- अलविदा की नमाज में कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरह किया गया पालन

LUCKNOW:

अलविदा के मुबारक मौके पर भी रोजेदारों ने कोविड प्रोटोकॉल और इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया की एडवाइजरी पर अमल करते हुए अपने घरों में ही नमाज अदा की। मस्जिदों में सिर्फ उन पांच लोगों ने नमाज पढ़ी। मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली इमाम ईदगाह लखनऊ ने जामा मस्जिद ईदगाह में जुमे की नमाज के खिताब में मुसलमानों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पूरे कोरोना दौर में उन्होंने अपने कामों से यह साबित किया कि वह अमन पसंद और अपने पड़ोसियों की सेहत का ख्याल रखने वाले, अपने सामाज, अपने देश और अपनी कौम की भलाई चाहने वाले हैं। वह ऐसे दौर में भी इस्लामी शरीअत के आदेश व हिदायत के अनुसार, सरकार के सुरक्षा के उपायों की रोशनी में अपनी इबादतों को अंजाम दे रहे हैं।

सादगी से मनाएं ईद

मौलाना फरंगी महली ने उन साहिबे निसाब मुसलमानों पर जोर दिया जिन्होंने अब तक जकात नहीं निकाली है। वह अपने माल की जकात जल्द अदा करें। मुहम्मद साहब का फरमान है कि अपनी बीमारियों का इलाज सद्के के साथ करो, इसलिए लोग ज्यादा से ज्यादा यतीमों, गरीबों, मोहताजों, बेवाओं की मदद करें। उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि ईद के मौके पर नये कपड़े न बनवाएं और खुदा पाक ने जो भी अच्छे कपड़े दिये हैं उसी में नमाज अदा करें।

परामर्श ले सकते हैं

मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने कोविड प्रभावितों की सहायता के लिए कोविड हेल्प लाइन स्थापित की है। इस हेल्पलाइन से बहुत से डाक्टर्स जुड़े हैं। जो लोग भी बीमार हैं वह मोबाइल नंबर 8299441607 पर संपर्क करके उनसे चिकित्सा परामर्श ले सकते हैं। जरूरतमंदों को फ्री कोविड किट दी जा रही है, जिसमें कोविड के इलाज के लिए सारी दवायें शामिल हैं।

निंदा करने वाली बात

मौलाना फरंगी महली ने तकरीर में कहा कि मस्जिद अकसा मुसलमानों का किबला अव्वल है। बैतुल मुकद्दस पर मुसलमानों का हक है। उस पर इजरायल कब्जा किये हुए हैं। उन्होंने मजबूर व निर्दोष फिलिस्तीनियों पर जुल्म कर रखा है। यह निंदा करने योग्य है और मानवधिकारों का खुले आम उलंघन है।

सुन्नी सवाल-जवाब

सवाल- एक शख्स ने जकात की रकम देने के लिए निकाली लेकिन ठीक उसी वक्त उसे कुछ रकम की जरूरत पड़ गयी तो किया वह जकात की रकम कर्ज के तौर पर ले सकता है।

जवाब- जकात की रकम का तो वही मालिक है जब तक अदा नहीं कर देता उसका इस्तेमाल करना सही है।

सवाल- क्या पूरे महीने के रोजों का फिदया एक साथ दिया जा सकता है।

जवाब- पूरे महीने के रोजों का फिदया एक साथ दिया जा सकता है।

सवाल- क्या ऐश व आराम की चीजें जैसे रेडियो, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, मोटर साइकिल पर भी जकात है।

जवाब- इन सभी चीजों पर जकात नहीं है लेकिन जेवरात पर है चाहें वह इस्तेमाल हुए हों या नहीं।

सवाल- सदका फित्र किस-किस की तरफ से देना वाजिब है।

जवाब- सदका फित्र अपनी और अपनी नाबालिग औलाद की तरफ से निकालना वाजिब है।

सवाल- किसी शख्स के पास चार पहियों की गाड़ी है तो क्या उस गाड़ी पर भी जकात है।

जवाब- जो गाड़ी निजी इस्तेमाल के लिए हो उस पर जकात नहीं है।

शिया सवाल-जवाब

सवाल- क्या नमाज पढ़ाने वाले का आगे खड़े होकर नमाज पढ़ाना जरूरी है तब ही जमाअत होगी।

जवाब- नमाजे जमाअत के लिए इमामे जमाअत का थोड़ा आगे खड़ा होना भी काफी है।

सवाल- अगर एतेकाफ जो तीन दिन का होता है उसमें बीच से उठा जाए तो क्या हुक्म है।

जवाब- अगर आप दो दिन पूरे नहीं किए है तो आप उठ सकते हैं लेकिन अगर आप दो दिन बैठ लिए तो आप पर वाजिब है कि एतेकाफ को पूरा करें।

सवाल- जिस व्यक्ति के मसाने या गुरदे में पथरी हो उसके लिए रोजे का क्या हुक्म है।

जवाब- अगर रोजा रखना उसके लिए नुकसान देह हो तो रोजा छोड़ सकता है।

सवाल- क्या पत्‍‌नी का फिदया पति पर अनिवार्य है।

जवाब- पत्‍‌नी का फिदया पति पर और घर के वह लोग जिनकी किफालत घर के मुखिया पर है उस पर वाजिब नहीं है।

सवाल- क्या औरतों का वह चादर ओढ़ना जो इस समय प्रचलित है सही है।

जवाब- इस्लाम ने मुसलमान औरत को बदन छुपाने का हुक्म दिया है ताकि औरत के अंग जाहिर ना हो लिहाजा अगर चादर ऐसी हो जिसके जरिए पूरा बदन छुप जाए और अंग जाहिर ना हो रहे हों तो कोई हर्ज नहीं है।

एक व्यक्ति का फितरा लगभग 75 रुपये

मुमताज उलेमा सैयद सैफ अब्बास नकवी ने एक बयान में कहा कि फितरा जिसे जकाते फितरा भी कहा जाता है, इस्लाम में वाजिब कामों में से एक है। जिसका मतलब है ईद उल फितर, एक निश्चित मात्रा और स्थिति में माल का भुगतान। फितरा गरीबों और जरूरतमंदों को देना अनिवार्य है। जिसकी मात्रा एक साअ लगभग 3 किलो ग्राम गेहूं, जौ, खजूर या किशमिश या उनका मूल्य है। प्रत्येक बालिग और समझदार व्यक्ति जो अपने और अपने परिवार का एक वर्ष का खर्च उठाता हो, उस पर अपने और अपने परिवार का फितरा भुगतान करना वाजिब है। मौलाना सैयद सैफ अब्बास ने कहा कि इस साल कोरोना के कारण लॉकडाउन चल रहा है और गरीबों का काम काज बंद है। इसलिए लोगों से अपील करते हैं कि वे अपने फितरा पैसे को गरीबों में जल्द से जल्द वितरित करें।

हम लोग हर इफ्तार के समय अल्लाह पाक से यही दुआ करते हैं कि कोरोना नामक यह वबा जल्द से जल्द हमारे मुल्क और पूरी दुनिया से खत्म हो जाये। अल्लाह हम सब पर अपनी नेमतों की बारिश करे। ताकि हम सब सुरक्षित रहें और दूसरों की मदद करे सकें। हर किसी को गाइडलाइन का पालन करना चाहिए।

मंसूर अली खान

सुन्नी हेल्पलाइन

लोग अपने सवालात दोपहर 2 बजे से 4 बजे के दौरान इन नम्बरों 9415023970, 9335929670, 9415102947, 7007705774, 9140427677 पर पूछ सकते हैं।

शिया हेल्पलाइन

महिलाओं के लिए हेल्प लाइन नंबर 6386897124 है। जबकि शिया हेल्प लाइन के लिए सुबह 10 स 12 बजे तक 9415580936, 9839097407 नंबर पर संपर्क करें।