-पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस महासचिव ने सामूहिकता पर उठाए सवाल, सीएम का चेहरा घोषित करने की पैरवी

-कहा, पोस्टर, मंचों पर नहीं मिला स्थान, संगठन में कुछ व्यक्तियों को शामिल करने को एआईसीसी जाना पड़ा

देहरादून, जेएनएन

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने लगातार तीसरे दिन भी विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की पुरजोर पैरवी जारी रखी। वह पूरी तरह सामूहिक नेतृत्व की पार्टी की नीति की मुखालफत में उतर चुके हैं। अलबत्ता उन्होंने मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में खुद पीछे हटने की पहल के साथ युवा हाथों में बागडोर देने पर जोर दिया। इसे उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत करते हुए उन्होंने पार्टी की सेवा करार दिया।

प्रदेश संगठन पर लगाए आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इंटरनेट मीडिया पर बुधवार को दिनभर कई पोस्ट डालीं। पार्टी में सामूहिक नेतृत्व के कारणों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने प्रदेश संगठन पर गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संगठन ने उन्हें सामूहिकता के लायक नहीं समझा। प्रदेश कांग्रेस के नवनिर्वाचित सदस्यों व पदाधिकारियों की पहली बैठक में मंच से पार्टी के शुभंकर महामंत्री संगठन ने तीन बार नेताओं की जिंदाबाद बुलवाई। सचिवगणों की भी जिंदाबाद लगाई गई, मगर नवनियुक्त राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत को मंच से जिंदाबाद बुलवाने लायक नहीं समझा गया।

बताया पार्टी का हित

उन्होंने कहा कि इस विषय को अलग रखने पर भी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करना पार्टी के हित में होगा। प्रदेश में स्थान-स्थान पर जनांदोलन हो रहे हैं। राज्य में दो प्रमुख पदों प्रदेश अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष को जन संघर्षो को कांग्रेस के साथ जोड़ने के लिए वहां पहुंचना आवश्यक है। आज उनके लिए ऐसा करना संभव नहीं है। ऐसे में हमें युवा हाथों में बागडोर देने के लिए उत्सुक होना चाहिए। इसके लिए वह खुद को उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत कर रहे हैं, ताकि अन्य राज्यों और क्षेत्रों में भी यह सिलसिला आगे बढ़ सके।

सबको निशाने पर लिया

पार्टी के राष्ट्रीय नेता हरीश रावत ने दर्द और तंज से हरेक को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से राज्यों में जीत के लिए अपनाए जा रहे फार्मूले का स्थानीय तोड़ निकलना चाहिए। भाजपा को चेहरा बनाम कांग्रेस का चेहरा जनता के सामने रखा जाए, ताकि स्थानीय सवालों के तुलनात्मक आधार पर निर्णय हो सके।

नहीं दी जा रही तवज्जो

सामूहिक नेतृत्व की पैरोकारी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के आधिकारिक पोस्टर में उनका फोटो न होने पर इसका ध्यान नहीं रखा गया। उन्होंने पार्टी के मंचों पर तवज्जो नहीं देने का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन में कुछ व्यक्तियों की संस्तुति करने के लिए उन्होंने उन्हें एआईसीसी का दरवाजा खटकाना पड़ा, तब सामूहिकता का ध्यान नहीं रखा गया।