-सावन के पहले सोमवार की तैयारी हुई पूरी, बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर को फूलों से सजाया गया

-बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में मत्था टेकने के लिए देर रात से लगी लाइन

-मंदिर, पुलिस व जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के लिए कसा कमर

लंबे जिच के बाद सावन महीने की शुरुआत हो गयी। पहले दिन रविवार को सुबह से ही श्रद्धालु विभिन्न शिव मंदिरों में पहुंचकर दर्शन पूजन किया। जिससे मंदिर में रौनक लौट आयी। इस दौरान मंदिर परिसर हर हर महादेव के जयकारे से गूंजता रहा। उधर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में तड़के मंगला आरती के बाद दर्शनाíथयों ने बाबा का जलाभिषेक किया और मत्था टेका। वहीं सावन के पहले सोमवार पर बाबा की एक झलक पाने के लिए रात से ही लाइन में लग गए। हालांकि मंदिर, पुलिस व जिला प्रशासन की ओर से इस साल खास इंतजाम किया गया है।

स्टील की बैरिकेडिंग से कारपेट तक

प्रत्येक साल की तरह इस वर्ष भी सावन को लेकर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर को एक दिन पहले ही तरह तरह के फूलों व झालरों से सजा दिया गया। देर शाम तक सोमवार की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहली बार बल्ली की जगह स्टील की बेरिकेडिंग की गयी है। जिससे होकर श्रद्धालु बाबा दरबार तक जाएंगे। बांसफाटक से चौक की ओर इस बार बांस बल्ली की जगह स्टील की बेरिकेडिंग से होकर भक्त दर्शन को मंदिर तक जाएंगे। बेरिकेडिंग के बीच में लाल कारपेट भी बिछाया जाएगा। वहीं कारपेट पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए गोले भी बनाए गए हैं।

मास्क वालों को ही एंट्री

कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए सभी श्रद्धालुओं को मास्क पहनना अनिवार्य होगा। बिना मास्क वालों को मंदिर में एंट्री नहीं दी जाएगी। सभी भक्तों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी करना होगा। मैदागिन की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को गेट नंबर चार छत्ताद्वार होते हुए चौक भेजा जाएगा। श्रद्धालुओं को गेट-ए से प्रवेश करने के बाद गर्भगृह के पूर्वी प्रवेश द्वार पर जल चढ़ाने की व्यवस्था दी गयी है। वहीं बांसफाटक से ढुंढिराज गली होकर आने वाले श्रद्धालु मंदिर परिसर के गेट-डी से प्रवेश पाएंगे और गर्भगृह के पश्चिमी द्वार से दर्शन व जलाभिषेक कर सकेंगे। सरस्वती फाटक की ओर से आने वाले श्रद्धालु गर्भगृह के दक्षिणी द्वार और वीआईपी, वीवीआईपी व सुगम दर्शन के टिकटधारी गेट-सी से प्रवेश कर गर्भगृह के उत्तरी द्वार से दर्शन करेंगे।

हर छह घंटे पर मंदिर होगा सेनेटाइज

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल, पेन, घड़ी, पेन ड्राइव आदि लेकर मंदिर में न आएं। इससे दर्शन में परेशानी होगी। मंदिर परिसर में किसी विग्रह, दीवार या रेलिंग को स्पर्श करने से बचें। मंदिर परिसर को हर छह घंटे पर सेनेटाइज किया जाएगा। आपात स्थिति के लिए डॉक्टर और एनडीआरएफ की टीम भी तैनात रहेगी। पेयजल से लेकर खोया पाया केंद्र, पब्लिक एड्रेस सिस्टम भी लगाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए टॉयलेट बनवाया गया है।

10 यादव बंधु करेंगे जलाभिषेक

बनारस के यादव समाज के लोग हर साल बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इस साल बाबा का जलाभिषेक करने के लिए जिला प्रशासन ने दो संगठनों को परमिशन दिया है। जिसमें यादव समाज के पांच मेंबर व गोप समिति के पांच मेंबर शामिल रहेंगे। ये लोग अलग अलग जगहों से बाबा का जलाभिषेक करने के लिए सुबह पहुंचेंगे।

मंगलवार सुबह तक नो व्हीकल जोन

मैदागिन से गोदौलिया होते रामापुरा और रामापुरा-गोदौलिया से मैदागिन तक मंदिर को जोड़ने वाला रोड सावन के प्रत्येक रविवार को रात आठ बजे से मंगलवार सुबह आठ बजे तक के लिए नो व्हेकिल जोन में परिवर्तित रहेगा। इसके तहत मैदागिन से गोदौलिया, रामापुरा तक और रामापुरा से गोदौलिया होकर मैदागिन तक किसी प्रकार के छोटे-बड़े वाहन नहीं जाने दिए जाएंगे। यह रोड केवल पैदल यात्रियों के आने जाने के लिए खुला रहेगा। किसी भी प्रकार का वाहन नहीं चलेगा।

22 अगस्त तक न जाएं गोदौलिया

लक्सा की तरफ से आने वाले वाहनों को लक्सा थाने से गुरुबाग व कमच्छा की ओर मोड़ दिया जाएगा। यहां से लक्सा से बेनिया जा सकेंगे। अपर पुलिस आयुक्त यातायात विकास कुमार ने बताया कि लहुराबीर से होकर गोदौलिया की तरफ जाने वाली सभी प्रकार की सवारी गाडि़यों को बेनियाबाग से होते हुए औरंगाबाद पुलिस चौकी से लक्सा की तरफ मोड़ दिया जाएगा। वहीं, अस्सी, सोनारपुरा से होकर गोदौलिया की तरफ जाने वाली सभी प्रकार के वाहनों को सोनारपुरा चौराहे से भेलूपुर थाने की तरफ मोड़ दिया जायेगा। भेलूपुर थाने से रेवड़ी तालाब होकर रामापुरा चौराहे की तरफ जाने वाले सभी प्रकार के वाहनों को तीलभांडेश्वर से भेलूपुर की तरफ मोड़ दिया जायेगा। यह 22 अगस्त तक जारी रहेगा।

अन्य मंदिरों में भी तैयारी पूरी

बाबा विश्वनाथ के अलावा शहर के अन्य शिव मंदिरों में भी सावन को लेकर तैयारी को पूरा कर लिया गया है। उनमें बीएचयू विश्वनाथ मंदिर, सारंगनाथ, मारकंडेश्वर महादेव, तिलभांडेश्वर महादेव, शूल टंकेश्वर महादेव सहित कई मंदिर शामिल हैं। यहां भी पूरे सावन भर आस्थावानों की भीड़ उमड़ी रहती है।