-आचार्य जय प्रकाश के नेतृत्व में वैदिक रीति से तीन दिनों तक हुआ पूजन

-पीएम व बनारस के सांसद ने यजमान की तरह विधिवत की पूजा

पांच सौ सालों के लंबे संघर्ष के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमि पूजन किया। भूमि पूजन कराने का सौभाग्य काशी के आचार्यो को मिला। आचार्य जय प्रकाश त्रिपाठी के नेतृत्व में काशी के ब्राह्माणों ने तीन दिनों तक वैदिक रीति से गणेश पूजा से लेकर भूमि पूजन तक कराया। अयोध्या में भूमि पूजन कराने की मुख्य जिम्मेदारी सांगवेद महाविद्यालय (रामघाट) के वरिष्ठ आचार्य लक्ष्मी कांत दीक्षित 'घनपाठी' को करीब चार महीने पहले ही सौंपी गई थी। अस्वस्थ्य होने के कारण उन्होंने यह जिम्मेदारी अपने वरिष्ठ शिष्य जय प्रकाश त्रिपाठी को सौंप दी। जय प्रकाश ने बताया कि अयोध्या में भूमि पूजन का अनुष्ठान तीन दिनों तक चला।

एक हजार लड्डू से हुआ गणेश पूजन

भूमि पूजन की शुरुआत तीन अगस्त को गणेश पूजन से हुई। एक हजार लड्डू से करीब पांच घंटे तक गणेश पूजन हुआ। साथ ही बड़ी देव काली और छोटी देव काली मंदिर में भी पूजा-अर्चना हुई। इस क्रम में दूसरे दिन चार अगस्त को अयोध्या के आचार्यो ने करीब सात घंटे राम अर्चक किया। वहीं काशी के आचार्यो ने करीब तीन घंटे तक वास्तु पूजन किया। मुख्य भूमि पूजन की कार्यक्रम बुधवार को भी काशी के आचार्यो ने ही संपन्न कराया। प्रधान शिला के पूजन के पश्चात अष्ट उपशिला का पूजन किया गया। इसके पश्चात प्रभु श्रीराम की कुलदेवी के पूजन के साथ ही सभी देवियों का पूजन किया गया।

सहज भाव में दिखे पीएम

मुख्य आचार्य जय प्रकाश ने बताया कि भूमि पूजन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी बहुत ही सहज भाव में दिखे। वह एक सामान्य यजमान की भांति पितांबरी (सिल्क की धोती व कुर्ता) पहने हुए थे। यही नहीं एक सच्चे भक्त की भांति विधिवत पूजा-अर्चना की। पूजा संपन्न होने के बाद उन्होंने कछुआ आकार की एक डिबिया भी चढ़ाया। फिलहाल इस डिब्बी को खोला नहीं गया है। इसमें चांदी का कछुआ होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जय प्रकाश के नेतृत्व में पूजा कराने वालों में आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित के पुत्र अरूण दीक्षित, गजानन ज्योतकर, नारायण उपाध्याय भी शामिल रहे। वहीं काशी से भूमि पूजन में शामिल होने वाले आचार्यो में काशी विद्वत परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो। रामचंद्र पांडेय, मंत्री डॉ। राम नारायण द्विवेदी व संगठन मंत्री प्रो। विनय पांडेय भी मौजूद रहे। भूमि पूजन में वाराणसी व अयोध्या बनारस से 21 आचार्य शामिल हुए।