-व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) हुए हाथी के दांत

-स्पीड व लोकेशन के लिए रोडवेज बसों में लगा वीटीएस नहीं कर रहा काम

-दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम को कहीं गायब तो किसी टूटा मिला तार

-स्पीड लिमिट तोड़ने से आएदिन हो रहा है एक्सीडेंट

50 से 75 किमी प्रति घंटा के हिसाब से बसों की स्पीड निर्धारित है लंबी दूरी पर

60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार निर्धारित है सिटी के बाहरी रूटों पर

20 किलोमीटर प्रति घंटा बसों का संचालन होना चाहिए शहर के अंदर

रोडवेज में स्पीड की लिमिट फिक्स होने के बाद भी बसें अनकंट्रोल्ड दौड़ रही हैं। इसके चलते आए दिन एक्सिडेंट हो रहे हैं। वहीं इन बसों में सवार पैसेंजर्स की जान भी खतरे में पड़ जा रही है। हादसे के शिकार हो वे घायल भी हो रहे हैं। जबकि रोडवेज प्रशासन की ओर से स्पीड पर नजर रखने के लिए बसों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) लगाए गए हैं। लेकिन ये हाथी के दांत बने हुए हैं। कई बसों में तो यह सिस्टम लगा भी नहीं है। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम ने जब इसकी पड़ताल की तो कई चौकाने वाली तस्वीरें सामने आई।

सीन-1

वाराणसी से लखनऊ के लिए प्रस्थान करने के लिए रोडवेज बस प्लेटफॉर्म पर लगी बस नंबर यूपी 78 डीएन 8873 में आई नेक्स्ट टीम ने जब ड्राइवर से वीटीएस से जुड़ी जानकारी मांगी तो वो बगले झांकने लगा। वो बस में वीटीएस बॉक्स खोजने लगा। इसके बाद भी वह दिखा नहीं पाया।

सीन-2

टीम को वाराणसी से प्रयागराज के लिए सवारी बैठा रही बस नंबर यूपी 65 सीटी 3884 में भयावह तस्वीर दिखी। इस बस में बैटरी वाले बाक्स में वीटीएस रखा हुआ था। वह काम करता है या नहीं यह ड्राइवर बता नहीं पाया।

सीन-3

रोडवेज बस प्लेटफॉर्म पर प्रयागराज के लिए प्रस्थान करने वाली अनुबंधित बस नंबर यूपी 66 टी 5221 में तो टीम को वीटीएस मिला लेकिन उसका तार टूटा हुआ था। जिससे बस की स्पीड का पता लगाना मुश्किल होगा।

सीन-4

रोडवेज बस प्लेटफॉर्म पर ही टीम को पैसेंजर लोड कर रही बस नंबर यूपी 78 एफटी 6919 में भी वीटीएस प्रॉपर कार्य करता हुआ नहीं मिला। ड्राइवर के सामने डैशबोर्ड के कोने में यह बॉक्स रखा हुआ था। इसमें भी तार प्रॉपर जुड़ा हुआ नहीं मिला।

स्पीड एट द रेट ऑफ 60 किमी

रोडवेज की ओर से बसों की स्पीड 60 किमी प्रतिघंटा तय की गई है। सभी बसों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम यानी वीटीएस लगाए गए हैं। इसको बसों में इंस्टाल करने के पीछे उनकी स्पीड और लोकेशन को ट्रेस करना है। और जरूरत पड़ने पर कंट्रोल करना है। हालत यह है कि कैंट बस स्टेशन से संचालित होने वाली सिर्फ कुछ बसों में ही सिस्टम लगा हुआ है। जबकि अधिकतर बसेस में यह खराब पड़ा हुआ है। ऐसे में बस की स्पीड का पता नहीं चलता और स्पीड अनलिमिटेड हो जाती है। ऐसे में आएदिन हादसे हो रहे हैं। इसपर रोडवेज एडमिनिस्ट्रेशन चुप्पी साधे हुए है।

लोकेशन मिलना मुश्किल

रोडवेज में बसों पर नजर रखने के लिए वीटीएस कंट्रोल रूम बनाया गया है। यहां से बसों की स्पीड सहित लोकेशन की मॉनीटरिंग की जाती है। लेकिन बसों में प्रॉपर वीटीएस के न लगने की वजह से कंट्रोल रूम का मकसद पूरा नहीं हो पा रहा है। ऐसे में ड्राइवर मनमाने स्पीड पर बसों को ड्राइव कर रहे हैं। जबकि निर्धारित स्पीड 60 किलोमीटर प्रति घंटा है। स्पीड का पालन न होने की वजह से हादसों की संख्या में इजाफा हो रहा है।

ताकि अधिक से अधिक मिले नंबर

एक तरफ रोडवेज की बसों के ड्राइवर अपनी कमी छिपाने के लिए वीटीएस को प्रॉपर नहीं चलने देते तो अनुबंधित बसों की अलग कहानी है। वो इसलिए बस में वीटीएस को नहीं चाहते कि स्पीड के फेर में कहीं उनका नंबर कट न जाए। उनका मानना है कि अधिक से अधिक फेरे लगाने पर ही फायदा होगा। ऐसे में वो निर्धारित स्पीड पर नहीं चलना चाहते।

स्पीड लिमिट तोड़ने से हादसे

रोड पर बेतहाशा स्पीड से बस चलाने के कारण अक्सर हादसे हो रहे हैं। लॉकडाउन के बाद से बसों का संचालन होने पर कई एक्सिडेंट हो चुके हैं। जिसमें कई लोग घायल हो चुके हैं तो कई अस्पताल पहुंच चुके हैं। लगभग सभी हादसों में एक ही बात कामन होती है, वह अनकंट्रोल्ड स्पीड है।

यह है वीटीएस लगाने का मकसद

-बस की स्पीड व लोकेशन के लिए लगाया गया है व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम

-कंट्रोल रूम से इसे आधुनिक साफ्टवेयर के थ्रू जोड़ा गया है

-इस सिस्टम को बस ड्राइवर की सीट के बगल में छिपाकर रखा जाता है

-सिस्टम को छिपाने के पीछे ड्राइवर की जानकारी से दूर रखना है

-जीपीएस की तरह है वीटीएस

-इस सिस्टम में मोबाइल सिम कार्ड लगा इलबिल्ड होता है

-खास सिम कार्ड सिर्फ लोकेशन और ओवर स्पीड के लिए होता है

-इससे कॉल संभव नहीं है

-सिम के थ्रू कंट्रोल रूम से कनेक्ट किया जाता है

-वीटीएस को बस के स्पीड मीटर से कनेक्ट कर दिया जाता है

-सिस्टम के थ्रू बस की स्पीड के साथ पल पल लोकेशन को कंट्रोल रूम से देखा जाता है

-पलक झपकते ही स्पीड व लोकेशन को ट्रेस किया जा सकता है

सिटी में 20 किमी प्रतिघंटा

बसों के लिए अलग अलग रूट पर स्पीड निर्धारित है। लांग रूट पर 50 से 75 किमी प्रति घंटा के हिसाब से बसों की स्पीड निर्धारित है। सिटी के बाहर के रूटों पर 60 किलोमीटर प्रति घंटा तो वहीं शहर के अंदर 20 किलोमीटर प्रति घंटा बसों का संचालन होना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं होता है। शहर में भी 40 से 50 किमी प्रतिघंटे की स्पीड से बसें चलती हैं।

स्पीड व लोकेशन के लिए ही बसों में वीटीएस लगाया गया है। बसों में सिस्टम की जांच करायी जाएगी। यदि प्रॉपर कार्य करता हुआ नहीं पाया गया तो कार्रवाई होगी।

एसके राय, आरएम रोडवेज, वाराणसी रीजन