- घटना के दो दिन पहले डॉक्टर दंपति ने दो अन्य भाइयों पर जताया था हत्या शक

- अनिल का नहीं था जिक्र

डॉ। सपना दत्ता और उनके पति को घटना के दो दिन पहले तक कातिल अनिल के ऊपर शक तक नहीं था, बल्कि उनके साथ मकान में ही रह रहे दो भाइयों से खतरे की बात कही थी। इस मसले को लेकर हत्या से दो दिन पहले डॉक्टर अंजनी के माध्यम से थाने में दी गई लिखित शिकायत से ये बात साफ होती है। हालांकि जब पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने की बात कही तो डॉ। अंजनी ने ही अपने शिकायत को वापस ले लिया और पुलिस से यह कहा कि मैं मुकदमा नहीं समाधान चाहता हूं और आप घर पर आकर परिवार को समझा दो।

दो दिन पहले की थी शिकायत

डॉ। अंजनी दत्ता ने घटना से दो दिन पहले सिगरा थाने में एक एप्लीकेशन दी थी, जिसमें लिखा था कि पारिवारिक विवाद को लेकर मेरे व मेरे परिवार के ऊपर खतरा है। उन्होंने दो भाई आशीष कुमार दत्ता और अजीत दत्ता से खतरा बताया था। उस एप्लीकेशन में कहीं भी अनिल का जिक्र नहीं था।

दो घंटे तक पुलिस ने था समझाया

एप्लीकेशन के आधार पर नगर निगम चौकी प्रभारी हरिश्चंद्र वर्मा अपने हमराही सिपाही के साथ अंजनी दत्ता के घर गए और पूरे परिवार को साथ में बैठाकर समझाया। करीब दो घंटे तक चौकी प्रभारी वहां रहे। यह सब वहां लगे सीसीटीवी में कैद है।

चौकी प्रभारी पर गिर गई गाज-

घटना के दिन ही देर शाम पुलिस उपायुक्त काशी जोन अमित कुमार द्वारा वरुणा जोन के अंतर्गत आने वाले सिगरा थाना क्षेत्र के नगर निगम चौकी प्रभारी हरिश्चंद्र वर्मा को अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही, उदासीनता बरतने के आरोप ने निलंबित कर दिया गया।

यह था पूरा मामला

सिगरा थाना क्षेत्र के महमूरगंज के संत रघुवर नगर कॉलोनी में स्थित दत्ता डायग्नोस्टिक एंड फैक्चर सेंटर पर बुधवार यानी 21 जुलाई को कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ। सपना गुप्ता दत्ता की उनके सगे देवर अनिल दत्ता और नौकर रोशन चौधरी ने मिलकर हत्या कर दी थी। हत्या के बाद अनिल ने खुद को पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया, जबकि नौकर रोशन को पुलिस ने गिरफ्तार किया। गुरुवार को दोनों आरोपितों को पुलिस ने जेल भेज दिया है।

किसी से मिलने को नहीं है तैयार डॉ। दत्ता

90 के दशक में जिस परिवार के मुखिया का बनारस शहर ही नहीं राजधानी में नाम रहा हो। वह आज किसी से मिलने की इच्छा तक नहीं जता रहे हैं। इसका कारण कुछ और नहीं पारिवारिक कलह के चलते पुत्रवधु की हत्या और उस हत्या के आरोप में एक बेटे का जेल जाना है। घटना के दिन उनकी आखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वहीं घटना के दो दिन बाद भी उनके जानने वाले मोबाइल या घर पर पहुंचकर हाल जानने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वो किसी से मिलना ही नहीं चाहते हैं। काफी प्रयासों के बाद एक-दो लोगों से मिल भी रहे हैं तो वो इस घटना का जिक्र कर फफक कर रो पड़ रहे हैं।