कानपुर(ब्यूरो)। इसे नगर निगम की बेरुखी कहें, या फिर सडक़ों की बदहाली। टूटी रोड्स की वजह से सडक़ किनारे पेड़, पौधों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। धूल की परत जमने से पौधों का विकास रुकने के साथ साथ पेड़ सूखने के कगार पर पहुंच रहे हैं। अगर ऐसी हालत रही तो धूल से शहर की ग्रीनरी पर जल्द ही धुंध छा जाएगी। टूटी रोड्स, मेट्रो का जगह-जगह निर्माण समेत अन्य कई कारणों की वजह से दिन भर शहर धूल की चादर से ढका होता है। जिसके बाद यही धूल डिवाइडर के पौधों और पेड़ों की पत्तियों पर जम जाती है।

पौधे सांस नहीं ले पाते
एक्सपर्ट्स की मानें तो पौधे भी सांस लेते हैं। पौधों के पत्तों में स्टोमेटा नामक पदार्थ होता है, जिससे उन्हें सांस लेने में मदद मिलती है। इसके द्वारा ही पौधों की ग्रोथ होती है और बाद में पेड़ बनते हैं, लेकिन जब पौधे पर जब धूल की परत जम जाती है तो स्टोमेटा पदार्थ के छिद्र बंद हो जाते हैं। इससे वे सांस नहीं ले पाते और पौधा सूख जाता है।

न के बराबर छिडक़ाव
शहर में एयर पॉल्यूशन का लेवल तो कम ज्यादा होता रहता है, लेकिन पेड़-पौधों की पत्तियों पर धूल की कणों की मोटी परत जमी हुई है। जब भी हवा चलेगी तो पत्तियों पर जमा ये पॉल्यूशन तत्व हवा में उड़ेंगे और लोगों के लिए फिर मुसीबत बनते है। वहीं, हैरानी की बात है कि नगर निगम पेड़ पौधों पर पानी का छिडक़ाव नाममात्र का करता है, या फिर यूं कहें कि करना न करना एक बराबर है, क्योंकि शहर बहुत बड़ा है और संसाधन न के बराबर है। यही वजह है शहर के विभिन्न एरिया के पेड़ पौधों पर धूल की मोटी परत जमा हुुई है।

पत्तियों पर चिपकते हैं कण
पत्तियों पर जमा धूल कण की परत काफी मोटी होती जा रही है। इसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं दिखता। वहीं, पिछले करीब एक महीने से पॉल्यूशन की स्थिति भी खराब हो रही हैैैैैैैैैैैैैै। जिससे कानपुर शहर के हरे भरे दिखने वाले पेड़, धूल से भर गए हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि रात में शीत अधिक पडऩे से शहर के ऊपर तैर रहे धूल कण नीचे एक परत के रूप में पेड़ों की पत्तियों पर आकर चिपक रहे हैं।

1.83 लाख पौधा लगाने का लक्ष्य
नगर निगम ने जून 2021 से शहर के विभिन्न इलाके पनकी बाईपास से जरीब चौकी, विजय नगर चिल्डे्रन पार्क, टाटमिल पुल से किदवई नगर से पशुपति नगर, नगर निगम महिला महाविद्यालय के पास समेत अन्य जगहों पर लगभग एक लाख 83 हजार पौधरोपण करने का लक्ष्य रखा है, इनमें पारस, पीपल, जामुन, पिलखन, शीशम गोल्ड समेत अन्य है।

अपनी सेहत का रखे ख्याल
- जब भी बाहर निकले तो मुंह और नाक को किसी साफ कपड़े से ढक लें
- दो पहिया वाहन से हैं तो आगे ग्लास लगा हेलमेट का यूज जरूर करें
- आंख के बचाव के लिए अगर संभव हो सके तो चश्मा पहनें
- ज्यादा देर बाहर रहने पर पानी से पूरे चेहरे और आंखों को जरूर धोएं
- सुबह, शाम ऐसी जगह पर व्यायाम या प्राणायाम न करें जहां पर धुआं, धूल न हो।

इन इन जगहों पर जमा धूल
गोल चौराहा, आर्य नगर, श्नेश्वर चौराहा, ग्वालटोली, फूलबाग, खपरा मोहाल, शास्त्री नगर, जीटी रोड, ईदगाह चौराहा समेत कई अन्य जगहों के पेड़ पौधों पर धूल जमी हुई है।

ये हैं मुख्य वजह
सभी सडक़ोंं पर गंदगी न हटना, मेट्रो का जगह जगह निर्माण, सीवर, पाइप लाइन बिछाने के लिए खोदे गए गड्ढे, टूटी फूटी सडक़े, फुटपाथ का न होने के अलावा अन्य कई कारण है।

कोट
शहर में ग्रीनरी करना बेहद जरूरी है, पेड़ पौधे ही आक्सीजन देते हैं अगर ये नहीं रहेंगे तो हम लोगों को जीवन कैसे चलेगा। इसलिए सबसे पहले पेड़ पौधों की देखभाल बेहद जरूरी है।
दिलीप


- इस दुकान पर करीब पंद्रह साल हो गए, लेकिन आज तक किसी को नहीं देखा कि पेड़ों और पौधों की सफाई के साथ साथ उस पर पानी का छिडक़ाव किया गया हो। हरियाली मर गई है।
निशांत


-लोग पौधा लगाते हैं, तो दिखावे के लिए सोशल मीडिया पर फोटो डाल देते हैं, लेकिन उसके बाद पौधे की कोई देखरेख नहीं करता है, लोगों को आगे आकर ग्रीनरी को बचाना चाहिए।
अर्पित