वाराणसी (ब्यूरो)अब एसएस हॉस्पिटल बीएचयू में दिल के रोगियों को इलाज कराने के लिए बेड के अभाव में इंतजार या प्राइवेट हॉस्पिटल में जाकर इलाज कराने की जरूरत नहीं पड़ेगीक्योंकि यहां इनके लिए पर्याप्त बेड उपलब्ध करा दी गई हैआईएमएस डायरेक्टर एसएन शंखवार ने हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष प्रोओमशकर की मांग को मानते हुए हॉस्पिटल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के फोर्ड फ्लोर पर बने 90 बेड के वार्ड को हार्ट पेशेंट के लिए हैंडओवर कर दियासाथ ही फिफ्थ फ्लोर पर बने ओटी को भी दे दिया गयाइसी के साथ पिछले तीन साल से बीएचयू के कॉर्डियोलॉजी डिपार्टमेंट और एमसस के बीच चल रही खींचतान का शुक्रवार को अंत हो गयाडॉयरेक्टर से हस्तक्षेप के बाद अब इसी ब्लॉक में पूरा कॉर्डिक डिपार्टमेंट संचालित किया जाएगा, जबकि पुरानी बिल्डिंग में चल रहे वार्ड को अन्य डिपार्टमेंट को हैंडओवर कर दिया जाएगा.

अनशन को किया स्थगित

बता दें कि अस्पताल के हृदय रोग विभाग में 41 बेड डिजिटल लॉक होने और मरीजों की भर्ती न होने के विरोध में प्रोओमशंकर ने आठ मार्च से कुलपति आवास पर अनशन करने का निर्णय लिया था, जिसके बाद बीएचयू प्रशासन में खलबली मच गईमामला तूल पकड़ता देख गुरुवार को आईएमएस बीएचयू के अधिकारी सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक (एसएसबी) पहुंचेआईएमएस निदेशक प्रोएसएन संखवार ने मेडिसिन फैकल्टी के डीन प्रोअशोक कुमार के साथ एसएसबी के चौथे ब्लॉक पर बंद वार्ड और उसमें लंबे समय से खाली पड़े बेड को देखाइसके बाद हृदय रोग विभागाध्यक्ष प्रोओमशंकर से बातचीत कर समस्या का समाधान कराने की बात भी कहीशुक्रवार को डायरेक्टर और विभागाध्यक्ष के बीच करीब 5 घंटे की बैठक के बाद सभी मांगें मान ली गईदो विभागों के बीच चल रही लड़ाई का अंत मांगे मान लिए जाने के बाद विभागाध्यक्ष ने अपना अनशन स्थगित कर दिया.

डेली 500 मरीज

यहां डेली यहां करीब 500 दिल के मरीज इलाज के लिए आ रहे हैंकार्डियक डिपार्टमेंट के आंकड़ों की माने तो पिछले दो साल में यहां आने वाले 35 हजार से ज्यादा मरीजों को बेड नहीं मिलाइससे इसमें तीन हजार से ज्यादा लोगों को इलाज के अभाव में मौत हो गईइन सब के बाद भी बीएचयू प्रबंधन और जिम्मेदारों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा था

अब 90 बेड के वार्ड में मरीजों का इलाज किया जाएगामांगें मान लिए जाने के बाद अनशन स्थगित कर दिया है, लेकिन एमएस को हटाने का उनका विरोध आगे भी जारी रहेगाजीत सत्य की हुई हैअगर मैं गलत होता तो मेरी बात कभी नहीं मानी जाती.

प्रोओमशंकर, हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष, बीएचयू