वाराणसी (ब्यूरो)8 मार्च यानि आज इंटरनेशनल वूमेंस डे सेलिब्रट किया जाता हैआज के खास मौके पर हम आपको बताएंगे कि आखिर कैसा सपोर्ट महिलाएं अपने परिवार और समाज से चाहती हैंहम सब हमेशा कहते हैं कि महिलाएं आगे बढऩा चाहती हैं और आत्मनिर्भर बनना चाहती हंै, लेकिन समाज उनके पैरों में बेडिय़ां डालता है व उनकी तरक्की को रोकता हैहालांकि यह पूरी तरह से सच नहीं हैमहिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में घर-परिवार का पूरा सपोर्ट रहता हैपरिवार के सपोर्ट से महिलाओं ने हर सेक्टर में जीत हासिल की हैअगर परिवार के पुरुष सदस्य हर छोटे-बड़े काम में महिलाओं को सपोर्ट न करें तो उनका मंजिल तक पहुंचना काफी कठिनाई भरा हो सकता है, पर अब समाज व परिवार की सोच अब बदल रही हैवह महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए हर मुमकिन प्रयास भी करते हंै.

घरवाले साथ तो समाज भी साथ

निधि पांडे न सिर्फ आज खुद के पैरों पर खड़ी हैं बल्कि गरीब बच्चों को पढ़ाती भी हंैनिधि को आगे बढ़ाने में उनके परिवार का पूरा सपोर्ट रहा हैआज वह एक अच्छी जॉब भी करती हंैवह कहती हंै कि महिलाएं सपने देख रही हैं तो उन्हें पूरा करने का रोडमैप भी बना रही हैंउनकी इच्छा और क्षमता देखकर पति, घर के अन्य सदस्य व समाज किसी भी तरह के तर्क देकर पैरों में बेडिय़ां नहीं डाल रहे और जब घरवाले साथ हों तो समाज भी साथ हो जाता हैवहीं जब परिवार हमारा साथ देता है तो फिर हमें किसी और व्यक्ति का डर नहीं रहता हैअब भी कुछ महिलाएं ऐसी हंै जो अपने हक के लिए लड़ नहीं पाती हैंउन्हें अपने अधिकारों को समझना होगा, तभी वह अपने सपनों को पूरा कर पाएंगी.

महिलाएं खुद को कितना दे रहीं अधिकार

कंचन सिंगल पैरेंट हैंहेल्थ एंड एजूकेशन नाम से अपना एनजीओ चलाती हैंवह कहती हैं कि महिलाओं को दूसरों से अधिकार लेने से पहले यह सोचना चाहिए कि वह खुद को कितना अधिकार दे रही हैंमहिलाएं अपने परिवार की जरूरतें पूरी करते हुए अपने सपनों व अधिकारों को भूल जाती हंैखुद पर ध्यान देने के लिए उनके पास समय ही नहीं हैअपने सपनों को वह कहीं दफन कर देती हैंइसलिए पहले महिलाएं खुद को अधिकार दें और अपने सपनों को जीएंतब ही वह आगे बढ़ सकती हैंकंचन बताती हैं कि उन्होंने जो पढऩा चाहा, उनके माता-पिता ने उन्हें वह पढ़ाई कराई हैदूसरी ओर उन्होंने यह कभी नहीं सोचा कि मेरी बेटी घर के काम तक ही सीमित हैसमाज के लोग भी जब उनसे कहते थे कि बेटी को कितना पढ़ाओगे, तो कई बार सुनकर परेशान हो जाती थीपर मेरे माता-पिता ने मुझे हमेशा हौसला दियाइस कारण आज मैैं अपने पैरों पर खड़ी हूं

चाहिए मेंटली सपोर्ट

श्वेता अपना स्कूल चलाती हैंवह कहती हैं कि आज की महिला को उड़ान भरनी है तो अपने अधिकारों को सबसे पहले समझना होगा तभी समाज में वह खुद को इस्टैब्लिश कर पाएंगीश्वेता ने जब अपने करियर की शुरुआत की तो उन्हें उनके परिवार से मेंटली सपोर्ट बहुत मिलावह कहती हैं कि मैैं काम पर फोकस कर पाऊं, इसलिए वह मेरे घर के कामों पर भी हाथ बटांते थेमैंने ऑफिस में पूरा दिन क्या कार्य किया है, उसको भी सुनते थेइससे मुझे मेंटली काफी सपोर्ट मिला.

सोशल मीडिया पर महिलाओं ने रखी बात

सोशल मीडिया पर भी महिलाओं ने अपनी बात रखीदीप्ती कहती हैं कि महिलाओं को मेंटली सपोर्ट नहीं मिल पाता है जिस कारण वह कहीं न कहीं अपने आपको वीक समझती हैंवहीं कोई उनको समझने वाला हो तो महिलाओं को और कुछ नहीं चाहिएवह सब हासिल कर सकती हैंकशिश ने लिखा है कि बेटियों को घर तक ही सीमित न समझेंआज की बेटी हर सेक्टर में अपना नाम रोशन कर रही हैंबेटियों को भी अपने अधिकारों के बारे में जानकारी होनी चाहिएतभी वह समाज में अपने आपको स्थापित कर पाएंगी.

महिलाएं जानें अधिकार

महिलाओं के पास अधिकार हैं, जो विभिन्न तरीकों से उनकी रक्षा करते हैं जैसे कि शिक्षित होने का अधिकार, वोट देने का अधिकार, संपत्ति रखने का अधिकार और ऐसे कई अधिकारइन अधिकारों के बाद भी दुनिया के विभिन्न हिस्सों में महिलाएं और लड़कियां अभी भी जेंडर के आधार पर भेदभाव का शिकार हैंइस भेदभावपूर्ण व्यवहार को कई तरीकों से देखा जा सकता है, जैसे पुरुष समकक्षों की तुलना में कम वेतन, उनके शिक्षा अधिकारों को रोकना, अपर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल और सूची बढ़ती जाती हैसाथ ही महिलाओं के अधिकारों की आवश्यकता आती है, यानी ऐसे अधिकार जो महिलाओं को उन सभी अन्यायों से बचाने में मदद कर सकते हैं जिनका वे सामना कर रही हैं.