कानपुर(ब्यूरो)। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के जच्चा-बच्चा अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए प्राइवेट रेडियोलॉजिस्ट सेंटर्स के चक्कर काटने पड़ते है। इसका मुख्य कारण अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट टेक्नीशियन की कमी होना है। जिसकी वजह से अस्पताल में मौजूद एक अल्ट्रासाउंड मशीन आए दिन बंद पड़ी रहती है। इसके अलावा वार्ड व लेबर रूम के आसपास गंदगी फैली रहती है। जिससे जच्चा व बच्चा को इंफेक्शन होने की आशंका भी बनी रहती है।

ग्लूकोज की बोतल व सर्जरी ग्लबस बाहर से मंगवाते

अस्पताल में ग्लूकोज की बोतलें व सर्जरी ग्लब्स होने के बावजूद वहां भर्ती होने वाले पेशेंट के परिजनों से स्टॉफ यह सामग्री से बाहर लाने का दबाव बनाते हैं। इसके अलावा पेशेंट के तीमारदार की स्थिति को देखते हुए दवाएं व इंजेक्शन भी बाहर से मंगा कर ट्रीटमेंट करते है। जबकि शासन की तरफ से गर्भवतियों के ट्रीटमेंट के लिए दवाएं, गाज-पट्टी, इंजेक्शन व मेडिसिन प्राप्त मात्रा में मुहैया कराया जाता है। इसके बावजूद स्टॉफ तीमारदारों से ट्रीटमेंट की सामग्री बाहर से मंगवाते हैं।

लगा दिया था एक्सपायरी इंजेक्शन

जीएसवीएम अस्पताल के जच्चा बच्चा विभाग में बीते दिनों स्टॉफ नर्स ने एक पेशेंट को एक्सपायरी इंजेक्शन लगा दिया था। जिसको लेकर परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया था। यह मामला कुछ दिनों तक सोशल मीडिया में चर्चा में भी बना रहा था। मामले की जांच जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ। संजय काला के दिशानिर्देश में हुई थी। जांच में सामने आया था कि उस ब्रांड का इंजेक्शन अस्पताल में सप्लाई ही नहीं होता है। इंजेक्शन बाहर से मंगाया गया था।

अस्पताल के एंट्री गेट में फैला अतिक्रमण

जच्चा बच्चा अस्पताल के एंट्री गेट के आसपास फुटपाथ दुकानदारों का अवैध कब्जा है। जिसकी वजह से पेशेंट को काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। अवैध कब्जों की वजह से अस्पताल के पोर्टिको तक एंबुलेंस को पहुंचने में काफी समस्या होती है। इसके अलावा अस्पताल में एंबुलेंस के एंट्री व एक्जिट करने का एक ही रास्ता है। क्योंकि दूसरे गेट में स्टॉफ ने ताला लगा रखा है। जिसके ठीक सामने पूरा दिन दुकाने सजी रहती हैं।

पुरानी मशीनों से चल रहा काम

अस्पताल प्रशासन की बात माने को अल्ट्रासाउंड समेत अन्य जांच मशीनें काफी पुरानी है। नई मशीनों व उनको ऑपरेट करने के लिए टेक्नीशियन को तैनात करने को अधिकारियों के साथ शासन को पत्र भेजा गया है। जिससे पेशेंट को बेहतर ट्रीटमेंट उपलब्ध कराया जा सके। वहीं पेशेंट को विभिन्न जांचों के लिए बाहर भी नहीं जाना पड़ेगा।

कोट

अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के साथ अधिक से अधिक जांचे हो सके। इसके लिए नई मशीनों व ऑपरेटर को तैनात करने का आग्रह प्रिंसिपल व शासन से किया गया है। इससे पेशेंट को काफी राहत मिलेगी।

डॉ। नीना गुप्ता, एचओडी, जच्चा बच्चा अस्पताल