- एक वर्ष बाद बिना क्लास किए सीधे बोर्ड परीक्षा में बैठने से मानसिक तनाव के शिकार हो रहे छात्र

- कई अभिभावक इलाज के लिए अपने बच्चों को लेकर पहुंच रहे सिविल अस्पताल

LUCKNOW: कोरोना संक्रमण की वजह से करीब एक साल तक स्कूलों के बंद रहने और उसके बाद बोर्ड परीक्षा का एलान किए जाने से छात्र तनाव में आ रहे हैं। बिना प्रैक्टिकल व बिना क्लास किए अचानक उन्हें बोर्ड परीक्षा में बैठना पड़ रहा है। कई बच्चे परीक्षा देने से मना कर रहे हैं। अभिभावकों द्वारा दबाव डालने पर रोने लगते हैं। इस तरह के 15-20 मामले एक हफ्ते के दौरान सिविल अस्पताल में सामने आ चुके हैं। इनमें से ज्यादातर बच्चों की उम्र 10 से 16 वर्ष के बीच है।

बच्चों में हो रही है बेचैनी

डॉ। श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल की मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ। दीप्ति सिंह ने बताया कि रोजाना दो तीन बच्चे इस तरह के आ रहे हैं, जिनके अभिभावक बता रहे हैं कि अचानक बोर्ड परीक्षा में बैठाए जाने से उन्हें घबराहट हो रही है। कई बच्चे अनिद्रा के शिकार हैं। बेचैनी व अकेलेपन की समस्या हो रही है। बच्चे चिड़चिड़े हो रहे हैं। भूख नहीं लग रही है या फिर वह टीवी, मोबाइल से चिपके रह रहे हैं। समझाने पर रोने लगते हैं। इसके बाद परेशान होकर अभिभावक उन्हें यहां लाए, तब उनका इलाज शुरू किया गया है। उनकी काउंसि¨लग भी की जा रही है। इससे उन्हें आराम मिल रहा है।

तनाव से ऐसे बचें

डॉ। दीप्ति ने बताया कि करीब एक वर्ष तक स्कूल बंद रहने से बच्चे क्लास व प्रैक्टिकल नहीं कर सके हैं। वह अपने दोस्तों से भी दूर रहे हैं। खेलकूद के लिए भी अपने दोस्तों का साथ नहीं मिल पा रहा है। इसलिए तनाव बढ़ रहा है। अभिभावकों को चाहिए कि मास्क लगाकर उन्हें बाहर घुमाएं, उन्हें दोस्तों से मिलने दें और समझा-बुझाकर परीक्षा जरूर दिलाएं। उनके साथ समय बिताएं। मोबाइल या टीवी उन्हें ज्यादा देर नहीं देखने दें। अगर बच्चे परेशान हों तो उनके दोस्तों से उनकी वीडियो का¨लग करा सकते हैं।