आगरा (ब्यूरो)। दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल का धवल संगमरमरी हुस्न और उस पर अठखेलियां करतीं चंद्रमा की शीतल रश्मियां। ऐसा अनूठा नजारा कि जमीं पर जन्नत उतर आई हो। चांदनी में दमकते ताज के हुस्न में जड़े नगीने (सेमी प्रीसियस व प्रीसियस स्टोन)। यही चमकी है, जिसके दीदार को सैलानी बेकरार रहते हैं। इस बार 13 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा पर चमकी दिखेगी।

दमक उठता है ताजमहल का सौंदर्य

शरद पूर्णिमा (फुल मून) पर चंद्रमा की किरणें जब ताजमहल पर पड़ती हैं तो उसका सौंदर्य दमक उठता है। ताज पर पच्चीकारी में जड़े कीमती पत्थर चमक उठते हैं। इस नजारे के दीदार का ख्वाब हजारों सैलानी संजोते हैं। इस बार शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर (रविवार) को है। माह में पांच दिन (पूर्णिमा, उससे दो दिन पूर्व व दो दिन बाद) रात्रि दर्शन होता है। इस बार पांच दिनों में शुक्रवार की साप्ताहिक बंदी भी है, जिसके चलते चार दिन ही रात्रि दर्शन होगा। शनिवार से मंगलवार तक रात्रि दर्शन होगा। इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के माल रोड स्थित कार्यालय से टिकटों की बिक्री नियमानुसार शुक्रवार से शुरू हो जाएगी।

एक दिन में अधिकतम 400 पर्यटक कर सकते हैं दीदार

रात्रि दर्शन का टिकट एक दिन पूर्व लेना होता है और स्मारक में वीडियो प्लेटफार्म से आगे जाने की अनुमति पर्यटकों को नहीं होती है। मकबरे से इसकी दूरी करीब 300 मीटर है। मौसम खराब रहने या बादल होने पर सैलानियों का चमकी देखने का ख्वाब अधूरा रह जाता है। ताज रात्रि दर्शन में एक दिन में अधिकतम 400 पर्यटकों को ही स्मारक में प्रवेश मिलता है। रात 8:30 से 12:30 बजे तक पर्यटक ताज देख पाते हैं। उन्हें 50-50 के बैच में आधे घंटे के लिए स्मारक में ले जाया जाता है।

कभी पूरी रात खुलता था ताज

चमकी पर अब भले ही ताज केवल चार घंटे लिए खुलता हो, लेकिन पूर्व में यह पूरी रात खुलता था। वर्ष 1984 से पूर्व तक ताज में चमकी देखने पर कोई बंदिश नहीं थी। पूरी रात स्मारक खुलता था और मुख्य मकबरे से पर्यटक चमकी देखते थे। तब मुख्य मकबरे पर रेलिंग के पत्थर हटाकर लकड़ी का रैंप बनाया जाता था। उससे सैलानी ऊपर जाते थे। वर्ष 1984 में सुरक्षा कारणों से ताज रात्रि दर्शन बंद कर दिया गया था। 20 वर्ष बाद नवंबर, 2004 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर माह में पांच दिन ताज रात्रि दर्शन कुछ बंदिशों के साथ शुरू हुआ।

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