लखनऊ (ब्यूरो)। विधु शेखर ने बताया कि इससे पहले मेरा सेलेक्शन 2018 में भारतीय राजस्व सेवा इनकम टैक्स के लिए हुआ था। मेरी ऑल इंडिया रैंक 173 थी। वर्ष 2019 के एग्जाम में भी सेलेक्शन हुआ था। उसमें आल इंडिया रैंक 191 रही। मैं वर्तमान में नागपुर में नेशनल अकादमी ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस में ट्रेनिंग कर रहा हूं। मैंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीटेक किया है। आईआईटी इलाहाबाद से कैंपस प्लेसमेंट के जरिए एक साल इंजीनियर के पद पर काम करने के बाद नौकर से इस्तीफा देकर सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुट गया।


यूपी में हासिल की थी दूसरी रैंक

मैं ने सिविल सर्विसेज एग्जाम में 64वीं रैंक हासिल की है। मेरे पिता कृष्ण कांत दीक्षित ग्रामीण बैंक में मैनेजर हैं। वहीं माता वीना दीक्षित टीचर हैं। आईएएस बनने का पूरा श्रेय मैं अपनी माता पिता को देती हूं। मैंने इंटर तक अपनी शिक्षालामार्टिनियर कॉलेज से पूरी करने के बाद बीकॉम दिल्ली यूनिवर्सिटी से किया। अभी मैं इसी यूनिवर्सिटी से एमकॉम कर रही हूं। आईएएस में सफलता से पहले मैंने यूपी पीसीएस में दूसरी रैंक हासिल की थी।
शिवाक्षी दीक्षित, 64वीं रैंक

एआरटीओ नहीं अब डीएम बनेंगी अपूर्वा
मेरे पिता दिनेश कुमार त्रिपाठी प्रयागराज में ही ङ्क्षसचाई विभाग में सहायक अभियंता के पद पर तैनात हैं। मां सीमा त्रिपाठी गृहिणी हैं। मेरी स्कूलिंग वाईएमसीए से हुई है। वर्ष 2011 में हाईस्कूल और 2013 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। इंटर के बाद इंजीनियरिंग फील्ड में जाने का फैसला लिया। मैंने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय से 2018 में इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक की उपाधि हासिल की। मैं चाहती थी कि प्रशासनिक सेवा ज्वाइन करूं तो प्रशासनिक सेवा की तैयारी में जुटने का फैसला लिया। मुझे यह सफलता परिवार के सपोर्ट मिली। मैंने सिर्फ आईएएस और पीसीएस परीक्षा की तैयारी पर ध्यान केन्द्रित रखा। ग्रेजुएशन की पढ़ाई के बाद मुझे पहले प्रयास में सफलता मिली। मैंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस परीक्षा क्लीयर कर ली। 2019 में मेरा चयन नायब तहसीलदार के पद पर हुआ। मैं इससे वह संतुष्ट नहीं थी तो पढ़ाई जारी रखने का फैसला लिया। वर्ष 2020 में मेरा सेलेक्शन यूपीपीएससी से एआरटीओ पोस्ट के लिए हुआ। अभी ज्वाइन नहीं किया है। लगातार दो बार सफलता मिलने के बाद भी मेरे मन में आईएएस बनने का सपना जिंदा रहा। तैयारी रखी। फाइनली उन्होंने इसे भी क्लीयर कर लिया है।
अपूर्वा त्रिपाठी, 68वीं रैंक