देहरादून (ब्यूरो) राजधानी बनने के बाद दून में तेजी से आबादी बढ़ रही है। मिड सिटी से लेकर आउटर इलाकों में सड़कों के विस्तार के साथ ही विकास के नाम पर सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर हरे पेड़ों पर आरियां चल रही हैं। बाग-बागीचे काटकर रातों-रात इलीगल तरीके से प्लॉटिंग की जा रही है। कृषि भूमि पर बहुमंजिला बिल्डिंग्स खड़ी की जा रही हैं। शहर में हर तरफ कंक्रीट के जंगल उग आए हैं, जिससे दून की हरियाली गायब हो रही है। जानकारों की मानें तो हरियाली गायब होने से शहर का टेंपरेचर भी पिछले 20 साल में दो से तीन डिग्री तक बढ़ गया है। आलम यही रहा तो आने वाले समय में सांस लेने में घुटेगा।

गुम हो गया हरित दून का नारा
सुंदर दून, हरित दून का नारा अब सिर्फ नारों में ही देखने को मिल रहा है। जमीनी हकीकत यह है कि तमाम प्रयासों के बावजूद अब सिर्फ शहर में ग्रीन एरिया का दायरा घटता जा रहा है। कभी शहर में 60 परसेंट हरियाली हुआ करती थी, जो धीरे-धीरे घटकर 1 परसेंट तक रह गई है।

सर्वे में ये भी आए फैक्ट्स
- 58.43 परसेंट एरिया का है आवासीय उपयोग में
- 9.33 परसेंट है मिक्स एरिया
- 4 परसेंट है कॉमर्शियल एरिया
- 1 परसेंट इंडस्ट्रियल एरिया
- 9.42 परसेंट एजुकेशन व हेल्थ
- 1.09 परसेंट ग्रीन एरिया
- 11 परसेंट सड़कें, ट्रांसपोर्टेशन

ये संस्थानों के कैंपस में ग्रीनरी
- एफआरआई
- ओएनजीसी
- पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट
- कैंटोनमेंट बोर्ड
- इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सैंसिंग
- वाइल्ड लाइफ
- वाडिया इंस्टीट्यूट

कहां बने ग्रीन पार्क, दें सुझाव
शहर में 12 लाख से अधिक की आबादी है। सैकड़ों सामाजिक संगठन हैं। लेकिन महायोजना-2041 के लिए महज चंद संस्थाओं ने ही सुझाव दिए हैं। किस एरिया में कहा पार्क बनने चाहिए, सड़कें कितनी चौड़ी होनी चाहिए, हॉस्पिटल बने, कहां ग्रीन एरिया छोड़ा जाए सरीखे सुझाव दिए जाएं। चीफ टाउन प्लानर ने बताया कि आपत्तियों पर सुनवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन यदि आज भी कोई सुझाव देना चाहते हैं तो वह दे सकते हैं। नोटिफिकेशन के तीन दिन पहले तक के सुझाव को महायोजना में शामिल किया जाएगा। आज भी उन्होंने इंद्रानगर और वसंत विहार के आवास-विकास एरिया से संबंधित आपत्तियां सुनीं। यह क्रम मास्टर प्लान के लागू होने से पहले तक चलता रहेगा।

वसंत विहार की तरह बने रोड
महायोजना में सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने के बजाय कम करने के सुझाव मिले हैं। किसी भी संस्था ने यह नहीं कहा कि वसंत विहार एरिया की तरह सड़कें 30 से लेकर 60 फुट तक चौड़ी हों। इंद्रानगर और वसंत विहार की कॉलोनियां आवास-विकास विभाग ने बनाई है। अब जो कॉलोनियां बस रही हैं वह 10 से लेकर 20 फुट तक है। इन सड़कों पर पेड़ लगाने की जगह नहीं है।

दून में ग्रीन एरिया बहुत कम बचा है। हरियाली के लिए मास्टर प्लान को सख्ती से इंप्लीमेंट कराने की जरूरत है। ट्रैफिक व ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए सड़कों की चौड़ाई बढ़ाना आवश्यक है। महायोजना के लिए यदि अभी भी कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो उनका वेलकम है।
शशि मोहन श्रीवास्तव, चीफ टाउन प्लानर

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