कोलकाता के माणकतला में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे रजत गुप्ता ने अपनी प्रतिभा की बदौलत ये कामयाबी हासिल की। 63 वर्षीय रजत गुप्ता के पिता एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पत्रकार थे और माँ एक स्कूल में पढ़ाती थीं। लेकिन उन्हें अपने परिवार का साथ ज्यादा दिनों तक नहीं मिल सका। रजत गुप्ता जब 18 साल के थे तभी उनके माता-पिता का अचानक देहांत हो गया।

रजत गुप्ता शुरू से ही पढ़ने में काफी अच्छे थे और उन्होंने साल 1966 में आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में 15वां स्थान हासिल किया था। आईआईटी दिल्ली स्नातक करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए वो अमरीका चले गए।

अमरीका के हार्वर्ड स्कूल में उच्च शिक्षा के दौरान अपनी कक्षा में पहला स्थान हासिल किया और उसके बाद की अपनी पूरी पढ़ाई उन्होंने वजीफ़े की बदौलत पूरी की।

नौकरी

पड़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने साल 1973 में कंसल्टैंसी फर्म मैकिंजी के न्यू यॉर्क दफ्तर में नौकरी शुरू की और बीस साल के भीतर वो इस कंपनी के सर्वोच्च पद पर पहुंचे। इस कंपनी के सीईओ बनने वाले वे भारतीय मूल के पहले व्यक्ति थे।

मैकिंजी के प्रमुख के पद के अलावा उन्होंने गोल्डमैन सैक्स जैसी कई बड़ी कंपनियों में भी बड़े पद पर काम किया। गोल्डमैन सैक्स के वो निदेशक भी रह चुके हैं।

रजत गुप्ता प्रॉक्टर एंड गैंबल जैसी कंपनी के बोर्ड के सदस्य के अलावा संयुक्त राष्ट्र के विशेष सलाहकार के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। अमरीकन एयरलाइंस की मूल कंपनी एएमआर कॉर्पोरेशन के निदेशक के पद पर भी रजत गुप्ता काम कर चुके हैं।

रजत गुप्ता को अमरीका के सबसे बड़े इनसाइडर ट्रेडिंग मामले में सज़ा सुनाई गई है। उन्हें गैलियन हेज फंड के संस्थापक राज राजारत्नम को कारोबार से जुड़ी कई गोपनीय सूचनाएं पहुंचाने का दोषी ठहराया गया था।

उन पर आरोप है कि गोल्डमैन सैक्स और प्रॉक्टर एंड गैंबल के बोर्ड में रहते हुए उन्होंने हेज फंड के मैनेजर राज राजरत्नम को गोपनीय सूचनाएं दी थीं।

समर्थन

हालांकि रजत गुप्ता ने अपने ऊपर लगे इन आरोपों से इंकार किया है। वहीं उन्हें बचाने के लिए भारतीय कारोबारियों से लेकर अमरीकी अधिकारियों तक ने कोशिश की है और उनके समर्थन में सामने आए हैं।

मैकेंजी के पूर्व अधिकारी अतुल कानागत ने इस रजत गुप्ता के समर्थन के लिए एक वेबसाइट भी शुरू की है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और गोदरेज समूह के चेयरमैन आदि गोदरेज सहित कई उद्योगपतियों ने उनके समर्थन में लेख लिखे हैं।

कॉर्पोरेट जगत में बुलंदियों को छूने में रजत गुप्ता को भले ही चालीस साल लग गए हों, लेकिन उनकी प्रतिष्ठा धूमिल होने में एक वर्ष भी नहीं लगा। पिछले साल अपने ऊपर लगे आरोपों के चलते उन्होंने अमरीकी खुफिया एजेंसी एफबीआई के समक्ष आत्म समर्पण किया था। बाद में अदालत ने उन्हें इनसाइडर ट्रेडिंग का दोषी करार दिया।

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