वाराणसी (ब्यूरो)पहले तो ओटीटी (ओवर द टॉप) ने टॉकीज और बड़े पर्दे की वाट लगाई और करीब दो माह से आईपीएल और चुनाव ने बॉलीवुड फिल्मों का गणित बिगाड़ रखा हैकहने को हर शुक्रवार फिल्में रिलीज होती हैं, लेकिन 10 अप्रेल के बाद से कोई बड़ी फिल्म रिलीज नहीं हुईइसकी मार सिंगल स्क्रीन थियेटर के साथ मल्टीप्लेक्सेस पर भी दिख रही हैवाराणसी में हाइटेक एरा में वैसे ही 20 सिनेमाघर बंद चल रहे हैंथिएटर संचालकों ने सोचा था कि चुनाव के दौरान नयी फिल्में रिलीज होंगी, लेकिन एक भी फिल्में पर्दे पर न लगने से थिएटर संचालकों के उम्मीदों पर पानी फिर गयाफिलहाल अब दर्शकों को धमाकेदार पिक्चर के लिए दो महीने का इंतजार करना पड़ेगाचुनाव का रिजल्ट डिक्लेयर होने के बाद ही पर्दे पर नयी फिल्में आने की उम्मीद है.

वेब सीरीज खतरे की घंटी

सिंगल स्क्रीन थिएटर का किसी दौर में जलवा हुआ करता थाइसमें फिल्में देखने का बाकायदा परिवार में शेड्यूल तय होता तो युवा भी ग्रुप बनाकर सिनेमा देखने पहुंच जातेफस्र्ट डे-फस्र्ट शो और टिकट के लिए मारामारी तक होती थी, लेकिन वेब सीरीज ने इस मार्केट पर करारा प्रहार कियामल्टीप्लेक्स ने इस झटके को संभालने का प्रयास जरूर किया, लेकिन अनसेंसर्ड वेब सीरीज उनके लिए खतरे की घंटी से कम नहींआने वाले दिनों में कुछ गिनी-चुनी फिल्म कंपनियां रह जाएंगी.

20 थिएटर बंद

दो दशक पहले सिटी में 20 सिनेमाघर चलते थेइन सिनेमाघरों में सुपरहिट फिल्में लगती थींहर मार्ग पर एक सिनेहाल होता था, जिसमें चाहे टिकट खरीदकर लोग सिनेमा देख लेते थेलेकिन ओटीटी, वेब सीरीज, यूट्यूब और डिजिटल प्लेटफार्म के लोग ऐसा दीवाने हुए कि धीरे-धीरे सिनेमाघर बंद होने लगेआज सिटी के 20 सिनेमाघर बंद चल रहे हैंबंद सिनेमाघर में प्राची, मजदा, साजन, लक्ष्मी, अभय, यमुना, शिल्पी, नटराज, छविमहल, मजदा, सुशील, कामाक्षी, आनंद, गंगा पैलेस प्रमुख हैं

1951-52 में पहला सिनेमाघर

सिनेमा एक्जीवेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक जैन ने कहा, बात 1951-52 की हैजब शहर में प्रदेश का पहले एसी सिनेमा हॉल ने आकार लियालगभग 650 सीटों वाला यह हॉल कन्हैया चित्र मंदिर का नया रूप थाइसके बाद राधा चित्र मंदिर, जमुना, आनंद मंदिर, गुंजन, पद्मश्री व मुकुंद मिनी थिएटर धड़ाधड़ खुलने लगेबाद में दूर होते दर्शकों की वजह से एक-एक कर राधा, जमुना, गुंजन, पद्मश्री, मुकुंद, मजदा और प्रकाश भी बंद होते गएदीपक व कन्हैया ने शॉपिंग मॉल का चोला पहन लिया है.

मल्टी स्क्रीन कल्चर

दर्शकों का मूड माहौल समझते हुए 2006 में आइपी सिगरा के साथ मल्टीस्क्रीन कल्चर का आरंभ हुआइसमें कन्हैया चित्र मंदिर ने केसीएम का रूप लिया तो सरस्वती पीवीआर हो गयाछावनी क्षेत्र में जेएचवी और आईपी विजया ने भी नए माडर्न सिने कल्चर को बढ़ावा दिया, लेकिन समय के बदलाव के साथ अब ओटीटी कांसेप्ट ने मॉल में भी लोगों के मूवमेंट को कम कर दिया हैवरिष्ठ कारोबारी मोहन लाल सरावगी का कहना है कि अब मॉल में पहले जैसी फिल्में नहीं लगतींमदर इंडिया, बागवान जैसी अब फिल्में नहीं आती हैंअब तो मसालेदार कंटेंट वाली फिल्में ज्यादा आती हैं, जिसे यूथ पसंद करते हैयही वजह है कि धीरे-धीरे मॉल से भी लोगों की दिलचस्पी खत्म होती जा ही है.

जून में आने वाली फिल्में

पुष्पा पार्ट-2

भैया जी

करतम-भुगतन

फैक्ट एंड फीगर.

20 बंद सिनेमा हॉल बंद चल रहे हैं

4 मॉल में मल्टीप्लेक्स संचालित

1 सिनेमाघर में लगती है भोजपुरी फिल्म

पहले जैसी फिल्में अब मॉल में देखने को नहीं मिलती हैंतड़क-भड़क वाली फिल्में से लोगों का मोहभंग हो चुका हैबागवान, मदर इंडिया, नदिया के पार जैसी फिल्में अब नहीं बनती हैं.

मोहनलाल सरावगी, वरिष्ठ व्यापारी नेता

नई मूवी बहुत कम लग रही हैंअब तो मोबाइल पर ही ओटीटी प्लेटफार्म के जरिए पिक्चर डाउनलोड कर देख लेते हैं.

गौरव जायसवाल, चेतगंज

शहर के चार मॉल में पिक्चरें लगती हैं, लेकिन जब एग्जाम, इलेक्शन या फिर आईपीएल चल रहा होता है तो लोगों का मूवमेंट कम हो जाता है.

दीपक जैन, अध्यक्ष सिनेमा एग्जीवेटर एसोसिएशन

मॉल में पिक्चर लग रही हैंइस समय चुनाव व आईपीएल की वजह से भीड़ कम हैचुनाव के बाद जब नयी पिक्चरें आएंगी तो मूवमेंट बढ़ेगा.

मनीष तलवार, सचिव, सिनेमा एग्जीवेटर एसोसिएशन