- कई कंस्ट्रक्शन और रिपेयरिंग के काम हुए पूरे

- हॉस्पिटल स्टाफ के अलावा कोई नहीं आता यहां

देहरादून

पिछले आठ महीने के दौरान दून हॉस्पिटल के पुराने कैंपस की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। इस दौरान यहां कई नये कंस्ट्रक्शन हो गए हैं और दर्जनों रिपेयरिंग के काम चल रहे हैं। कोविड हॉस्पिटल बनने के बाद से इस हॉस्पिटल में सिर्फ कोविड-19 सस्पेक्टेड और कंफर्म पेशेंट्स की ही एंट्री हो पा रही है। पेशेंट्स को यदि कोई सामान पहुंचाना हो तो उसे भी गेट पर ही देना होता है। दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने हॉस्पिटल परिसर में का रियलिटी चेक किया तो कई बदलाव नजर आये।

फुट ओवर ब्रिज से जुड़ी बिल्डिंग

हॉस्पिटल के पुराने कैंपस से अब एडमिस्ट्रेशन नई बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया गया है। एडमिनिस्ट्रेशन बिल्डिंग को आईसीयू वार्ड में तब्दील किया जा रहा है। इस बिल्डिंग को ओटी वाली बिल्डिंग से जोड़ने के लिए फुट ओवर ब्रिज का काम पूरा हो चुका है। इंदिरा अम्मा भोजनालय और जन औषधि केंद्र को भी बाहर कर दिया गया है। इन्हें भी आईसीयू का हिस्सा बनाया जा रहा है।

भरा-पूरा पेड़ काट दिया

इस दौरान हॉस्पिटल कैंपस में पीपल के बड़े पेड़ की भी काट-छांट की गई। मरीज और उनके अटेंडेंट इस पेड़ की छाया में बैठकर सुस्ता लेते थे, लेकिन पेड़ की सभी टहनियां काट दी गई हैं। पेड़ के नाम पर यहां अब केवल ठूंठ बचा हुआ है।

पुराना ओपीडी सूना

हॉस्पिटल के जिस ओपीडी में पहले भारी भीड़ जमा रहती थी, वह अब पूरी तरह खाली और साफ-सुथरा नजर आ रहा है। हॉस्पिटल में मेडिकल स्टाफ, गार्ड और विशेष परिस्थितियों में आने वालों के अलावा कोई नजर नहीं आ रही है। कई जगह सुरक्षाकर्मी बिठाये गये हैं, जो आने वालों से लगातार पूछताछ कर रहे हैं। विशेष परिस्थितियों केवल उसी पेशेंट के परिजनों को वार्ड के बाहर तक जाने की अनुमति दी जा रही है, जिसे वार्ड से बुलाया जाता है। पेशेंट को यदि कोई सामान पहुंचाना हो तो उसे भी गेट पर ही छोड़ने की व्यवस्था की गई है।

लगातार सेनिटाइजेशन

हॉस्पिटल कैंपस में बेशक बहुत कम लोग पहुंच रहे हैं, इसके बावजूद सेनिटाइजेशन नियमित रूप से किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार दिन में दो बार पूरे हॉस्पिटल परिसर और वार्डो को सेनिटाइज किया जा रहा है। इसके लिए एक ट्रैक्टर और कुछ कर्मचारियों की खासतौर पर व्यवस्था की गई है।