- पेयजल योजनाओं ठीक मॉनिटरिंग न होने से पेयजल संकट से जूझ रहे दूनाइट्स
- लीकेज के कारण सड़कों पर बह रहा पानी, इलाके वाले परेशान

देहरादून (ब्यूरो): अधिकांश पानी लीकेज के कारण सड़कों पर बह रहा है। कहीं पेयजल लाइनें भी बिछी हैं और पानी की टंकियां भी हैं, इसके बावजूद लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। अधिकारियों की लापरवाह कार्यशैली के चलते शहर की बड़ी आबादी की प्यास नहीं बुझ पा रही है। कुल मिलाकर जर्जर हो चुके शहर के पेयजल सिस्टम से आम पेयजल कंज्यूमर पानी को तरस रहा है।

20 नई टंकियां, पानी एक में भी नहीं
शहर की करीब सवा लाख आबादी की प्यास बुझाने के लिए वल्र्ड बैंक की सहायता से मेंहूवाला पेयजल क्लस्टर योजना का निर्माण किया गया है। योजना के तहत मेंहूवाला और आर्केडिया क्षेत्र में नई पाइप लाइन बिछा दी गई है। योजना पर करीब 162 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। योजना के तहत 20 ओवर हेड टैंक का निर्माण किया गया है। जबकि चार टैंक का निर्माण किया जाना बाकी है। क्षेत्र के सोशल एक्टिविस्ट वीरू बिष्ट, निशा गुप्ता और नवनीत पंवार का कहना है कि क्षेत्र में पानी के 20 टैंक बने काफी समय हो गया है, लेकिन पानी एक भी टैंक से शुरू नहीं हो पाया है, जिससे योजना का लाभ क्षेत्र के हजारों लोगों को नहीं मिल पा रहा है।

कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति ठप
गोरखपुर ट्यूबवेल के पास तीन दिन पहले पानी की मेन पाइपलाइन क्षेत्र में बिछ रही नई पेयजल लाइन की खोदाई के दौरान तोड़ दी गई, लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पाइपलाइन नहीं जोड़ी गई, जिससे मोहनपुर नहर वाली सड़क, जोहड़ बस्ती, शिवलोक कालोनी और कृष्ण विहार क्षेत्र की पेयजल आपूर्ति बाधित है। क्षेत्रवासी पेयजल अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। कालोनी के लोग टैंकर मंगाकर काम चला रहे हैं।

मानकों के अनुसार पेयजल आपूर्ति नहीं
दूननाइट्स की आबादी तकरीबन 12 लाख पहुंंच गई है। डब्ल्यूएचओ के मानकों के हिसाब से 135 लीटर पानी प्रति व्यक्ति रोजाना चाहिए, लेकिन कई जगहों पर 100 लीटर प्रति व्यक्ति डेली आपूर्ति हो रहा है। जल संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक दूनाइट््स को 276.58 मिलियन लीटर डेली (एमएलडी) पानी की डिमांड है, इसके सापेक्ष जल संस्थान 241.18 एमएलडी पानी उपलब्ध करा पा रहा है। इस हिसाब से वर्तमान में पानी की डिमांड और उपलब्धता में 35 एमएलडी यानि करीब 350 करोड़ लीटर रोजाना पानी की कमी है। ये डिमांड और उपलब्धता 2011 की जनगणना के अनुसार 569578 लाख से लेकर 2020 तक 882983 लाख पापुलेशन के लिए डिजाइन है। अब टारगेट इयर और पापुलेशन पार हो गई है। ऐसे में भविष्य में पानी का संकट गहराने के आसार हैं।

20 साल में 6 गुना घट गया ट्यूबवेलों का डिस्चार्ज
ट्यूबवेल स्कीम पहले अब
विजय पार्क-1 1400 700
वाणी विहार 2200 1500
टैगोल विला 2000 800
राजेंद्रनगर गली नंबर 8 1800 300
कौलागढ़ नंबर 2 चुंगी 1800 1000
नाचघर राजेंद्रनगर 2200 500
कौलागढ़ ओएचटी 1000 600
(डिस्चार्ज लीटर प्रति मिनट के हिसाब से)

800 करोड़ की स्कीमें पाइपलाइन में

शहर के जिन इलाकों में पानी की कमी है वहां के लिए नई स्कीमें बनाई जा रही है। कुछ पेयजल योजनाओं का काम पेयजल निगम और जल संस्थान द्वारा किया जा रहा है। कुछ योजनाएं स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बनाई जा रही है। कई ट्यूबवेल और ओवर हेड टैंक बनाए भी जा चुके हैं, जबकि कई निर्माणाधीन हैं। करीब 800 करोड़ के लगभग की पेयजल योजनाओं का काम चल रहा है।

सड़क पर बर्बाद हो रहा पानी
शहर से सटे सिमलास ग्रांट रोड नांगल ज्वालापुर में 10 दिनों से पेयजल लाइन टूटी हुई है। सड़क पर रोजाना लाखों लीटर पानी सड़क का बह रहा है। सोशल एक्टिविस्ट उम्मेद बोरा और रामचंद्र सिंह ने कहा कि घरों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है, वहीं जो पानी पहुंच भी रहा है वह शुद्ध नहीं है। लीकेज के चलते घरों में गंदा पानी आपूर्ति हो रहा है। गंदे पानी की सप्लाई से क्षेत्र में पानी का संकट बना हुआ है।

मेंहवाला स्कीम के तहत सभी ओवर हेड टैंकों का लगभग निर्माण हो चुका है, लेकिन कई कालोनी में अभी पाइपलाइन बिछने का काम अंतिम चरण में है। ओवर हेड टैंकों केे राइजिंग मेन लाइन बिछाने का काम चल रहा है। अगले माह तक ट्रायल के बाद सभी टैंकों से पेयजल आपूर्ति सुचारू कर दी जाएगी।
मुज्जमिल हसन, अधिशासी अभियंता, पेयजल निगम, वल्र्ड बैंक यूनिट, देहरादून