कानपुर (ब्यरो)। आईआईटी कानपुर एक वल्र्ड क्लास इंस्टीट््यूट है। जिसने न सिर्फ देश को बल्कि दुनिया को कई बड़े साइंटिस्ट, इंडस्ट्रिलिस्ट, एंटरप्रेन्योर और ऑफिसर दिए हैं। हमारे लिए गर्व की बात है कि यहां के स्टूडेंट अपने टैलेंट से खुद के साथ इंस्टीट्यूटी की चमक बढ़ा रहे हैं। आईआईटी में एडमिशन लेना लाखों बच्चों का ड्रीम होता है। यहां एडमिशन मिलने का मतलब एक सक्सेसफुल करियर और आगे बढऩे के लिए आकाश तक ऊंचाई। लेकिन, एक महीने में जिस तरह से आईआईटी के तीन होनहार स्टूडेंट ने अपनी जिंदगी पर फुल स्टॉप लगाया है, उसने सभी को चिंता में डाल दिया है। थर्सडे को आईआईटी की पीएचडी स्टूडेंट प्रियकां जायसवाल ने हॉस्टल के अपने रूम में फंासी लगाकर जान दे दी।

फॉरेंसिक टीम ने की पड़ताल
मूल रूप से झारखण्ड के दुमका निवासी 29 साल की प्रियंका के परिजनों ने गुरुवार सुबह फोन कर उसे जगाने की कोशिश की। जब काफी देर तक फोन नहीं पिक हुआ तो अनहोनी की आशंका के चलते उन्होंने वार्डन को जानकारी दी। वार्डन ने आईआईटी प्रशासन को दरवाजा न खुलने की जानकारी दी। जानकारी मिलने पर एडीसीपी वेस्ट आकाश पटेल और प्रभारी निरीक्षक धनंजय कुमार पांडेय मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम को भी पड़ताल के लिए बुलाया गया। टीम ने फंदे से शव उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने परिजनों से संपर्क कर मामले की जानकारी दी तो परिवार में कोहराम मच गया।

परिवार की इकलौती बेटी थी
दुमका निवासी नरेंद्र कुमार जायसवाल नौकरी करते हैैं। परिवार में पत्नी और इकलौती बेटी 29 साल की बेटी प्रियंका थी। संस्थान के मैनेजमेंट से मिली जानकारी के मुताबिक प्रियंका केमिकल इंजीनियरिंग से पीएचडी कर रही थी। उसने 29 दिसंबर को ही कानपुर आईआईटी में एडमिशन लिया था और 4 जनवरी से उसकी क्लासेस शुरू हुई थी। बुधवार शाम प्रियंका ने परिवार वालों को शाम सवा सात बजे कॉल कर कहा था कि गुरुवार को सुबह साढ़े सात बजे उसे जगा दें। परिवार वाले सुबह से कॉल कर रहे थे। कॉल न उठने पर वार्डन को जानकारी दी।
नहीं मिला कोई सुसाइड नोट
पुलिस के आने पर दरवाजा तोड़ा गया तो मोटे रस्से से उसका शव पंखे के सहारे लटक रहा था। जानकारी मिलने पर परिवार वाले झारखण्ड से कानपुर के लिए रवाना हुए। वहीं पुलिस ने डेडबॉडी सील कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दी। इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय ने बताया कि परिजनों के आने पर पोस्टमार्टम किया जाएगा। कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। प्रियंका ने जान क्यों दी? इसके लिए उसका मोबाइल कब्जे में लिया गया है। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफार्म को डिकोड करने की कोशिश फॉरेंसिक टीम कर रही है।


एक महीने अंदर ये मामले हुए
19 दिसंबर को मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली डॉ। पल्लवी चिल्का ने आईआईटी कानपुर के हॉस्टल में सुसाइड किया था। उनका शव कमरे में पंखे से लटका मिला था। वे एक अगस्त 2023 को रिसर्चर के रूप में संस्थान के बायो साइंस और बायो इंजीनियरिंग विभाग से जुड़ी थीं।
11 जनवरी को मेरठ के विकास कुमार मीणा ने फांसी लगाकर जान दे दी थी। मेरठ के कंकरखेडा निवासी 30 साल के छात्र विकास आईआईटी कानपुर में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग से एमटेक कर रहा था। उसने हॉस्टल में पंखे से मफलर के सहारे फंदा लगाकर जान दे दी थी।

आईआईटी कैंपस में मीडिया की नो एंट्री
आईआईटी में पीएचडी स्टूडेंट के सुसाइड के बाद मीडिया की एंट्री को पूरी तरह से रोक दिया गया। आईआईटी के किसी अधिकारी ने भी इस संबंध में कोई बात नहीं की। घटना की जानकारी मिलते ही कुछ मीडियाकर्मियों ने कैंपस में जाकर ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग करना चाही तो उनको गेट पर ही रोका गया। गेट पर खड़े गार्ड ने साफ शब्दों में कहा अफसरों ने मीडिया को नॉट अलाउड कहा है। जब अंदर से आर्डर आएगा, तभी एंट्री दी जाएगी। माना जा रहा है एक महीने के भीतर तीसरे सुसाइड के बाद आईआईटी एडमिनिस्ट्रेशन फूंक फूंक कर कदम रख रहा है। मीडिया के अंदर आकर स्टूडेंट से बातचीत करने या मौके की स्थिति जानने से रोकने के लिए एंट्री बैन की गई है। आईआईटी को अंदेशा है कि मीडिया के अंदर आने से कोई इंटरनल मैटर बाहर न जाए, जिससे आईआईटी की बदनामी हो। हालांकि आईआईटी के मीडिया ग्रुप में सुसाइड की सूचना को पोस्ट किया गया है।