मेरठ (ब्यूरो)। रोजाना लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैैं। जिसके चलते हर तरफ से आवार कुत्तों पर लगाम और पालतू कुत्तों के रजिस्ट्रेशन की मांग उठने लगी है। मगर पालतू कुत्तों के मालिक नगर निगम में आकर रजिस्टे्रशन कराने को लेकर कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस कारण लंबे समय से फेल हो रहा नगर निगम अब पालतू कुत्तों की निगरानी के लिए डॉग मोबाइल ऐप तैयार करने जा रहा है। इस ऐप के जरिए न सिर्फ कुत्तों का रजिस्ट्रेशन घर बैठे हो सकेगा बल्कि उनके वैक्सीनेशन और ब्रीडिंग सेंटर्स भी रजिस्टर्ड किए जा सकेंगे। इसके साथ ही कुत्ता कहां से खरीदा और कहां बेचा, इसकी जानकारी पर मालिक को ऐप पर साझा करनी होगी। वहीं, ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी।

डॉग ऐप से निगरानी
अब इस स्थिति को सुधारने और पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन बढ़ाने के लिए डॉग ऐप लांच करने की तैयारी की जा रही है। इस ऐप के माध्यम से पालतू कुत्ते के रजिस्ट्रेशन से लेकर वैक्सीनेशन तक की पूरी डिटेल जारी की जाएगी। ऐप में रजिस्ट्रेशन के दौरान डॉग ब्रीडिंग को लेकर भी पूरी डिटेल देनी होगी। इसके लिए शहर में पालतू कुत्तों की एक्यूरेट संख्या जानने के लिए नगर निगम ने सर्वे भी शुरू कर दिया है।

42,466 डॉग बाइट के शिकार
बीते एक साल में जिले में 42 हजार 466 से अधिक लोग डॉग बाइट के शिकार हो चुके हैैं। खास बात यह है कि यह आंकड़ा सिर्फ सरकारी अस्पतालों में रैबिज वैक्सीन के लिए आने वाले मरीजों का है, जबकि प्राइवेट अस्पताल में जाने वाले मरीजों की संख्या तो इससे भी दोगुनी हो सकती है।

117 लोग रोजाना शिकार
पीएल शर्मा जिला अस्पताल में बीते एक साल यानि 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2022 तक कुत्तों ने 42 हजार 466 लोगों को काटा है। यानी हर रोज करीब 117 लोग कुत्तों का शिकार हो रहे हैं। ये आंकड़ा सिर्फ पीएल शर्मा जिला अस्पताल का है। वहीं, निजी अस्पतालों में जाने वाले मरीजों की तो उनकी संख्या तो लाखों में हो सकती है, लेकिन उनका कोई रिकार्ड दर्ज नही किया जाता है।

गलियों में बढ़ रही संख्या
वहीं आवारा कुत्तों से शहर के लोगों की सुरक्षा के लिए नगर निगम स्तर पर नसबंदी का प्रयास भी नाकाफी साबित हो रहा है। सालभर में मात्र साढ़े आठ हजार कुत्तों की नसबंदी की गई है। जबकि नगर निगम के अनुसार क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या करीब 12 लाख के आसपास है।

नई एसओपी तैयार
पालतू कुत्ते के कारण पड़ोसी या अन्य को किसी भी तरह की परेशानी या डॉग बाइट का शिकार न होना पड़े इसलिए शासन ने पालतू कुत्तों को लेकर नई आदर्श कार्रवाई प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की है। इसके तहत बकायदा पालतू कुत्ते के मालिकों को रजिस्ट्रेशन के समय एक शपथ पत्र देना होगा। मगर अभा इसका नोटिफिकेशन जारी होना बाकी है।

शपथ पत्र प्रक्रिया अटकी
नगर निगम शपथ पत्र की इस व्यवस्था को शहर में लागू करने में विफल साबित हो रहा है क्योंकि यहां पालतू कुत्तों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ही सालभर से अधर में चल रही है। नगर निगम के अनुसार उसके क्षेत्र में पालतू कुत्तों की संख्या करीब सात से आठ लाख है लेकिन रजिस्ट्रेशन के नाम पर गत वर्ष सिर्फ 180 पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन हो पाया है।

रजिस्ट्रेशन कैंप की योजना
इसके साथ ही पालतू कुत्तों के रजिस्ट्रेशन के लिए कैंप लगाने की योजना है। लेकिन अभी तक रजिस्ट्रेशन कैंप की योजना अधर में है। यह योजना भी पालतू कुत्तों को लेकर शासन से जारी होने एसओपी के चक्कर में अटकी पड़ी है।

ब्रीडिंग सेंटर रजिस्टर्ड नहीं
वहीं शहर में विदेशी नस्ल के पालतू कुत्तों के ब्रीडिंग सेंटर बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं। इन सेंटर्स के रजिस्टे्रशन का निगम में नियम है लेकिन न तो ब्रीडिंग सेंटर्स की संख्या निगम के पास है और न ही इन सेंटर्स का रजिस्ट्रेशन हुआ है। जबकि नगर निगम बोर्ड ब्रीङिंग सेंटर व डॉग क्लीनिक की रजिस्ट्रेशन शुल्क की दरें स्वीकृति कर चुका है।

इन नियमों की हो रही अनदेखी
तीन माह से अधिक आयु के पालतू कुत्ते का नगर निगम में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है।

रजिस्ट्रेशन वैध रहते यदि एंटी रैबीज वैक्सीनेशन की वैधता खत्म हो जाती है तो रजिस्ट्रेशन अपने आप निरस्त हो जाएगा।

पालतू कुत्तों के पंजीकरण की दो श्रेणियां होंगी। नान ब्रीडिंग और ब्रीडिंग श्रेणी।

देशी नस्ल के पालतू कुत्ते का रजिस्ट्रेशन नि:शुल्क होगा।

नसबंदी केंद्र पर नसबंदी व प्रथम एंटी वैक्सीनेशन भी नि:शुल्क होगा।

पालतू कुत्ते के नस्ल, लिंग, रंग, एंटी रैबीज वैक्सीनेशन की तिथि व प्रमाण पत्र की जानकारी रजिस्ट्रेशन के व1त देनी पड़ेगी।

प्रथम बार रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने पर शपथ पत्र देना होगा।

200 वर्ग गज तक के आवास में रहने वाले पशु स्वामी दो कुत्तों से ज्यादा का रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकेंगे।

पांच या इससे अधिक कुत्ते पालने पर पालतू कुत्ते का शेल्टर हाउस बनाना पड़ेगा।

पालतू कुत्तों के रजिस्ट्रेशन के लिए डॉग ऐप लांच करने की तैयारी की जा रही है। बोर्ड बैठक में एसओपी के अनुसार नए नियमों का पालन कराने के लिए योजना स्वीकृत कराई जाएगी।
हरपाल सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी