- कही बिना रसीद के हो रहा खेल

- स्वास्थ्य विभाग भी बना हुआ है अनजान

केस 1

फीस के रूप में लिये 12 सौ रुपये

शारदा नगर निवासी ज्ञानेंद्र अवस्थी ने तबियत खराब होने पर महानगर स्थित एक निजी लैब से कोविड जांच कराई। लैब का कर्मचरी घर आकर सैंपल ले गया और फीस के तौर पर 1200 रुपये ले गया, लेकिन इसकी कोई रसीद नहीं दी। पूछने पर बताया कि लोड ज्यादा है।

केस 2

कोविड जांच को पांच हजार लिये

गोमती नगर निवासी अजय सिंह, वहां स्थित एक नामी निजी अस्पताल में दिखाने पहुंचे तो कोविड जांच के नाम दो लोगों के पांच हजार रुपये मांगे गये। मजबूरी में उनको ज्यादा रुपये देने पड़े।

केस 3

12 सौ दो तभी होगी जांच

जानकीपुरम निवसी सना ने अलीगंज स्थित एक निजी लैब से कोविड जांच कराई। लैब ने उनसे जांच के नाम पर 1200 रुपये चार्ज कर लिये। ज्यादा चार्ज पर बताया कि इतने ही ले रहे हैं। जांच करानी है या यानि ऐसे में मजबूरी में ज्यादा रुपये देने पड़े।

LUCKNOW: कुछ केस यह बताने के लिए काफी हैं कि कैसे कई निजी लैब और निजी अस्पतालों ने कोरोना महामारी को खुद के लिए आपदा में अवसर बना कर रखा हुआ है। यहां मरीजों से जांच के नाम पर जबरदस्त उगाही का चलन शुरू हो गया है जबकि शासन द्वारा कोविड जांच के लिए सात सौ रुपये और नौ सौ रुपये फिक्स कर दिए गए हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का खामियाजा आम जनता उठा रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती है। ऐसे में मरीजों को जांच के नाम पर भी ज्यादा जेब ढीली कीनी पड़ रही है।

शासन से फिक्स की कोविड जाचं दर

प्रदेश सरकार ने निजी लैब द्वारा कोविड जांच का चार्ज फिक्स कर दिया है। इसके तहत लैब में जाकर सैंपल देने पर 700 रुपये और घर पर बुलाकर सैंपल देने पर 900 रुपये ही चार्ज कर सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद निजी लैब अपनी मनमानी कर रही हैं। सरकारी गाइडलाइन को दरकिनार करते हुए मन मुताबिक चार्ज ले रही हैं। वहीं मजबूर में आम जनता 1200 रुपये से लेकर 2500 रुपये तक देने को मजबूर है क्योंकि उनको भाी मालूम है कि बिना कोविड रिपोर्ट कोई डॉक्टर देखेगा नहीं। ऐसे में बिना कोई शिकायत किए महंगी जांच कराने को मजबूर है।

नहीं दे रहे रसीद

कुछ निजी लैब तो लोगों को खुले आम लूट रहे हैं। जल्द जांच के नाम पर न केवल ज्यादा पैसा ले रहे हैं बल्कि इसकी कोई रसीद भी नहीं दे रहे हैं ताकि अगर कोई शिकायत करे तो पकड़ में न आएं। लोग भी डर के कारण रसीद मांगने पर जोर नहीं देते हैं। उनको डर रहता है कि अगर जांच से मना कर दिया तो दिक्कत हो जाएगी। ऐसे में लेागों की मजबूरी का फायदा उठाने से निजी लैब नहीं चूक रही हैं।

सैंपल लेना बंद है

राजधानी में अचानक से तेजी से बढ़े कोविड मामलों के चलते सरकारी कर्मचारियों पर लोड बहुत बढ़ गया है, जिसकी वजह से कई दिनों तक लोगों के सैंपल नहीं लिए जा पा रहे हैं। ऐसे में बीमार बुजुर्ग और प्रेग्नेंट महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार समय पर इलाज न होने से मौत तक हो जा रही है। इसकी वजह से घरों से सैंपल लेने के लिए लोग निजी लैब का सहारा ज्यादा ले रहे हैं, जिसका फायदा भी लैब उठा रही हैं क्योंकि कई लैब ने तो सैंपल लेना ही बंद कर दिया है। ऐसे में जो गिनी चुनी लैब सैंपल ले रही हैं वह 1200 से अधिक तक का चार्ज वसूल रही हैं।

कम है शुल्क

कई लैब का तर्क है कि सरकार द्वारा जो कोविड जांच की दर तय की गई है वो बेहद कम है। कई बार हमारे कर्मचारी पॉजिटिव हो जाते हैं, जिसकी वजह से सैंपल कलेक्ट करने में दिक्कत होती है। लोगों को ज्यादा वेतन भी देना होता है जबकि छोटी सी कमी पर भी स्वास्थ्य विभाग भारी जुर्माना लगा देता हैं जिसकी वजह से कई दिनों तक लैब भी बंद रहती है। सरकार को निजी लैब की समस्या को भी देखना चाहिए।

कोट

कोई भी निजी लैब सरकार द्वारा निर्धारित दरों से ज्यादा नहीं ले सकती है। अगर कोई लेता है तो इसकी शिकायत सीएमओ ऑफिस में की जा सकती है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी।

। डॉ। एमके सिंह, एसीएमओ