- विजिलेंस डायरेक्ट्रेट ने आरटीआई के तहत सूचना देने से किया था इनकार, तीन वर्ष से लटका था मामला

- सूचना आयोग ने दिए थे सूचना देने के आदेश तो विजिलेंस ने हाई कोर्ट में की थी आदेश के खिलाफ अपील

- हाई कोर्ट की सिंगल व डबल बेंच ने खारिज की थी याचिका, अब विजिलेंस को सूचना व क्षतिपूर्ति भी देनी होगी

देहरादून:

सतर्कता निदेशालय (विजिलेंस) अब राइट टू इन्फॉर्मेशन (आरटीआई) एक्ट के दायरे में आ गया है. तीन वर्ष की उधेड़बुन के बाद सूचना आयोग ने उस अपील का डिस्पोजल कर दिया है, जिसमें विजिलेंस ने आरटीआई में सूचना देने से इनकार कर दिया था. हाई कोर्ट में मामला पहुंचा, कोर्ट ने भी विजिलेंस को राहत नहीं दी थी. अब राज्य सूचना आयुक्त चंद्र सिंह नपलच्याल ने विजिलेंस को आरटीआई के तहत सूचना देने के आदेश जारी कर दिए हैं. इसके साथ ही करीब 3 साल तक आरटीआई एक्टिविस्ट चंद्र शेखर करगेती को विजिलेंस डायरेक्ट्रेट समेत सतर्कता विभाग (शासन) व सुराज भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं जन सेवा विभाग को 22 हजार रुपये क्षतिपूर्ति के तौर पर देने के आदेश दिए है.

हाई कोर्ट ने खारिज की थी याचिका

आरटीआई एक्टिविस्ट चंद्र शेखर करगेती ने विजिलेंस डायरेक्ट्रेट से वर्ष 2016 में आरटीआई में करप्शन संबंधी मामले में प्रदेशभर के अफसरों पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी. आरटीआई के इस आवेदन को विजिलेंस डायरेक्ट्रेट ने खारिज करते हुए जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया था. इसके बाद जब मामला सूचना आयोग में गया तो वर्ष 2017 में तत्कालीन सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत ने विजिलेंस को करप्शन से संबंधित सूचना देने के आदेश दिए थे. इसी के साथ आरटीआई एक्टिविस्ट करगेती ने सतर्कता विभाग (शासन) व सुराज भ्रष्टाचार उन्मूलन विभाग से भी जानकारी मांगी. किसी भी आवेदन पर उन्हें सूचना नहीं दी गई. इधर सूचना देने संबंधी आदेश के खिलाफ विजिलेंस डायरेक्ट्रेट ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी. सिंगल बेंच में डायरेक्ट्रेट की याचिका के खिलाफ आदेश पर डायरेक्ट्रेट ने पर डबल बेंच में याचिका दायर की. यहां से भी डायरेक्ट्रेट को राहत नहीं मिल पाई. इसी के साथ हाई कोर्ट से सूचना आयोग को कार्रवाई की अनुमति मिल जाने के बाद राज्य सूचना आयुक्त चंद्र सिंह नपलच्याल ने सुनवाई शुरू की. अब प्रकरण का डिस्पोजल करते हुए आयोग ने आदेश दिया कि अपीलार्थी को मांगी गई सभी सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएं.

अपीलकर्ता को दी जाएगी 22 हजार क्षतिपूर्ति

सतर्कता विभाग (शासन) : अपर मुख्य सचिव सतर्कता अपीलार्थी को आयोग के आदेश की प्राप्ति के 3 माह के भीतर 10 हजार रुपये क्षतिपूर्ति दिलाना सुनिश्चित करेंगे.

सुराज भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं जन सेवा विभाग: अपर मुख्य सचिव सतर्कता अपीलार्थी को आदेश की प्राप्ति के 3 माह के भीतर 7 हजार रुपये क्षतिपूर्ति दिलाना सुनिश्चित करेंगे.

विजिलेंस डायरेक्ट्रेट : निदेशक को आदेश दिए गए हैं कि वह आदेश प्राप्ति के 3 माह के भीतर अपीलार्थी को 5 हजार रुपये क्षतिपूर्ति अदा करा दें.