कानपुर(ब्यूरो)। ब्रिटिश काल में शहर की मछली बाजार मस्जिद, मालरोड, नाना साहब के घर, चौक बाजार, सरसैया घाट और मैस्कर घाट की छाप पोस्टकार्ड पर देखने को मिलती थी। पोस्टल डिपार्टमेंट ने दैनिक जागरण समूह के संस्थापक पूर्णचन्द्र गुप्त जी के सम्मान में 2 जनवरी 2012 में प्रथम दिवस आवरण व टिकट जारी किया था। पोस्टल टिकट कलेक्शन में सिटी के कलेक्शन का विदेश तक डंका बज रहा है। सिटी के कलेक्शन में अंग्रेजों के जमाने से लेकर वर्तमान समय तक के टिकटों का अनोखा कलेक्शन है। इनमें ऐसे टिकट भी शामिल हैं जिनकी कीमत हजारों रुपये पहुंच चुकी है।

कलेक्शन में मिला इंटरनेशनल अवार्ड
पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट गुमटी नंबर पांच निवासी राजप्रीत ङ्क्षसह सलूजा को पोस्टल टिकटों के कलेक्शन ने विदेश तक में पहचान दिलाई है। हाल ही में न्यूजीलैंड में आयोजित पोस्टल टिकटों की प्रदर्शनी में उनको रजत पदक मिला है। इससे पहले इंडोनेशिया में हुई प्रदर्शनी में उन्होंने रजत पदक जीता था। वहीं, बर्रा निवासी डीडी शुक्ला के पास स्वतंत्र भारत का पहला डाक टिकट मौजूद है। यह टिकट 21 नवंबर 1947 में जारी किया गया था।

इस तरह के टिकटों का संग्रह
-राजप्रीत सिंह के पास वर्ष 1947 से लेकर अब तक के डाक टिकटों का संग्रह है।
-सिखों के इतिहास पर आधारित डाक टिकटों का संग्रह.-वर्ष 1913 में लाहौर से जारी महाराजा रणजीत ङ्क्षसह की समाधि का टिकट जिसपर स्वर्ण मंदिर की मुहर है।

-प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जारी किए गए टिकट।
भारत व ईरान ने संयुक्त रूप से जारी किया टिकट
16 अगस्त 2004 में भारत व ईरान ने संयुक्त रूप से कबीरदास जी पर डाक टिकट जारी किया था। यह अपने आप में अनूठा है।