लखनऊ (ब्यूरो)। इसके लिए, पर्यटन विभाग ने 24.43 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार करके भेजा है। उम्मीद है कि जल्द ही स्वीकृति मिल जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक सितंबर में आधारशिला रखी जा सकती है। यहां सेवामुक्त युद्धपोत आईएनएस गोमती की मिसाइल, टारपीडो व कैनन समेत अन्य उपकरणों का भी प्रदर्शन किया जाएगा।

सिंधु घाटी सभ्यता के जलयान
भारतीय नौसेना का शौर्य संग्रहालय देश का पहला संग्रहालय होगा, जिसमें पांच हजार वर्ष पूर्व भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के शुरुआत में सिंधु घाटी सभ्यता के नगरों हड़प्पा, मोहन जोदड़ो, लोथल आदि में बने जलयानों से लेकर प्राचीन भारत में सातवाहन, गुप्त एवं चोल साम्राज्य तथा मध्यकाल में मराठा साम्राज्य द्वारा गठित नौसेना और मौजूदा भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और जलयानों को प्रदर्शित किया जाएगा। इस संग्रहालय के बनने से पर्यटकों को और ज्यादा घूमने और जानने का मौका मिलेगा।

अक्टूबर में आएंगे उपकरण
भारतीय नौसेना बेड़े में 34 वर्ष तक शामिल आईएनएस गोमती को उत्तर प्रदेश भेजा जाएगा। फिलहाल, आईएनएस गोमती मुंबई में ही है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग और भारतीय नौसेना में एग्रीमेंट हुआ है कि शौर्य संग्रहालय का निर्माण शुरू होने के साथ ही मिसाइल समेत अन्य उपकरणों को लखनऊ लाया जाएगा। सितंबर में कार्य शुरू होने की पूरी संभावना है। ऐसे में अक्टूबर में सभी उपकरणों को मंगाया जाएगा। संग्रहालय में आईएएनएस गोमती के उपकरणों के अलावा नौसेना के सी-किंग हेलीकाप्टर और सी-हैरियर वायुयान को भी प्रदर्शित किया जाएगा। युवाओं को नौसेना संबंधित जानकारी देने के लिए डिजिटल इंटरप्रेटेशन सेंटर का निर्माण भी किया जाएगा।

लखनऊ में शौर्य संग्रहालय बनने से पर्यटन के आकर्षण में विविधता बढ़ेगी। पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
- मुकेश कुमार मेश्राम, प्रमुख सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति