खराब होती है।

'' अर्नेस्ट मनी को ऑनलाइन करने के लिए प्रपोजल तैयार किया है। इसे उच्चाधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। पास होने के बाद इसे लागू किया जाएगा.''

कैलाश सिंह, चीफ इंजीनियर, नगर निगम