- नेशनल शिक्षा नीति-2020 पर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ऑफिस में प्रिंसिपल्स ने रखे विचार
- शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर शैलेंद्र अमोली ने साझा की महत्वपूर्ण जानकारियां

देहरादून, ब्यूरो: छात्र-छात्राएं जहां अपने रुचि के अनुसार पढ़ाई करने के साथ-साथ बेहतर कॅरियर ऑप्शन चुन सकेंगे वहीं उन्हें वोकेशनल एजुकेशन का भी लाभ बड़ा मिलेगा। एनईपी बच्चों की गू्रमिंग में बढ़ावा मिलेगा। सबसे अहम बात यह है कि एनईपी से एक देश एक शिक्षा नीति को भी बढ़ावा मिलेगा। यह बात दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट की ओर से आयोजित प्रिंसिपल मीट में स्कूल के प्रिंसिपल्स ने कही। कार्यक्रम में गेस्ट ने नेशनल शिक्षा नीति पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि एनईपी से सभी एक समान शिक्षा के साथ-साथ क्वालिटी एजुकेशन ले सकेंगे। सबसे अहम बात है कि स्टूडेंट्स अपनी रुचि के अनुसार पढ़ाई कर कॅरियर का चुनाव कर सकेंगे। अब सरकारी और प्राईवेट स्कूलों में एक ही पॉलिसी के तहत पढ़ाई होगी।

खुलकर रखी बात
प्रिंसिपल मीट में सभी ने खुलकर अपनी बात रखी। उनके अनुसार बच्चों को नर्सरी से ही पूर्ण विकास होगा। बच्चों में मानसिक एवं शारीरिक विकास होगा। शिक्षकों में पढ़ाने के तरीके में काफी सारे बदलाव देखने को मिलेंगे।

सिर्फ लिसनर नही रहेंगे बच्चे
नेशनल शिक्षा नीति के तहत बच्चा क्लास में केवल लिसनर की तरह नहीं रहेगा। वह पार्टिसिपेट भी करेंगे। इससे बच्चों की क्षमताओं के बारे में पता चल सकेगा। साथ ही स्कूलों को भी बच्चों के स्किल डेवलप करने में सपोर्ट करना होगा। इससे यह भांपने में मदद मिलेगी कि बच्चे का एप्टीट््यूट क्या है। बच्चा आखिर क्या करना चाहता है।

रीजनल लैंग्वेज को मिलेगा बढ़ावा
एनईपी में रीजनल लैंग्वेज को बढ़ावा दिया जाएगा। उत्तराखंड में विविध भाषाओं की कम्युनिटीज रहती हैं। गढ़वाली भाषा नहीं बोली है। राज्य की भाषा हिंदी है। हालांकि गढ़वाली-कुमाऊंबोली में कई चैप्टर को सिलेबस में शामिल किए जाने का सुझाव दिया गया।

बनेगा स्वतंत्र आयोग
उत्तराखंड शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अमोली ने एनईपी को लेकर मीट में कई अहम जानकारियां साझा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने एनईपी के मानकों के अनुरूप शिक्षण कार्य करना शुरु कर दिया है। बेस्ट एजुकेशन क्वालिटी को लेकर आईडेंटीफाई कर 172 अटल विद्यालय संचालित किए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 2025 तक स्टूडेंट का पहला बैच निकल जाए, जो किसी एक स्किल में पारंगत हो। 200 स्कूलों में स्किल डेवलपमेंट के 8 कोर्स शुरू किए गए हैं।

मीट की महत्वूर्ण बातें
-नर्सरी से लेकर 12वीं तक होंगे फोर्थ स्टेज
-बच्चों के एसेसमेंट पर होगा बड़ा वर्क
-9वीं के बाद होगा छात्रों का करीकुलम डेवलपमेंट
-पहली बार प्री प्राइमरी सेक्शन पर बात, बनेगी बाल वाटिका
-टीचर्स को बीएड, टीईटी के साथ साल भर में 52 घंटे की ट्रेनिंग अनिवार्य
-बच्चों का बस्ता कम होगा
-स्कूलों में 90 फीसदी लर्निंग, प्रैक्टिकल से होगा डेवलपमेंट
-मातृभाषा में 5वीं तक की पढ़ाई
-कक्षा पांच तक कोई परीक्षा नहीं, आठवीं में एक्टिविटी और प्रोजेक्ट के आधार पर होगी परीक्षा

ये मिले सुझाव
- रोजगार आधारित शिक्षा मिले, नंबरों के फेर में न उलझे भविष्य
- विदेशों की तर्ज पर नर्सरी से ही बच्चों के अंदर डेवलप हो वैज्ञानिक सोच
- दिव्यांगों को बने स्पेशल एजुकेशन सिस्टम जोन
- स्लैबस में की जाए लोकल भाषा को भी शामिल

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में सरकार को चाहिए कि चाइल्ड फॉर स्पेशल नीड पर काम करने की जरूरत है। इसे जल्द से जल्द विभाग को लागू करवाना होगा। जिससे केवल कागजों में नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर काम होना चाहिए।
डॉ। स्वाति आनंद, प्रिंसिपल, धर्मा इंटरनेशनल स्कूल

'लर्न बाई मेमोराइजÓ पर नहीं बल्कि लर्निंग फॉर डूइंग पर काम करने की जरूरत है। जिससे बच्चे प्रेक्टिकल अधिक कराए जाए। जिससे बच्चे किताबी कीड़ा न बने। हर बच्चे को इसमें शामिल करने की जरूरत है।
परमप्रीत सिंह ग्रेवाल, प्रिंसिपल, जीआरडी एकेडमी

देश में अटल विद्यालय बनाए जाने थे। लेकिन, लम्बे समय के बाद भी अब तक अटल विद्यालय को नहीं बढ़ाया गया है। देश के अटल विद्यालय की संख्या को बढ़ाया जाना है। इस पर अधिक काम करने की जरूरत है।
दिनेश बड़त्थवाल, प्रिंसिपल, दून इंटरनेशनल स्कूल

गुड स्कूल की परिकल्पना स्पष्ट होनी चाहिए। एक स्कूल को उसके इंफ्रास्ट्रक्चर पर नहीं बल्कि उसके रिजल्ट पर गुड स्कूल का दर्जा मिलना चाहिए। यहीं नहीं बच्चों को किताबी कीड़ा न बनाकर उसे सही ज्ञान देने की जरूरत है।
राकेश काला, प्रिंसिपल, विलफील्ड पब्लिक स्कूल

हम समाज व परिवार से दूर भागते जा रहे हैं। शिक्षा नीति से दायित्व बोध होगा। सही मूल्यांकन तब होगा जब यह लागू होगा इससे शिक्षकों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। इसके लागू होने से नैतिक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। तभी यह 2030 में पूर्ण रूप से लागू हो सकेगी।
प्राची जुयाल, प्रिंसिपल एसजीआरआर रेर्सकोर्स

शिक्षा नीति के तहत कई बड़े बदलाव किए गए है। पिछले 50 सालों से एक ही ढर्रे पर पांरपरिक शिक्षा नीति चल रही थी। बीते साल बोर्ड की परीक्षा दो बार होना इसका हिस्सा थी। इसके साथ ही अन्य कई बदलाव देखने को मिलेंगे।
विशाल जिंदल, प्रिंसिपल, स्वामी विवेकानंद स्कूल

शिक्षा नीति में जो बदलाव किए गए हैं, उसे पूर्णतया लागू किया जाए तो बच्चों को काफी फायदा होगा। छोटे बच्चों को इससे काफी लाभ होने जा रहा है। इससे बच्चों पर बोझ कम होगा।
पीयूष निगम, केवी आईएमए
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