लखनऊ (ब्यूरो) । चारबाग हमेशा से देह व्यापार के लिए बदमान रहा है, लेकिन पहले वह रात के अंधेरे में चलता था। पिछले कुछ दिनों से यह धंधा दिन के उजाले में भी तेजी से फल-फूल रहा है। चारबाग मेट्रो स्टेशन के नीचे व उसके आस-पास 20 से 25 की संख्या में सेक्स वर्कर का पूरा जाल फैला रहता है। स्टेशन से बाहर निकलने वाले या फिर दूसरे शहर से आने वाले लोगों को रोकती हैं और अपने जाल में सरेआम फंसाती हैं। यह नजारा हर दिन का रहता है।

कोविड के बाद आई तेजी
आस-पास के दुकानदारों का कहना है कि कोविड के बाद से यह धंधा तेजी से बढ़ा है। मेट्रो स्टेशन के नीचे व टैैंपो, ई-रिक्शा स्टैैंड के आस-पास नकाब बांध कर लड़कियां व महिलाएं बाहर से आने वाले लोगों को रोक कर ऑफर देती हैं। यह खेल पूरी तरह दिल्ली की जीबी रोड की तरह पनप रहा है।

'पुलिस का कोई डर तो नहीं है
सेक्स वर्कर - चलोगे क्या
रिपोर्टर - कहां चलना है?
सेक्स वर्कर - यहीं पास के होटल में
रिपोर्टर - क्या रेट है?
सेक्स वर्कर - 12 सौ रुपये लगेंगे
रिपोर्टर - हम दो लोग हैं।
सेक्स वर्कर - फिर 24 सौ रुपये लगेंगे
रिपोर्टर - होटल का अलग से देना होगा
सेक्स वर्कर - नहीं, उसी में सब शामिल है
रिपोर्टर - पुलिस का कोई डर तो नहीं है।
सेक्स वर्कर - पुलिस का कोई डर नहीं है, डरो नहीं
रिपोर्टर - लेकिन मेरे पास कोई आईडी नहीं है
सेक्स वर्कर - कोई बात नहीं, एक दो घंटे के लिए आईडी नहीं देनी पड़ेगी
रिपोर्टर - फिर भी अगर होटल वाले पुलिस से शिकायत न कर दें
सेक्स वर्कर - नहीं, सब सेट है, बस जितना पैसा बताया उतना खर्च करो
रिपोर्टर - ठीक है, होटल का नाम बताओ, पैसा वहीं दूंगा
सेक्स वर्कर - नहीं पैसा यहीं देना होगा, पैसा देकर मेरे पीछे चलो होटल में मैैं ले जाऊंगी


'मजा करना है तो बताओ
सेक्स वर्कर - कहां इधर, उधर देख रहे हो, कुछ चाहिए क्या
रिपोर्टर - मतलब, क्या चाहिए?
सेक्स वर्कर - मजा करना है तो बताओ
रिपोर्टर - अपनी उम्र देखो, शर्म नहीं आती है
सेक्स वर्कर - अरे नहीं, मैैं नहीं, मैं सप्लाई करती हूं
रिपोर्टर - कहां हैं तुम्हारी लड़कियां
सेक्स वर्कर - पहले सौदा तो तय कर लो
रिपोर्टर - मतलब, क्या?
सेक्स वर्कर - एक आदमी का एक हजार रुपये लगेगा
रिपोर्टर - हम दो लोग हैं
सेक्स वर्कर - दो हजार पेमेंट कर दो, लड़की यहीं बुला रही हूं
रिपोर्टर - मैं शहर में नया हूं, मैं कहां ले जाऊंगा
सेक्स वर्कर - परेशान मत हो, लड़की तुम्हें होटल में ले जाएगी
रिपोर्टर - मतलब होटल का भी अलग से देना होगा?
सेक्स वर्कर- नहीं, उसी पैसे में होटल भी मैनेज है, डरो नहीं जाओ मजे करो

होटल भी खेल में शामिल
चारबाग के आस-पास कई छोटे होटल भी इस खेल में शामिल हैं। सेक्स वर्कर ग्राहकों से पैसा लेकर इन होटल में जाती हैं और फिर उन्हें बिना आईडी के कमरा उपलब्ध कराया जाता है। यह महज एक घंटे के लिए उपलब्ध कराया जाता है। फिर से सेक्स वर्कर दोबारा स्टेशन के बाहर पहुंच कर ग्राहक की तलाश शुरू करती हैं।

दलाल के जरिए भी बुकिंग
मेट्रो स्टेशन के नीचे कई उम्र दराज महिलाएं भी ग्राहकों को जाल में फंसाती है। वह दलाल के रूप में काम करती हैं और ग्राहक से सौदा कर उन्हें सेक्स वर्कर उपलब्ध कराती हैं।

आए दिन होते हैं झगड़े
सेक्स वर्कर स्टेशन से बाहर आने वाले लोगों को कॉल कर बुलाती हैं। कई बार पीछे तक पड़ जाती हैं। उनके जाल में न फंसने वाले लोगों से गाली गलौज तक होती है। भीड़ बढऩे पर वर्कर मौके से नदारत हो जाती हैं। कई बार उनकी संख्या ज्यादा होने पर व्यक्ति को अपनी इज्जत बचाने के लिए वहां से हटना पड़ता है। लोक लाज के भय वह दूसरे शहर में आकर पुलिस से शिकायत करने से भी ऐसे लोग बचते हैं।

पुलिस को भी मालूम, बस आंखें हैं बंद
जिस स्पॉट पर जिस्म की मंडी सजती है, वहां से दोनों तरफ पुलिस चौकी है। एक नाका थाने की चौकी है जबकि दूसरी हुसैनगंज थाने की चौकी है। इसके अलावा जीआरपी पुलिस कर्मियों की भी गश्त रहती है, लेकिन इस मंडी के खिलाफ कोई भी एक्शन नहीं लेता है।

शरीफ लोगों के लिए बन रहा मुसीबत
चारबाग मेट्रो स्टेशन पर सबसे ज्यादा लोगों की आमद होती है। मेट्रो स्टेशन के बाहर गेट पर ही वर्कर अपना अड्डा बनाए हुई हैं और बाहर निकलने वाले लोगों को शिकार बनाती हैं। कई बार शरीफ लोगों को भी इनके चलते परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहां से गुजरने वाली महिलाएं व लड़कियों को भी लोग गंदी निगाह से देखते हैं।

स्टूडेंट्स व यूथ होते हैं खास निशाने पर
स्टेशन के बाहर सजने वाली मंडी में ट्रेन से एग्जाम देने आने वाले स्टूडेंट्स व ऐसे यूथ जो बाहर से कमा कर आते हैं, वह वर्कर के टारगेट पर होते हैं। उन्हें फोकस कर रोका जाता है। कई बार छोटे शहरों से आने वाले यूथ उनके जाल में भी फंस जाते हैं और चकाचौंध व आधुनिकता की होड़ के चलते उनके शिकार बनते हैं।