कोविड काल में लोगों की मदद करने को बनाई 1100 लोगों की संस्था

Meerut। आज ब्लड डोनर-डे है, ऐसे में याद आती है उन लोगों की, जो निस्वार्थ भाव से रक्तदान करके लोगों की जान बचाने में लगे हुए हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं, सोनू शर्मा, जो पेशे से इंटीरियर डिजाइनर हैं, लेकिन जुनून की तरह रक्त दान के माध्यम से लोगों की जान बचाने में जुटे हुए हैं।

11 सौ लोगों की संस्था

मेरठ में जीवन दान फाउंडेशन को खड़ा करने वाले संस्था के अध्यक्ष सोनू शर्मा ने कोविड संकट काल में ही लोगों की मदद करने के लिए एनजीओ का गठन किया। इस संस्थान के माध्यम से बीते सात महीनों में उन्होंने रक्तदान कराकर लगभग 300 मरीजों की जान बचाने में सहायता की है। आज उनकी संस्था से मेरठ से ही 11 सौ सदस्य जुड़ चुके हैं।

2012 से रक्तदान

सोनू बताते हैं कि वह 2012 से लगातार ब्लड डोनेट कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले साल किसी को ब्लड डोनेट करने गए तो उनका चेकअप हुआ तो हीमोग्लोबिन कम पाया गया, इसके चक्कर में वो ब्लड डोनेट नहीं कर पाए तो महिला की जान चली गई, तभी से उन्होंने ठान ली कि अब ऐसा कुछ करना है। जिससे किसी की जान न जाए, ऐसे में उनके संपर्क में जितने लोग थे, उनसे सभी को रक्तदान के लिए संस्था बनाने के बारे में बताया था। फेसबुक के माध्यम से भी प्रचार किया, तो बहुत लोग जुड़े। कई लोगों ने ब्लड डोनेट करने की इच्छा जताई और वे उनकी संस्था से जुड़ते चले गए।

कहीं भी करते हैं मदद

सोनू शर्मा ने बताया कि वह पेशे से इंटीरियर डिजाइनर हैं, लेकिन अब इस काम को भी जुनून की तरह अपना लिया है। वह बताते हैं कि उन्होंने इस कोविड काल में 300 से अधिक लोगों की जान बचाई। ब्लड के अलावा प्लाज्मा और ऑक्सीजन व अन्य सुविधाएं दिलवाने में भी लोगों की मदद की। उनकी संस्था में 30 महिलाएं भी शामिल हैं। वह आने वाले समय में कई ब्लड डोनेशन कैंप लगाने की योजना भी बना रहे हैं।

रेडक्रॉस में जुड़े हैं 4000 से ज्यादा लोग

भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी, मेरठ के उप संरक्षक सरजबजीत कपूर ने बताया कि हर साल उनकी संस्था के माध्यम से 5-6 कैंप लगते हैं। 1000 यूनिट तक ब्लड एक कैंप में मिल जाता है। संस्था में इस समय 4776 सदस्य हैं। संस्था की पहल से हर साल लगभग 300 लोगों को रक्त की मदद की जाती है। संस्था के सहायक लिपिक धीरेंद्र कुमार ने बताया कि इस संस्था से मेरठ में कोविड-19 में करीब 100 लोगों की जान संस्था के माध्यम से बची है।