कानपुर (ब्यूरो) सुदामा का पति मोहन, बेटी चांदनी और तीन बच्चे अपने घर में भी नहीं हैैं। पड़ोस के रहने वालों ने बताया कि जिस दिन सुदामा का अंतिम संस्कार हुआ था, उस दिन तो परिवार को लोग घर पर थे, लेकिन उसके बाद से उनका पता नहीं चला.पड़ोसियों ने बताया कि कभी पुलिस तो कभी रमन नेमानी के मिलने वाले घर आ रहे थे, जिसकी वजह से परिवार दहशत में था और घर छोड़कर कहीं रिश्तेदारी में चला गया।

सीएम को सौंपेंगे रिपोर्ट
नाबालिग बच्ची को काम पर रखने और उसके बाद उस पर चोरी का आरोप लगाने के मामले में केस दर्ज किया जाएगा। राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने बताया कि इस बात की जांच भी कराई जाएगी कि 17 अप्रैल के बाद चोरी की रिपोर्ट क्यों दर्ज नहीं की गई। इसमें किसकी गलती है। इसी दौरान पूरे मामले की जांच कर रहीं एसीएम 6 वान्या ंिसंह भी वन स्टॉप सेंटर पहुंच गईं। उन्होंने एसीएम से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने के आदेश दिए साथ ही कहा कि वे पूरे मामले की रिपोर्ट सीएम को सौंपेंगी। उन्होंने बताया कि हर महीने एक थाने का निरीक्षण किया जाएगा, महिलाओं से संबंधित शिकायतों के निस्तारण की डिटेल देखी जाएगी।

इन बिंदुओं पर पुलिस कमजोर
1-केंद्र के पदाधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने पुलिस को मना किया कि नियमानुसार महिला को यहां रखना गलत है। इसके बावजूद पुलिस ने मां-बेटी को वहां क्यों रखा?
2-चोरी 17 अप्रैल को हुई और मुकदमा नौ मई को क्यों लिखा गया?
3-मुकदमा लिखे जाने से पहले मां-बेटी को पूछताछ के लिए क्यों उठाया गया?
4-पुलिस दावा कर रही है कि किशोरी के पास से जेवर बरामद हुए हैं तो मां की मृत्यु के बाद कारोबारी से पीडि़त परिवार को साढ़े 10 लाख रुपये क्यों दिलवाए गए?
5-पूरी कार्रवाई में कोई भी महिला पुलिस अधिकारी क्यों नहीं शामिल की गई?

बैकफुट पर पुलिस
इस प्रकरण में पुलिस फिलहाल बैकफुट पर है। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि महिला के आत्महत्या प्रकरण में मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश हो गए हैं। जबकि चोरी के मुकदमे में फिलहाल कोई जांच आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।